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ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे व्लादिमीर पुतिन की डाइट और फूड प्रोटोकॉल चर्चा में है। जानें विदेश दौरे पर उनके खाने की सुरक्षा और पसंद से जुड़ी खास बातें।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में किया जा रहा है। राजधानी दिल्ली में विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए बड़े होटलों में खास तैयारियां की गई हैं और मेहमान नेताओं के लिए तरह-तरह के व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन के खाने का इंतजाम आम विदेशी मेहमानों से काफी अलग रहता है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस के राष्ट्रपति विदेश यात्राओं के दौरान मेजबान देश या होटल की रसोई पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहते, बल्कि उनके साथ रूस से उनकी अपनी टीम भी यात्रा करती है।
दिल्ली में ITC Maurya में ठहरने की रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 73 वर्षीय रूसी राष्ट्रपति दिल्ली दौरे के दौरान ITC Maurya में ठहरे हैं। जहां एक ओर होटल में उनके स्वागत और सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारियां की जाती हैं, वहीं रिपोर्टों के मुताबिक उनके भोजन की व्यवस्था के लिए अलग प्रोटोकॉल अपनाया जाता है। इसका मतलब यह है कि पांच सितारा होटल में ठहरने के बावजूद उनके खाने की तैयारी सामान्य होटल किचन व्यवस्था से काफी हद तक अलग हो सकती है।
विदेश दौरे पर साथ जाती है अपनी टीम
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन के साथ रूस से शेफ और अन्य सपोर्ट स्टाफ की टीम भी यात्रा करती है। उनके लिए भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच की जाती है और खाना तैयार करने के लिए सुरक्षित तथा नियंत्रित रसोई व्यवस्था की जाती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ मोबाइल फूड-टेस्टिंग उपकरण भी होते हैं। इस तरह भोजन की तैयारी से लेकर उसे परोसे जाने तक कई स्तरों पर सावधानी बरती जाती है।
यह व्यवस्था केवल स्वाद या पसंद से जुड़ी हुई नहीं मानी जाती, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बताई जाती है। किसी विदेशी नेता के लिए भोजन और पेय पदार्थों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनके खाने की सामग्री, उसे तैयार करने की प्रक्रिया और परोसने से पहले की जांच को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की खबरें सामने आती रही हैं।
खाने को लेकर भी सुरक्षा का खास इंतजाम
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी कई तरह की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। उनके आसपास व्यक्तिगत सुरक्षाकर्मियों के अलावा अन्य सुरक्षा कर्मचारी, सुरक्षा घेरा और जरूरत के अनुसार ऊंची जगहों पर तैनात स्नाइपर भी मौजूद रहते हैं। इसी तरह रिपोर्टों के मुताबिक उनकी सुरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा भोजन और पेय पदार्थों की जांच से भी जुड़ा है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पुतिन के लिए आधिकारिक फूड टेस्टर की व्यवस्था भी होती है। खाने के साथ-साथ पेय पदार्थों को भी परोसे जाने से पहले जांचे जाने की बात कही गई है। हालांकि, ऐसे सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होती और अलग-अलग रिपोर्टों में इसके विवरण अलग हो सकते हैं।
पुतिन की रोजमर्रा की डाइट कैसी है?
सुरक्षा प्रोटोकॉल जितना सख्त बताया जाता है, पुतिन की रोजमर्रा की डाइट उतनी ही साधारण और प्रोटीन आधारित बताई जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक उनके नाश्ते में रूस का पारंपरिक कॉटेज चीज जैसा खाद्य पदार्थ ‘त्वोरोग’ शामिल हो सकता है। इसे शहद के साथ या दलिया के साथ परोसे जाने की बात कही जाती है। इसके अलावा ताजा फलों के रस भी उनकी डाइट का हिस्सा बताए जाते हैं।
कभी-कभी नाश्ते में ऑमलेट या कच्चे बटेर के अंडे भी शामिल होने की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है। इससे पता चलता है कि उनकी डाइट में प्रोटीन और अपेक्षाकृत हल्के खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की रोजाना की डाइट समय, स्वास्थ्य और यात्रा कार्यक्रम के अनुसार बदल सकती है।
मछली और सीमित मांस को दी जाती है प्राथमिकता
रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन की डाइट में ताजी और स्मोक्ड मछली भी अक्सर शामिल रहती है। इसके अलावा कभी-कभार मेमने का मांस भी भोजन का हिस्सा हो सकता है। दूसरी ओर, बहुत अधिक मसालेदार और भारी व्यंजनों से आमतौर पर दूरी बनाए रखने की बात कही जाती है।
दिल्ली जैसे शहर में जहां भारतीय व्यंजनों की लंबी सूची विदेशी मेहमानों को परोसी जा सकती है, वहीं पुतिन की कथित भोजन व्यवस्था काफी अलग नजर आती है। भारत दौरे के दौरान भी यदि उनके लिए वही सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाया जाता है, तो होटल की सामान्य रसोई और उनके निजी भोजन प्रबंध के बीच अंतर बना रह सकता है।
सुरक्षा के साथ खानपान पर भी पूरा नियंत्रण
व्लादिमीर पुतिन की विदेश यात्राओं से जुड़ी भोजन व्यवस्था यह दिखाती है कि किसी राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा केवल उनके आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मियों तक सीमित नहीं रहती। भोजन और पेय पदार्थों की जांच, सामग्री की निगरानी, अलग रसोई व्यवस्था और विशेषज्ञ स्टाफ जैसे इंतजाम भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हो सकते हैं। दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जहां दुनिया की नजरें बड़े राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर हैं, वहीं पुतिन के खानपान से जुड़ा यह अलग प्रोटोकॉल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।