Table of Contents
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर लगे प्रतिबंध को लेकर AAP ने केंद्र को घेरा। कहा- पंजाब का दर्द दबाया नहीं जा सकता।
इतिहास को सेंसर नहीं कर सकती सरकार: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर बैन के बाद भड़की आम आदमी पार्टी
पंजाब के काले दौर की अनसुनी दास्तां और पंजाबियों के गहरे जख्मों को बयां करती अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व नाम: पंजाब ’95) को OTT प्लेटफॉर्म से अचानक हटाए जाने के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर सेंसरशिप को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र की मौजूदा सत्ता पंजाब के सच, वहां के इतिहास और पंजाबियों की उस अनसुनी चीख को दबाना चाहती है, जिससे तत्कालीन सरकारों ने हमेशा मुंह मोड़े रखा।
“कांग्रेस ने जुल्म किया, बादलों ने इनाम दिया और आज बीजेपी सच से डर गई”
आम आदमी पार्टी ने पंजाब के राजनीतिक इतिहास की परतें खोलते हुए पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब के उस काले और दर्दनाक दौर में कांग्रेस सरकार ने बेगुनाह युवाओं पर दमन चक्र चलाया था। इसके बाद आई अकाली दल (बादल) की सरकार ने उन अत्याचारियों और दमनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बड़े पदों और पदोन्नतियों (Promotions) से नवाजा।
AAP का सीधा सवाल: “जिस सच को पंजाब के लोगों ने अपनी छाती पर झेला है, आज जब उसे पर्दे के जरिए दुनिया के सामने लाने की कोशिश की गई, तो केंद्र सरकार डर क्यों गई? कांग्रेस और अकाली दल के बाद अब बीजेपी भी उसी रास्ते पर चल रही है। फिल्म ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध लगाना इस बात का सबूत है कि केंद्र सरकार पंजाब की ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार करने से घबरा रही है।”
जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को दबाने की कोशिश
ਦੇਸ਼ ਦੀ ਹਕੂਮਤ ਕਿੰਨਾ ਚਿਰ ਦਬਾ ਸਕੇਗੀ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦਾ ਅਣਸੁਣਿਆ ਦੁੱਖ?
ਕਾਂਗਰਸ ਦੀ ਸੂਬਾ ਨੇ ਜ਼ੁਲਮ ਢਾਹੇ, ਬਾਦਲਾਂ ਨੇ ਉਹਨਾਂ ਜ਼ਾਲਮਾਂ ਨੂੰ ਤਰੱਕੀਆਂ ਤੇ ਅਹੁਦੇ ਦਿੱਤੇ ਤੇ ਅੱਜ ਭਾਜਪਾ ਨੂੰ ਉਸ ਕਾਲ਼ੇ ਦੌਰ ‘ਤੇ ਬਣੀ ਫ਼ਿਲਮ ਤੋਂ ਵੀ ਡਰ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ਼ ਧ੍ਰੋਹ ਕਮਾਉਣ ਵਾਲ਼ੇ ਫ਼ਿਲਮਾਂ ‘ਤੇ ਰੋਕ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਨੇ ਪਰ ਉਸ… pic.twitter.com/kii3vOKXkJ
— AAP Punjab (@AAPPunjab) July 6, 2026
यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Rights Activist) शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब के भीतर कथित तौर पर गायब किए गए और लावारिस बताकर जबरन क्रिमेट (Cremated) किए गए हजारों युवाओं के सच को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया था। साल 1995 में खुद जसवंत सिंह खालड़ा संदेहास्पद परिस्थितियों में गायब हो गए थे, जिसके बाद सीबीआई जांच और देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने दोषी पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
आम आदमी पार्टी के सांसदों और नेताओं ने सवाल उठाया है कि जिस सच पर देश की सबसे बड़ी अदालत भी अपनी मुहर लगा चुकी है, उसे सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा 127 कट्स के नाम पर क्यों रोका गया? जब फिल्म निर्माताओं ने बिना किसी कट के इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया, तो महज 48 घंटों के भीतर सरकार के दबाव में इसे क्यों हटवा दिया गया?
“पंजाबियों के दिलों से उस दर्दनाक जख्म को कैसे मिटाओगे?”
‘आप’ नेताओं ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार फिल्मों और वृत्तचित्रों (Documentaries) पर प्रतिबंध तो लगा सकती है, लेकिन वे उन करोड़ों पंजाबियों के सामूहिक मानस और यादों को कैसे मिटाएंगे जिन्होंने अपने सगे-संबंधियों को खोया है? युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और सच को जानने का पूरा हक है।
पार्टी ने मांग की है कि अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटना बंद किया जाए और फिल्म ‘सतलुज’ को तुरंत बहाल किया जाए ताकि देश और दुनिया जान सके कि पंजाब ने देश की एकता के लिए और अपने अधिकारों के लिए कितना बड़ा बलिदान दिया है। जब तक पंजाब के लोगों को उनके हक का सच और इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक इतिहास को दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होता रहेगा।