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2005 में हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने सौरव गांगुली के साथ ऐसा अप्रैल फूल प्रैंक किया कि वह घबरा गए और पाकिस्तान के खिलाफ मैच से एक दिन पहले कप्तानी छोड़ने तक की बात कह दी।
भारतीय क्रिकेट में सौरव गांगुली का नाम ऐसे कप्तानों में लिया जाता है, जिन्होंने मैदान पर अपनी बेबाकी, आत्मविश्वास और आक्रामक रवैये से अलग पहचान बनाई। विरोधी टीम के सामने दबाव बनाने से लेकर मुश्किल परिस्थितियों में खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने तक, गांगुली को हमेशा मजबूत इरादों वाले कप्तान के रूप में देखा गया। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया जब भारतीय टीम के दो साथी खिलाड़ियों ने उनके साथ ऐसा मजाक किया कि वह बुरी तरह घबरा गए थे। यह घटना वर्ष 2005 की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच हाई-वोल्टेज वनडे मुकाबला होने वाला था। मैच से ठीक एक दिन पहले हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने मिलकर गांगुली के साथ अप्रैल फूल का ऐसा मजाक किया, जिसने कुछ समय के लिए भारतीय कप्तान को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि शायद उन्होंने टीम के खिलाड़ियों के बारे में बेहद विवादित बयान दे दिया है। दिलचस्प बात यह रही कि मजाक इतना असरदार था कि गांगुली ने कप्तानी छोड़ने तक की बात कह दी।
अप्रैल फूल के लिए बनाई गई पूरी योजना
इस मजाक की योजना हरभजन सिंह और युवराज सिंह ने मिलकर बनाई थी। उस समय भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले की तैयारी कर रही थी और दोनों खिलाड़ियों ने सोचा कि इतने महत्वपूर्ण मैच से पहले ड्रेसिंग रूम के माहौल को थोड़ा हल्का किया जाए। इसके लिए उन्होंने गांगुली को निशाना बनाने का फैसला किया। दोनों ने कुछ फर्जी अखबारों की कतरनें तैयार कीं, जिनमें ऐसे बयान लिखे गए थे, मानो गांगुली ने अपने ही टीम के खिलाड़ियों के बारे में बेहद तीखी और विवादित टिप्पणियां की हों। योजना का मकसद यही था कि गांगुली कुछ देर के लिए उन खबरों को सच मान लें और उनकी प्रतिक्रिया देखी जा सके। टीम के कई सदस्य इस पूरे नाटक का हिस्सा बने और गांगुली को इसकी भनक तक नहीं लगी।
युवराज ने शुरू किया पूरा ड्रामा
हरभजन सिंह ने इस घटना को याद करते हुए बताया कि पूरी टीम उस समय एक साथ बैठी हुई थी और उन्होंने गांगुली को अप्रैल फूल बनाने का फैसला किया था। इसके बाद युवराज सिंह ने सबसे पहले गांगुली के पास जाकर गंभीर अंदाज में सवाल किया कि उन्होंने प्रेस में ऐसा बयान क्यों दिया है। युवराज ने गांगुली से कहा कि उन्होंने कथित तौर पर टीम के कई खिलाड़ियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि गांगुली को लगने लगा कि मामला बेहद गंभीर है। फर्जी खबरों में युवराज को पार्टी करने वाला बताया गया था, जबकि हरभजन सिंह के बारे में भी कहा गया था कि उन्हें किसी की परवाह नहीं रहती। इसी तरह आशीष नेहरा और जहीर खान को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां गढ़ी गई थीं, जिन्हें पढ़कर कोई भी कप्तान परेशान हो सकता था।
गांगुली को लगा कि बयान बन सकते हैं विवाद का कारण
सौरव गांगुली के लिए स्थिति इसलिए भी गंभीर लग रही थी क्योंकि अगले ही दिन भारत को पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला खेलना था। भारत-पाकिस्तान मैच का दबाव हमेशा अलग स्तर का होता है और उस समय टीम के कप्तान पर मैदान के प्रदर्शन के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम को एकजुट रखने की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में अगर कप्तान ने अपने ही खिलाड़ियों के खिलाफ बयान दिया हो, तो टीम के भीतर तनाव पैदा होना स्वाभाविक था। गांगुली ने कथित बयानों को लेकर चिंता जताई और उन्हें लगा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है या फिर उन्होंने अनजाने में ऐसी बात कह दी है, जो अब विवाद का रूप ले सकती है। मजाक का असर इतना ज्यादा हुआ कि उन्होंने कप्तानी छोड़ने की बात तक कह दी।
हरभजन और युवराज ने आखिरकार खोला राज
जब गांगुली की घबराहट बढ़ने लगी, तब हरभजन सिंह और युवराज सिंह को महसूस हुआ कि मजाक अपनी सीमा तक पहुंच चुका है। इसके बाद उन्होंने सच्चाई बताई कि यह सब अप्रैल फूल की योजना का हिस्सा था। गांगुली को जब पता चला कि उनके साथ मजाक किया गया है, तो ड्रेसिंग रूम का माहौल हंसी-मजाक में बदल गया। टीम के खिलाड़ियों के लिए यह घटना लंबे समय तक यादगार रही। खास तौर पर इसलिए क्योंकि गांगुली जैसे मजबूत व्यक्तित्व वाले कप्तान को इस तरह कुछ समय के लिए परेशान करने में उनके साथी सफल रहे थे।
टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम की अलग तस्वीर
यह किस्सा भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम के उस माहौल की भी झलक देता है, जहां खिलाड़ी मैदान पर बेहद गंभीर रहने के बावजूद एक-दूसरे के साथ मस्ती और मजाक करते थे। गांगुली, हरभजन और युवराज के बीच मैदान पर मजबूत तालमेल था और यही दोस्ताना रिश्ता इस मजाक के पीछे भी दिखाई देता है। पाकिस्तान के खिलाफ बड़े मुकाबले से पहले टीम पर दबाव जरूर था, लेकिन खिलाड़ियों ने कुछ समय के लिए उस तनाव को मजाक में बदल दिया। हालांकि गांगुली के लिए यह मजाक कुछ ज्यादा ही वास्तविक बन गया था।
गांगुली के व्यक्तित्व का दिलचस्प पहलू
सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट का ऐसा कप्तान माना जाता है, जिसने टीम में लड़ने का जज्बा और आत्मविश्वास पैदा किया। वह मैदान पर कभी पीछे हटने वाले कप्तान नहीं रहे और कई मौकों पर उन्होंने विरोधी टीमों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाया। लेकिन हरभजन और युवराज का यह किस्सा दिखाता है कि मैदान के बाहर गांगुली भी अपने साथियों के मजाक का शिकार हो सकते थे। कप्तानी छोड़ने तक की उनकी प्रतिक्रिया यह बताती है कि अप्रैल फूल का वह प्रैंक कितना प्रभावी था। वर्षों बाद जब हरभजन सिंह ने इस घटना को याद किया, तो यह भारतीय क्रिकेट के उन मजेदार किस्सों में शामिल हो गया, जो ड्रेसिंग रूम की दोस्ती, टीम भावना और खिलाड़ियों के बीच मौजूद अपनापन दिखाते हैं।