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AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने यमुना में झाग हटाने के टेंडर को लेकर दिल्ली सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रवेश वर्मा से ठेकेदार की मौजूदगी और टेंडर प्रक्रिया पर जवाब मांगा।
दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और झाग खत्म करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यमुना में झाग हटाने का टेंडर खुलने से पहले ही ठेकेदार मौके पर काम करने पहुंच गया। उन्होंने दिल्ली सरकार से इस मामले में जवाब मांगा और पूछा कि आखिर ठेकेदार को काम शुरू करने की अनुमति किस आधार पर मिली।
सौरभ भारद्वाज ने ठेकेदार की मौजूदगी पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उनके आरोप के मुताबिक, यमुना में झाग हटाने के काम के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही ठेकेदार मौके पर पहुंच गया था। उन्होंने दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा से पूछा कि जब निविदा प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई थी, तो ठेकेदार को काम करने का अवसर कैसे मिला।
AAP नेता ने इस घटनाक्रम को सरकारी ठेकों की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल किया कि क्या संबंधित प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई थी। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
भ्रष्ट भाजपा का अनोखा मॉडल…
यमुना defoaming का टेंडर खुलने से पहले ही ठेकेदार defoaming करने पहुंच गया।
प्रवेश वर्मा जवाब दें–आखिर ये कैसी सेटिंग है उनकी ठेकेदार से? क्या ये वही मॉडल है जो 700 करोड़ के स्वास्थ्य घोटाले में भी लागू हुआ था?
@Saurabh_MLAgk https://t.co/CJwpIfPW73
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) October 21, 2026
700 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य घोटाले से भी जोड़ा मामला
सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में इस कथित घटनाक्रम की तुलना 700 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य घोटाले के आरोपों से भी की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दोनों मामलों में ठेके देने का तरीका एक जैसा था। हालांकि, यह तुलना उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है। यमुना सफाई के टेंडर और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आरोपों के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
टेंडर प्रक्रिया और पारदर्शिता पर उठे सवाल
सरकारी खरीद और ठेकों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निविदा की शर्तें, ठेकेदार का चयन, कार्यादेश जारी होने की तारीख और काम शुरू करने की अनुमति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी परियोजना में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले काम शुरू किए जाने का आरोप लगाया जाता है, तो संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर इसकी जांच की जानी चाहिए।
फिलहाल, सौरभ भारद्वाज के आरोपों के समर्थन में टेंडर दस्तावेज, कार्यादेश या संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ठेकेदार वास्तव में किस उद्देश्य से मौके पर पहुंचा था और क्या उस समय कोई अधिकृत कार्यादेश जारी किया गया था।
सरकार के जवाब का इंतजार
यमुना की सफाई दिल्ली के पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में सफाई परियोजनाओं पर होने वाले खर्च, ठेके देने की प्रक्रिया और काम की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। सौरभ भारद्वाज ने प्रवेश वर्मा से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। अब इस विवाद में संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और आधिकारिक दस्तावेजों के सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
नोट: ठेकेदार के टेंडर खुलने से पहले पहुंचने और 700 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य घोटाले से संबंध होने की बातें फिलहाल सौरभ भारद्वाज द्वारा उठाए गए आरोपों और सवालों के रूप में ही प्रस्तुत की जा रही हैं।