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हरियाणा सरकार 14 मई 2026 को 13 बाढ़ प्रभावित जिलों में राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित करेगी। मानसून से पहले आपदा प्रबंधन और संचार प्रणालियों को मजबूत करने के लिए डॉ. सुमिता मिश्रा ने दिए निर्देश।
मानसून से पहले आपदा प्रबंधन तंत्र की होगी अग्निपरीक्षा
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर प्रदेश में बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। आपदा प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकार ने आगामी 14 मई, 2026 को राज्य के 13 बाढ़ संभावित जिलों में एक व्यापक ‘राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास’ (State Level Mock Exercise) आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
तीन चरणों में पूरी होगी तैयारी की प्रक्रिया
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह मॉक ड्रिल तीन महत्वपूर्ण चरणों में संपन्न होगी। तैयारी की शुरुआत 6 मई को एक ‘ओरिएंटेशन और समन्वय सम्मेलन’ के साथ होगी, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 12 मई को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ होगी, जिसमें विभिन्न काल्पनिक परिस्थितियों पर चर्चा कर रणनीति का परीक्षण किया जाएगा। अंततः 14 मई को जमीन पर वास्तविक ड्रिल (Physical Drill) की जाएगी, जिसमें सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां सक्रिय रूप से भाग लेंगी।
इन 13 जिलों पर रहेगा मुख्य फोकस
भौगोलिक संवेदनशीलता और नदियों व नहरों की निकटता के आधार पर 13 जिलों की पहचान की गई है। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, फतेहाबाद, सिरसा, सोनीपत, पानीपत, पलवल, पंचकूला और यमुनानगर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, गुरुग्राम जैसे शहरों में भारी बारिश के दौरान होने वाले जलभराव (Waterlogging) की समस्या को देखते हुए विशेष रिस्पांस प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
संवाद और समन्वय में सुधार है मुख्य उद्देश्य
डॉ. सुमिता मिश्रा ने ड्रिल के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “यह अभ्यास जिला स्तर के आपातकालीन सहायता कार्यों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और आपदा स्थितियों के दौरान संचार प्रणालियों में सुधार लाएगा।” उन्होंने आगे बताया कि इसका प्राथमिक उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) की समीक्षा करना और ‘इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम’ (IRS) के तहत हितधारकों की भूमिकाओं को स्पष्ट करना है। इस ड्रिल के माध्यम से संसाधनों और लॉजिस्टिक्स की कमियों की पहचान कर मानसून से पहले उन्हें दुरुस्त किया जाएगा।