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AAP नेता अनुराग ढांढा ने राघव चड्ढा के वोटर आईडी आवेदन को लेकर BJP पर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड का हवाला देकर पंजाब सरकार पर लगाए आरोपों पर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सांसद राघव चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राघव चड्ढा पर निशाना साधा है। अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने दिल्ली में नया वोटर आईडी बनवाने के लिए आवेदन किया और इसके कुछ दिनों बाद पंजाब सरकार पर उनका वोट रद्द करने का आरोप लगाया। AAP नेता ने इसे पंजाब सरकार को बदनाम करने की कोशिश बताया है।
अनुराग ढांडा के मुताबिक, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के अनुसार राघव चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोटर आईडी के लिए Form 6 दाखिल किया था। उनके दावे के अनुसार, इसके बाद 2 सितंबर को उनका वोटर रजिस्ट्रेशन मंजूर कर मतदाता सूची में जोड़ दिया गया। AAP नेता ने इसी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के बाद में दिए गए बयान पर सवाल उठाए हैं।
’26 अगस्त को दिल्ली में वोट के लिए आवेदन, 3 सितंबर को पंजाब पर आरोप’
Raghav Chadha और BJP का पंजाब से नफ़रत और पंजाब को बदनाम करने का झूठ बेनकाब!
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक 26 अगस्त को Raghav Chadha ने दिल्ली में वोट बनवाने के लिए Form 6 दाखिल किया, और 2 सितंबर को उनका वोट अप्रूव होकर जुड़ गया।
लेकिन 3 सितंबर को Raghav Chadha छाती… pic.twitter.com/IynITkMMzg
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) September 10, 2026
अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर राघव चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया और 2 सितंबर को उनका आवेदन स्वीकृत हो गया, तो 3 सितंबर को पंजाब सरकार पर वोट रद्द करने का आरोप लगाने का क्या आधार था। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में नए वोट के लिए आवेदन करने और इसके बाद पंजाब सरकार पर आरोप लगाने की घटनाओं के बीच संबंध को जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।
AAP नेता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के जरिए पंजाब सरकार और पंजाब को बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सामने आने के बाद इस मामले को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
AAP ने BJP पर भी साधा निशाना
अनुराग ढांडा ने अपने बयान में BJP को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और राघव चड्ढा पंजाब के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ये आरोप AAP नेता की ओर से लगाए गए हैं और इस खबर में BJP या राघव चड्ढा की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
AAP नेता ने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर घटनाक्रम को देखने पर पूरा मामला अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने दावा किया कि जिस समय पंजाब सरकार पर वोट रद्द करने का आरोप लगाया गया, उससे पहले ही दिल्ली में वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी और कथित तौर पर आवेदन मंजूर भी हो गया था।
वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर क्या है पूरा मामला?
वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन से जुड़ा है। अनुराग ढांडा ने इसी फॉर्म के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के वोट को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, 26 अगस्त को दिल्ली में Form 6 दाखिल किया गया और 2 सितंबर को रजिस्ट्रेशन को मंजूरी मिली।
इसके ठीक बाद 3 सितंबर को पंजाब सरकार पर वोट रद्द करने का आरोप लगाए जाने को AAP ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। पार्टी का कहना है कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि वोट को लेकर वास्तविक प्रक्रिया क्या थी और किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई।
‘पंजाब को बदनाम करने की कोशिश’
अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के जरिए पंजाब की सरकार और राज्य को बदनाम करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि AAP इस मुद्दे को जनता के सामने इसलिए उठा रही है ताकि वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े तथ्यों और राजनीतिक बयानों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
AAP नेता ने अपने बयान में राघव चड्ढा और BJP पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सामने आने के बाद उनके मुताबिक पूरा मामला जनता के सामने उजागर हो गया है।
आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब पर रहेगी नजर
वोटर रजिस्ट्रेशन और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में इस मामले में भी Form 6 आवेदन, उसके सत्यापन, मंजूरी और मतदाता सूची में नाम शामिल होने से संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए राघव चड्ढा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, इस पूरे मामले पर राघव चड्ढा और BJP की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा पंजाब और दिल्ली की राजनीति के बीच भी एक नया विवाद पैदा कर सकता है।