मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुधन नस्ल सुधार के लिए लिक्विड नाइट्रोजन के दो साल के रेट कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी है।
हरियाणा में डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुधन की नस्ल में गुणात्मक सुधार लाने के लिए राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में आयोजित हाई-लेवल परचेज कमेटी (HLPC) की बैठक में पशुधन के आनुवंशिक सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
बैठक में अगले दो वर्षों के लिए लिक्विड नाइट्रोजन (Liquid Nitrogen) के रेट कॉन्ट्रैक्ट को आधिकारिक स्वीकृति दी गई है।
कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को मिलेगी गति
हरियाणा में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुधन की नस्ल सुधार को नई गति मिलेगी।
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री @SinghRana6940 की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय खरीद समिति की बैठक में पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए अगले दो वर्षों हेतु तरल नाइट्रोजन के दर अनुबंध को मंजूरी दी गई। इससे उच्च… pic.twitter.com/F334pvye0h
— DPR Haryana (@DiprHaryana) July 21, 2026
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के इस फैसले से राज्य भर में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) कार्यक्रमों को नई रफ्तार मिलेगी।
- सीमन स्ट्रॉ का सुरक्षित संरक्षण: लिक्विड नाइट्रोजन की निर्बाध उपलब्धता से उच्च गुणवत्ता वाले फ्रोजन सीमन (Frozen Semen) को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
- बेहतर आनुवंशिक नस्ल: इस कदम से पशुपालकों के पशुओं की आने वाली पीढ़ियों की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे दूध उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
- पशुपालकों की आय में वृद्धि: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विजन के अनुसार, पशुपालन को अधिक लाभदायक और आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक अहम पड़ाव है।
“पशुपालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार”
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों को तकनीकी और आधारभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। लिक्विड नाइट्रोजन की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होने से राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित पशु अस्पतालों और कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों तक उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं पहुंचेंगी।
हरियाणा सरकार के इस फैसले से न केवल दुग्ध उत्पादन में राज्य की अग्रणी स्थिति और मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।