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रेल मंत्रालय ने ट्रेनों के देरी से चलने संबंधी सोशल मीडिया के आंकड़ों को भ्रामक बताया है। मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में रेलवे की समयपालन क्षमता 77.43 प्रतिशत रही।
भारतीय रेलवे की ट्रेनों के समय पर चलने को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे आंकड़ों पर रेल मंत्रालय ने सफाई दी है। मंत्रालय ने बुधवार को इन आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में रेलवे की समयपालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की बढ़ती मांग और ट्रेनों के संचालन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद रेलवे ने समय पर ट्रेनें चलाने, यात्री सुरक्षा बढ़ाने और सुविधाओं में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। मंत्रालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ आंकड़ों को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है, जिससे रेलवे के प्रदर्शन को लेकर गलत धारणा बन रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ट्रेनों की समयपालन क्षमता का आकलन करते समय सामान्य परिचालन अवधि और कोविड-19 महामारी के दौरान की परिस्थितियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। महामारी के समय कम संख्या में ट्रेनें चलने के कारण समयपालन के आंकड़े सामान्य अवधि की तुलना में अधिक रहे थे। इसलिए उस अवधि के आंकड़ों को सामान्य परिचालन वाले वर्षों से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं है।
2018-19 में 69.2 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 77.43 प्रतिशत हुई समयपालन क्षमता
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे की समयपालन क्षमता में पिछले वर्षों के दौरान सुधार दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में ट्रेनों की समयपालन क्षमता 69.2 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 77.43 प्रतिशत हो गई। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक यह आंकड़ा 77.11 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि रेलवे 77 प्रतिशत से अधिक समयपालन क्षमता बनाए रखने में सफल रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में ट्रेनों की समयपालन क्षमता 73.62 प्रतिशत थी। इसके मुकाबले पिछले तीन वर्षों में 77 प्रतिशत से अधिक का स्तर रेलवे के प्रदर्शन में सुधार को दर्शाता है। मंत्रालय का तर्क है कि केवल चुनिंदा वर्षों के आंकड़ों को देखकर रेलवे की कार्यक्षमता पर सवाल उठाना सही तस्वीर पेश नहीं करता।
कोविड-19 के दौरान के आंकड़ों की सामान्य वर्षों से तुलना उचित नहीं
रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित आंकड़ों को भ्रामक बताने के पीछे कोविड-19 महामारी की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। अधिकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान महामारी के कारण भारतीय रेलवे सामान्य क्षमता के अनुसार ट्रेनों का संचालन नहीं कर रहा था। उस समय कम ट्रेनें चलने के कारण परिचालन संबंधी दबाव भी सामान्य वर्षों से अलग था। ऐसी परिस्थितियों में ट्रेनों के समय पर चलने का प्रतिशत अधिक दर्ज होना स्वाभाविक था। मंत्रालय ने कहा कि महामारी के दौरान दर्ज किए गए असाधारण रूप से ऊंचे आंकड़ों को सामान्य परिचालन अवधि के लिए मानक नहीं माना जाना चाहिए। जब रेलवे का परिचालन दोबारा सामान्य हुआ, तब समयपालन क्षमता दीर्घकालिक औसत के करीब लौटी और उसके बाद इसमें धीरे-धीरे सुधार हुआ। अधिकारियों का कहना है कि समयपालन का आकलन करते समय परिचालन की परिस्थितियों, ट्रेनों की संख्या और यात्रियों की मांग को ध्यान में रखना जरूरी है।
निगरानी और समय-सारणी में बदलाव से मिला फायदा
रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेनों की समयपालन क्षमता में सुधार के लिए कई स्तरों पर काम किया गया है। इसमें परिचालन की बेहतर निगरानी, समय-सारणी का तार्किक पुनर्गठन, नियमित रखरखाव और रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है। समय-सारणी में सुधार का उद्देश्य ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना और विभिन्न मार्गों पर परिचालन संबंधी बाधाओं को कम करना है। इसके अलावा, पटरियों, सिग्नलिंग व्यवस्था और अन्य संबंधित बुनियादी ढांचे के रखरखाव तथा उन्नयन से भी ट्रेनों के परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। मंत्रालय का कहना है कि इन उपायों के माध्यम से यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच रेलवे सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग मार्गों पर परिचालन की परिस्थितियां भिन्न हो सकती हैं, इसलिए समयपालन का प्रदर्शन भी मार्ग और अवधि के अनुसार बदल सकता है।
यात्री सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार पर भी जोर
रेल मंत्रालय ने समयपालन के साथ-साथ यात्री सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया है। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे लगातार निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने, रखरखाव में सुधार करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। रेलवे नेटवर्क पर यात्रियों की बड़ी संख्या और ट्रेनों के व्यापक संचालन को देखते हुए समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। मंत्रालय का कहना है कि बेहतर योजना और परिचालन प्रबंधन के जरिए इस चुनौती से निपटने का प्रयास किया जा रहा है। समयपालन में सुधार यात्रियों की यात्रा योजना को अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ रेलवे सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।
सोशल मीडिया के आंकड़ों पर रेल मंत्रालय की सफाई
रेल मंत्रालय ने दोहराया कि सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे आंकड़ों को पूरी परिचालन पृष्ठभूमि के साथ समझना चाहिए। मंत्रालय के मुताबिक, कोविड-19 के दौरान कम ट्रेनों के संचालन और सामान्य वर्षों में व्यापक रेलवे परिचालन के बीच सीधी तुलना करने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। वित्त वर्ष 2018-19 के 69.2 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2025-26 के 77.43 प्रतिशत तक पहुंचा समयपालन आंकड़ा और वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक दर्ज 77.11 प्रतिशत का स्तर मंत्रालय के दावे के समर्थन में पेश किया गया है। फिलहाल, रेलवे का जोर समयपालन में सुधार को बनाए रखने, यात्री सुरक्षा को मजबूत करने और बढ़ती मांग के अनुरूप सेवाओं को बेहतर बनाने पर है।