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AAP नेता प्रवीण ने BJP विधायक अनिल शर्मा पर इमारत के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने MCD से जमीन रिकॉर्ड की जांच और कार्रवाई की मांग की।
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। AAP नेता प्रवीण ने BJP विधायक अनिल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक द्वारा जिस जमीन और इमारत से जुड़े दस्तावेज दिखाए गए थे, उनकी वास्तविकता जमीन के रिकॉर्ड से सामने आ गई है। प्रवीण के मुताबिक, जमीन के रिकॉर्ड में सामने आया है कि संबंधित इमारत स्वीकृत भूमि से अधिक क्षेत्र में बनाई गई है और इसे विधायक के परिवार के सदस्य चला रहे हैं।
प्रवीण ने शुक्रवार को MCD के DC कार्यालय पहुंचकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के सामने जमीन और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर अपनी बात रखने पहुंचे हैं। AAP नेता ने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि इमारत का निर्माण स्वीकृत भूमि की सीमा से अधिक क्षेत्र में हुआ है।
‘कल कैमरे के सामने दिखाई गई थी रजिस्ट्री’
आज हम MCD के DC ऑफिस में आए तो भाजपा विधायक अनिल शर्मा जो कल कैमरे के सामने रजिस्ट्री के कागज़ लहरा रहे थे उनके झूठ का पर्दाफाश हो गया।
Land records से ये साफ हो गया कि वो बिल्डिंग approved जमीन से अधिक एरिया में बनी है और विधायक के अपने परिवार वाले ही इसको चला रहे हैं।
हमारा… pic.twitter.com/DRyBd2z4XN
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) September 10, 2026
AAP नेता प्रवीण ने BJP विधायक अनिल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि विधायक ने एक दिन पहले कैमरे के सामने रजिस्ट्री के कागज दिखाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी। प्रवीण का दावा है कि जब MCD के DC कार्यालय में संबंधित भूमि रिकॉर्ड की जांच की गई तो तस्वीर अलग नजर आई।
उन्होंने कहा कि केवल रजिस्ट्री के कागज दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण किस क्षेत्र में हुआ है और उसके लिए कितनी भूमि स्वीकृत थी, इसकी भी जांच जरूरी है। AAP नेता ने इसी आधार पर पूरे मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की मांग की है।
परिवार के सदस्यों पर भी लगाया आरोप
प्रवीण ने आरोप लगाया कि विवादित इमारत का संचालन BJP विधायक अनिल शर्मा के परिवार के सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप AAP नेता की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित पक्ष का जवाब या स्वतंत्र सत्यापन इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
AAP नेता ने मांग की कि पूरे मामले में जमीन के रिकॉर्ड, निर्माण की स्वीकृति और वास्तविक निर्माण क्षेत्र की जांच की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण नियमों का उल्लंघन कर किया गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
रेखा गुप्ता से कार्रवाई की मांग
प्रवीण ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित इमारत के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
AAP नेता ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि निर्माण नियमों के उल्लंघन के मामलों में राजनीतिक प्रभाव या पद के आधार पर कोई अलग रवैया न अपनाया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की और कहा कि अगर किसी अधिकारी ने नियमों की अनदेखी की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
MCD से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
AAP नेता प्रवीण के आरोपों का केंद्र MCD से जुड़ा निर्माण और भूमि रिकॉर्ड है। उनका कहना है कि संबंधित दस्तावेजों की जांच करके यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जमीन का कितना हिस्सा स्वीकृत था और इमारत का निर्माण कितने क्षेत्र में किया गया। यदि स्वीकृत सीमा से अधिक निर्माण पाया जाता है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मामला केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठता है कि अगर निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित विभाग के अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
आरोपों के बीच BJP विधायक का पक्ष महत्वपूर्ण
इस मामले में AAP नेता प्रवीण की ओर से लगाए गए आरोपों के साथ BJP विधायक अनिल शर्मा का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध बयान में विधायक की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में जमीन रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शे, निर्माण की अनुमति और संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दिल्ली में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक विवाद का विषय रहे हैं। ऐसे में इस मामले में आगे MCD की जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि रिकॉर्ड की जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।