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विक्रम राठौर ने यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि घरेलू खिलाड़ियों को मंच देने से ETPL लंबे समय तक सफल और टिकाऊ लीग बन सकती है।
यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ETPL) ने अंतरराष्ट्रीय फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपना स्थान बनाया है। डबलिन गार्डियंस के मुख्य कोच और भारत के पूर्व बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर का मानना है कि यूरोप की नई टी20 लीग के पास लंबे समय तक टिके रहने की अच्छी संभावनाएं हैं, हालांकि दुनिया में पहले से कई बड़ी टी20 लीग हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय स्थानीय खिलाड़ियों में इसकी सबसे बड़ी शक्ति छिपी है।
गुरुवार, 10 सितंबर को मीडिया से बातचीत करते हुए विक्रम राठौर ने ETPL पर अपने विचार व्यक्त किए। उनका कहना था कि किसी भी फ्रेंचाइजी लीग को सफल बनाने में घरेलू खिलाड़ियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उनका कहना है कि जिन लीगों में ज्यादातर बाहरी खिलाड़ी खेलते हैं, उनमें लंबे समय तक टिके रहना अधिक मुश्किल हो सकता है।
घरेलू खिलाड़ियों को सबसे बड़ा मंच मिलेगा
विक्रम राठौर ने कहा कि वे हमेशा से मानते रहे हैं कि घरेलू खिलाड़ी लीग की सफलता को बढ़ाते हैं। ETPL की एक विशेषता यह है कि यह यूरोप के विभिन्न क्रिकेटिंग देशों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने की कोशिश करता है।
राठौर कहते हैं कि यूरोप में क्रिकेट भारत की तरह लोकप्रिय नहीं है, लेकिन क्रिकेट से जुड़े लोगों में इसे लेकर काफी उत्साह है। स्थानीय खिलाड़ियों को नई लीग में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों में इस स्तर पर खेलने की इच्छा दिखाई देती है और कुछ हासिल करना चाहते हैं। यह उत्साह इंगित करता है कि यूरोप में क्रिकेट का विकास संभव है।
आईपीएल से सीधा मुकाबला नहीं होगा
इंडियन प्रीमियर लीग, दुनिया की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग, यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग से मुकाबला करना कठिन नहीं है। ETPL का उद्देश्य विविध दर्शकों और बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाना है।
Rathor ने कहा कि दुनिया भर में कई टी20 लीग पहले से चल रही हैं। दक्षिण अफ्रीका की SA20, ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग (BBL), इंग्लैंड की द हंड्रेड और यूएई की ILT20 जैसी प्रतियोगिताएं अपने-अपने मानक बना चुकी हैं। ETPL को ऐसे माहौल में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए घरेलू प्रतिभा और स्थानीय क्रिकेट का विकास करना होगा।
विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भरता का एक महत्वपूर्ण मुद्दा
राठौर ने विश्वव्यापी फ्रेंचाइजी क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लीग लगभग पूरी तरह से विदेशी खिलाड़ियों के योगदान पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि इस तरह की लीगों में लंबे समय तक टिके रहना मुश्किल हो सकता है।
इसके विपरीत, यूरोप की नई लीग स्थानीय खिलाड़ियों को लगातार अवसर देती है और उनका विकास करती है, तो प्रतियोगिता की नींव मजबूत हो सकती है। घरेलू क्रिकेटरों के प्रदर्शन से लीग को स्थानीय पहचान मिलने के साथ-साथ दर्शकों का जुड़ाव बढ़ सकता है।
राठौर यूरोपीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं
2019 से 2024 तक, भारत के पूर्व बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का कोचिंग सेटअप का हिस्सा रहे हैं। यूरोप में क्रिकेट के बारे में उन्होंने कहा कि हालांकि भारत की तुलना में यूरोप में क्रिकेट की लोकप्रियता कम है, लेकिन लोगों में इस खेल के प्रति उत्साह काफी वास्तविक और सकारात्मक है।
उनका कहना था कि स्थानीय खिलाड़ी इस लीग के माध्यम से दुनिया को अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते हैं। साथ ही, वे सीखने के लिए उत्सुक हैं और अपने खेल में सुधार करना चाहते हैं। राठौर का कहना है कि अगर ETPL आने वाले वर्षों में अपनी पहचान बनाए रखती है, तो इससे यूरोपीय क्रिकेट को बहुत फायदा मिल सकता है।
ETPL IPL तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है
ETPL का एक बड़ा लक्ष्य स्थानीय खिलाड़ियों को एक मंच प्रदान करना है, जहां वे अपने प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय फ्रेंचाइजी लीगों में जगह बनाने की कोशिश कर सकें। साथ ही राठौर ने इस उद्देश्य की महत्ता बताई।
लीग का उद्देश्य स्थानीय खिलाड़ियों को सुधारना और यूरोप में क्रिकेट को बढ़ावा देना था। यदि ये खिलाड़ी दुनिया भर की टी20 लीगों में खेलने में सफल होते हैं, तो यह यूरोपीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। ETPL को और भी बड़ी सफलता मिलेगी अगर इनमें से कुछ खिलाड़ी भविष्य में IPL जैसी प्रतिष्ठित लीग में भी जगह बना लेंगे।
कुल मिलाकर, यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग को अपनी जगह बनाने की बड़ी चुनौती है, लेकिन घरेलू खिलाड़ियों को प्रमुखता देने की रणनीति इसे दूसरी लीगों से अलग कर सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ETPL यूरोप में क्रिकेट की लोकप्रियता और खिलाड़ियों के विकास को किस हद तक बढ़ा सकती है।