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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। जानें खराब वायु गुणवत्ता के प्रभाव, सिरदर्द और आंखों में जलन के संभावित कारण और बचाव के जरूरी उपाय।
दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों घर से बाहर निकलना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। इसकी वजह केवल ट्रैफिक, वाहनों का शोर या काम का तनाव नहीं, बल्कि बिगड़ती वायु गुणवत्ता भी हो सकती है। राजधानी में प्रदूषण बढ़ने के साथ लोगों को आंखों में जलन, सिरदर्द, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। हालांकि, इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल प्रदूषण से जोड़कर देखना सही नहीं है। 21 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। वहीं, वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के पूर्वानुमान में 22 अक्टूबर को हवा की स्थिति और बिगड़कर बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई थी। मौसम में बदलाव और मौसमी प्रदूषण के बढ़ने के साथ राजधानी में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है वायु प्रदूषण?
दिल्ली में अक्टूबर के दौरान मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण की समस्या गंभीर होने लगती है। गर्मियों और मानसून के बाद तापमान में गिरावट, हवा की गति में कमी और वातावरण की कुछ मौसमी परिस्थितियां प्रदूषक कणों को जमीन के करीब जमा रहने में मदद कर सकती हैं। इसके अलावा, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी अलग-अलग परिस्थितियों में वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
जब हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ती है, तो उन्हें सांस के साथ शरीर में जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेष रूप से पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से श्वसन और हृदय संबंधी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
AQI 244 का क्या मतलब है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI हवा में प्रदूषण के स्तर को समझने का एक तरीका है। भारत में 201 से 300 के बीच का AQI खराब श्रेणी में आता है। इसलिए 21 अक्टूबर को दिल्ली में दर्ज 244 का स्तर बताता है कि हवा की गुणवत्ता चिंताजनक थी और लंबे समय तक बाहर रहने से संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है।
AQI के बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और बढ़ सकते हैं। ऐसे समय में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। स्वस्थ लोगों को भी लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने या बाहर कठिन व्यायाम करने से बचना चाहिए। हवा की गुणवत्ता दिन और इलाके के अनुसार बदल सकती है, इसलिए बाहर निकलने से पहले अपने क्षेत्र का ताजा AQI देखना उपयोगी है।
क्या प्रदूषण से हो सकता है सिरदर्द और आंखों में दर्द?
प्रदूषण के संपर्क में आने पर कुछ लोगों को आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना, नाक में परेशानी, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हवा में मौजूद धूल और अन्य प्रदूषक आंखों तथा श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों को थकान या असहजता भी महसूस हो सकती है।
हालांकि, आंखों के पीछे दर्द या सिरदर्द होना प्रदूषण का निश्चित संकेत नहीं है। इसके पीछे नींद की कमी, तनाव, निर्जलीकरण, माइग्रेन, आंखों पर अधिक दबाव या साइनस की समस्या जैसे कारण भी हो सकते हैं। यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है या आंखों में लगातार दर्द बना हुआ है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
अचानक तेज सिरदर्द, अचानक धुंधला दिखाई देना या नजर में बदलाव, आंख में तेज दर्द, कमजोरी अथवा बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ऐसे लक्षणों को केवल मौसम या प्रदूषण का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के दौरान कुछ आसान उपाय स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।
– बाहर निकलने से पहले AQI देखें: अपने इलाके की वायु गुणवत्ता जांचें और प्रदूषण अधिक होने पर गैर-जरूरी बाहरी गतिविधियां कम रखें।
– खुले में व्यायाम करने से बचें: खराब हवा में दौड़ने या कठिन व्यायाम करने से सांस के साथ शरीर में अधिक प्रदूषक कण जा सकते हैं। जरूरत हो तो घर के अंदर व्यायाम करें।
– उपयुक्त मास्क का इस्तेमाल करें: बाहर जाना जरूरी हो तो सही तरीके से पहना गया अच्छी गुणवत्ता वाला एन95 मास्क सूक्ष्म कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है।
– घर के अंदर की हवा का ध्यान रखें: खिड़कियां खोलने का फैसला बाहर की वायु गुणवत्ता देखकर करें। उपलब्ध होने पर उपयुक्त वायु शोधक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
– आंखों में जलन होने पर सावधानी बरतें: आंखों को रगड़ने से बचें। परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चों और बुजुर्गों को रखें विशेष ध्यान
प्रदूषित हवा का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सांस लेने में परेशानी होने का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को प्रदूषण के अधिक स्तर वाले समय में बाहर कम निकलना चाहिए और डॉक्टर की ओर से दी गई दवाओं तथा उपचार संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर में मौसमी प्रदूषण के बढ़ने के साथ सतर्क रहना जरूरी है। AQI पर नजर रखने, बाहरी गतिविधियों में बदलाव करने और लक्षणों को गंभीरता से लेने से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। सिरदर्द या आंखों में दर्द जैसी परेशानी लगातार बनी रहे, तो उसका सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।