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15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर डैरिल कलिनन ने जताई चिंता। कहा- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चकाचौंध से दूर स्कूल और बचपन का आनंद लें वैभव।
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों वैभव सूर्यवंशी नाम का एक ऐसा सितारा उभरा है, जिसने अपनी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। 15 साल की उम्र में जिस तरह की परिपक्वता और तकनीक वैभव ने दिखाई है, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों को भी अपना कायल बना लिया है। लेकिन इसी बीच, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर डैरिल कलिनन ने एक ऐसी राय रखी है जिसने क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है। कलिनन का मानना है कि वैभव को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चकाचौंध में झोंकने से पहले अपने बचपन का आनंद लेना चाहिए और फिलहाल स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
सोशल मीडिया और व्यावसायिक दबाव का अनूठा संगम
डैरिल कलिनन ने ‘क्रिकइंफो’ के अपने कॉलम में वैभव सूर्यवंशी के बारे में जो लिखा है, वह आज के खेल जगत की एक कड़वी सच्चाई को बयां करता है। उनका कहना है कि वैभव सिर्फ एक प्रतिभाशाली लड़का नहीं है, बल्कि वह एक ऐसे खेल माहौल के केंद्र में है जो बेहद व्यावसायिक और वैश्विक स्तर पर दिखाई देने वाला है। कलिनन के अनुसार, भारतीय क्रिकेट और आईपीएल का माहौल जिस तरह से किसी भी खिलाड़ी को ‘ग्लोबल सेलिब्रिटी’ बना देता है, वह एक 15 साल के बच्चे के लिए बेहद भारी पड़ सकता है।
कलिनन ने बड़ी स्पष्टता से कहा कि क्रिकेट ने पहले भी कई ‘प्रॉडिजी’ (प्रतिभाशाली खिलाड़ी) देखे हैं, लेकिन आज के दौर में ‘मासूमियत, असाधारण प्रतिभा और सोशल मीडिया’ का जो मिश्रण है, वह पहले कभी नहीं था। आज के समय में एक बच्चे और करोड़ों लोगों की राय के बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई है। वैभव जिस उम्र में है, उस उम्र में उसे एक सामान्य जीवन जीने का हक है, लेकिन आज उसका हर कदम मीडिया और उन लोगों की नजरों में है, जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
इतिहास से सबक लेने की जरूरत
कलिनन ने उन उदाहरणों का हवाला दिया है जहाँ बचपन में मिली अपार सफलता ने खिलाड़ियों के करियर को समय से पहले ही ढलान की ओर धकेल दिया। क्रिकेट इतिहास गवाह है कि कम उम्र में मिली शोहरत और अपेक्षाओं का बोझ कई बार खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक विकास प्रक्रिया को बाधित कर देता है। कलिनन का मानना है कि वैभव की प्रतिभा को निखारने की जरूरत है, उसे दबाने की नहीं, लेकिन यह सब एक योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। यदि उसके करियर को सही तरीके से ‘मैनेज’ नहीं किया गया, तो उसका हश्र भी उन खिलाड़ियों जैसा हो सकता है जो चमकने से पहले ही बुझ गए।
‘स्कूल और गली क्रिकेट’ का महत्व
पूर्व अफ्रीकी क्रिकेटर ने बहुत ही मार्मिक बात कही है—”मेरे विचार में उसे घर पर अपनी परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए, अपने दोस्तों के साथ गली क्रिकेट खेलना चाहिए और एक आम लड़का बनकर रहना चाहिए, जब तक उसके पास ऐसा करने का मौका है।” यह सलाह किसी भी तरह से वैभव की प्रतिभा को कम आंकना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि खिलाड़ी की प्रतिभा तभी पूरी तरह से निखर सकती है, जब उस प्रतिभा को ढोने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से विकसित हो। एक ‘पूर्ण इंसान’ के रूप में विकास होना, खेल की बारीकियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
क्या भारतीय क्रिकेट को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है?
वैभव सूर्यवंशी का मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमें कम उम्र के खिलाड़ियों को लेकर अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है? आईपीएल के बढ़ते प्रभाव के बीच, प्रतिभा की खोज एक ऐसा जुनून बन गई है जहाँ हम अक्सर खिलाड़ी के ‘बचपन’ को नजरअंदाज कर देते हैं। कलिनन का यह बयान एक चेतावनी की तरह है। यदि वैभव को एक लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करनी है, तो उसे उस ‘प्रेशर कुकर’ जैसे माहौल से दूर रखना अनिवार्य है, जहाँ प्रदर्शन का दबाव उसकी मासूमियत को छीन ले।