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इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर कप्तान शुभमन गिल ने बड़ा खुलासा किया है। जानें क्यों सिर्फ अक्षर पटेल के साथ उतरी थी टीम इंडिया।
इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के अंतिम मैच में 27 रनों की करारी हार के बाद भारतीय टीम की रणनीति पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। विशेष रूप से लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए इस फाइनल मैच में स्टार रिस्ट-स्पिनर कुलदीप यादव को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के निर्णय ने क्रिकेट विश्लेषकों और क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया। मैच के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान शुभमन गिल ने कुलदीप यादव को टीम में नहीं लेने और केवल पांच गेंदबाजों (अक्षर पटेल एकमात्र स्पिनर) के साथ मैदान पर उतरने की असली वजह बताई है।
शुभमन गिल ने कहा, “पिच देखकर फैसला लिया था, लेकिन बाद में विकेट धीमी हो गई।”
पूरे यूके दौरे पर चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारत ने निर्णायक मुकाबले में भी चार तेज गेंदबाजों को अटैकिंग विकल्प के बजाय प्राथमिकता दी। कप्तान शुभमन गिल ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, “शुरुआत में हमें लगा कि पिच से स्पिनरों को बहुत ज्यादा मदद नहीं मिलेगी।” तेज गेंदबाज हमेशा दबाव बनाना चाहते हैं और विकेट लेने के अवसरों की तलाश करते हैं।”
किंतु गिल ने स्वीकार किया कि मैच चलते हुए पिच का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। “शायद अगर अब हम पीछे मुड़कर देखें (In hindsight), तो पिच को देखकर लगता है कि यह थोड़ी धीमी हो गई थी,” उन्होंने कहा। जब हम गेंदबाजी कर रहे थे, अक्षर भाई ने स्पैल डाला, तो ऐसा नहीं लग रहा था कि विकेट इतना स्लो हो जाएगा। लेकिन जब इंग्लैंड की टीम गेंदबाजी करने लगी, तो स्पष्ट रूप से विकेट धीमा होता चला गया।टीम इंडिया को पिच की बदलती स्थिति को समझने में हुई भूल का खामियाजा अंततः भुगतना पड़ा।
बुमराह की गैरमौजूदगी में अनुभवहीन पेस अटैक ने भारी नुकसान उठाया
भारतीय टीम को इस महत्वपूर्ण मैच में घुटने की चोट के कारण अपने दिग्गज तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की कमी सबसे अधिक खली। बुमराह की कमी से भारत का तेज गेंदबाजी आक्रमण अनुभवहीन नजर आया। टीम में अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा के साथ दो नए खिलाड़ियों, गुरनूर ब्रार और प्रिंस यादव, आए। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इस चारों तेज गेंदबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का बहुत कम अनुभव था। भारतीय पेसर्स ने इंग्लैंड की शीर्ष टीम को एक बार भी परेशान नहीं कर सका, इसलिए टीम इंडिया ने मध्य ओवरों में रक्षात्मक खेल खेलना पड़ा।
हार की इबारत डकेट और बेथेल की 192 रनों की साझेदारी ने तय की, लेकिन इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की कमी का खामियाजा उठाया। पहले विकेट के लिए बेन डकेट (142 रन) और युवा जैकब बेथेल (91 रन) ने रिकॉर्ड 192 रनों की आक्रामक साझेदारी की। इन दोनों ने पावरप्ले के बाद मध्य ओवर्स में तेजी से चलते रहे। कप्तान शुभमन गिल ने भी स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि युवा गेंदबाजों में बड़े मंच पर गेंदबाजी आक्रमण में अनुभव की कमी थी और वे दबाव के क्षणों में अपनी लाइन-लेंथ बनाए रखने में असफल रहे।
टीम इंडिया को सिर्फ पांच बॉलिंग ऑप्शंस के साथ उतरना महंगा पड़ा।
भारत का रणनीतिक दांव भी उल्टा पड़ गया क्योंकि टीम केवल पांच महत्वपूर्ण गेंदबाजी विकल्पों के साथ उतरी थी। भारत में अकेले स्पिनर अक्षर पटेल (10 ओवर में 61 रन) था। कुलदीप यादव जैसा एक फ्रंटलाइन स्पिनर टीम में होता तो शायद इंग्लैंड की रन गति को मिडिल ओवर्स में कम किया जा सकता था जब विकेट धीमी हो रही थी। इंग्लैंड ने अंतिम ओवरों में जोस बटलर की मदद से 388 रनों का बड़ा स्कोर बनाया, जो अंत में भारत की 27 रनों की हार का मुख्य कारण बना, क्योंकि उन्होंने छठे गेंदबाजी विकल्प की कमी और पार्ट-टाइम गेंदबाजों पर भरोसा नहीं किया।