रोजाना वॉक और एक्सरसाइज सिर्फ शरीर को फिट नहीं रखते, बल्कि दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य को भी सपोर्ट कर सकते हैं। जानें तनाव, डिप्रेशन, नींद और याददाश्त पर असर।
वॉक और एक्सरसाइज को आमतौर पर फिटनेस, वजन नियंत्रित रखने और शरीर को मजबूत बनाने से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन शारीरिक गतिविधि का फायदा केवल शरीर तक सीमित नहीं है। नियमित रूप से एक्टिव रहने का असर मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों को कम करने, सोचने-सीखने की क्षमता और ओवरऑल वेल-बीइंग को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
इसी वजह से रोजाना की दिनचर्या में वॉक, साइकिलिंग, योग, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य एक्सरसाइज शामिल करना केवल शरीर को फिट रखने के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग को एक्टिव रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
डिप्रेशन के जोखिम को कम करने में मदद
शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य के बीच मजबूत संबंध देखा गया है। WHO के मुताबिक नियमित फिजिकल एक्टिविटी डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती है।
जब व्यक्ति लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो उसका मूड, नींद और रोजमर्रा की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, नियमित गतिविधि मूड को बेहतर करने, तनाव कम करने और व्यक्ति को मानसिक रूप से अधिक सक्रिय महसूस कराने में मदद कर सकती है। हालांकि, डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है और केवल एक्सरसाइज को इसका इलाज नहीं माना जाना चाहिए। जिन लोगों में लगातार उदासी, निराशा या अन्य गंभीर लक्षण बने रहते हैं, उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता को मिल सकता है सपोर्ट
एक्सरसाइज का संबंध कॉग्निटिव हेल्थ यानी सोचने, ध्यान लगाने, याद रखने और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं से भी है। अमेरिकी फिजिकल एक्टिविटी गाइडलाइंस के अनुसार शारीरिक गतिविधि के कुछ प्रभाव एक एक्सरसाइज सेशन के बाद ही दिखाई दे सकते हैं, जैसे कुछ समय के लिए एंग्जायटी में कमी और कॉग्निटिव फंक्शन के कुछ पहलुओं में सुधार। नियमित गतिविधि लंबे समय में एग्जीक्यूटिव फंक्शन, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि एक्सरसाइज करने से याददाश्त तुरंत कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि नियमित एक्टिव लाइफस्टाइल दिमाग के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकती है।
तनाव और बेचैनी कम करने में उपयोगी
आज की व्यस्त जीवनशैली में काम, पढ़ाई, परिवार और लगातार स्क्रीन इस्तेमाल के कारण तनाव और मानसिक थकान आम समस्या बन गई है। ऐसे में वॉक जैसी सरल गतिविधि भी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। WHO के अनुसार शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य और वेल-बीइंग को बेहतर बनाने के साथ एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है।
खास तौर पर खुली जगह में थोड़ी देर तेज कदमों से चलना शरीर को एक्टिव रखने के साथ मानसिक रूप से ब्रेक लेने का अवसर भी देता है। हालांकि, हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है और तनाव या एंग्जायटी लगातार बनी रहने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
नींद को बेहतर बनाने में भी मदद
अच्छी नींद का सीधा संबंध मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से है। नियमित शारीरिक गतिविधि नींद की गुणवत्ता और कुछ लोगों में नींद से जुड़े पैटर्न को बेहतर बनाने में योगदान कर सकती है। WHO के अनुसार नियमित फिजिकल एक्टिविटी से नींद और ओवरऑल वेल-बीइंग में सुधार देखा गया है।
जब नींद बेहतर होती है, तो अगले दिन व्यक्ति ज्यादा तरोताजा महसूस कर सकता है और ध्यान लगाने में भी आसानी हो सकती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति की दिनचर्या बहुत ज्यादा बैठकर काम करने वाली है, तो बीच-बीच में चलना और नियमित एक्सरसाइज करना उपयोगी आदत हो सकती है।
कितनी एक्सरसाइज करनी चाहिए?
WHO के अनुसार 18 से 64 वर्ष के वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट की अधिक तीव्रता वाली गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। दोनों का उपयुक्त संयोजन भी किया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि शुरुआत करने वाला व्यक्ति पहले दिन से ही लंबी और कठिन एक्सरसाइज करे। अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत करना बेहतर है। उदाहरण के तौर पर रोजाना कुछ समय तेज वॉक से शुरुआत करके धीरे-धीरे अवधि बढ़ाई जा सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की बजाय दिन में छोटे-छोटे अंतराल पर चलना भी एक्टिविटी बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है।
कौन-सी गतिविधियां हो सकती हैं फायदेमंद?
फिटनेस के लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम ही जाए। तेज वॉक, साइकिल चलाना, तैराकी, डांस, खेलकूद और घर के कुछ काम भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकते हैं। WHO के अनुसार शारीरिक गतिविधि में केवल एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि चलना, साइकिलिंग और रोजमर्रा के काम भी शामिल होते हैं।
इसलिए जिस गतिविधि को व्यक्ति लंबे समय तक आसानी से और नियमित रूप से कर सके, उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। शुरुआत में बहुत कठिन लक्ष्य रखने के बजाय निरंतरता पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
दिमाग को हेल्दी रखने की आसान आदत
कुल मिलाकर वॉक और एक्सरसाइज केवल शरीर की फिटनेस के लिए नहीं, बल्कि दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि मूड, नींद, कॉग्निटिव हेल्थ और सामान्य मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। WHO भी शारीरिक गतिविधि को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
इसलिए रोजाना की व्यस्त दिनचर्या में कुछ समय शरीर को एक्टिव रखने के लिए निकालना एक छोटी लेकिन प्रभावी हेल्दी आदत हो सकती है। हालांकि, एक्सरसाइज को किसी मानसिक बीमारी की दवा या उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए। अगर डिप्रेशन, एंग्जायटी या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण लगातार बने रहें या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।