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22 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत हुई। सेंसेक्स 610 अंक से ज्यादा गिरा और निफ्टी 22,600 के नीचे आ गया। जानें ऑटो, मेटल और मिडकैप शेयरों में गिरावट की वजह।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। बाजार में चौतरफा बिकवाली के दबाव के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। ऑटो, मेटल, एफएमसीजी और व्यापक बाजार के शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 610 अंक से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:21 बजे सेंसेक्स 610.30 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,099.39 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 229.55 अंक यानी 1.01 प्रतिशत गिरकर 22,581.80 पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती जैसे कारकों ने भी निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा दबाव
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में व्यापक बाजार के सूचकांकों में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट 1.59 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि निफ्टी नेक्स्ट 50 में 1.58 प्रतिशत की गिरावट रही। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 100 में 1.58 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.47 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बिकवाली का असर बड़ी कंपनियों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी व्यापक रूप से पड़ा। बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया विक्स भी 5.26 प्रतिशत बढ़कर 16.50 पर पहुंच गया। इंडिया विक्स में तेजी का मतलब है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर जोखिम वाले शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाने लगते हैं। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में पहले से ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।
केमिकल, मेटल और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
सेक्टरवार कारोबार पर नजर डालें तो लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक लाल निशान में रहे। निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स में सबसे अधिक 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.94 प्रतिशत टूट गया, जबकि निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 1.89 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी सीमेंट इंडेक्स भी 1.86 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.55-1.55 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.51 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। बैंकिंग क्षेत्र में भी दबाव दिखाई दिया। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.90 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.35 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। दूसरी ओर, आईटी शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.42 प्रतिशत की गिरावट आई, जो बाजार के कई अन्य क्षेत्रीय सूचकांकों की तुलना में कम थी। हालांकि, आईटी क्षेत्र भी पूरी तरह तेजी के दायरे में नहीं रहा।
सेंसेक्स के इन शेयरों में दिखी तेजी और गिरावट
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में इटरनल शुरुआती कारोबार का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। इसमें 0.87 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक 0.14 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि आईसीआईसीआई बैंक में 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई। टेक महिंद्रा और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर लगभग स्थिर कारोबार करते रहे। इसके विपरीत, पावर ग्रिड के शेयरों में 2.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो सेंसेक्स के प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहा। मारुति सुजुकी 2.26 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.03 प्रतिशत की कमजोरी रही। टाटा स्टील के शेयरों में भी 1.97 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयर भी दबाव में रहे। ऑटो और मेटल शेयरों में गिरावट का व्यापक बाजार पर असर देखने को मिला। हालांकि, शुरुआती कारोबार के ये आंकड़े हैं और दिन के दौरान शेयरों की चाल में बदलाव संभव है।
बाजार की गिरावट पर क्या बोले विशेषज्ञ?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, हाल के दिनों में बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के शेयरों ने मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में व्यापक बाजार की मजबूती के पीछे कंपनियों की कमाई से ज्यादा तरलता की भूमिका रही है। सितंबर के एएमएफआई आंकड़ों में भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के प्रति बढ़ती निवेशक रुचि का संकेत मिला है। उनके मुताबिक, इसके कारण एक ऐसी स्थिति बनी है, जिसमें मिडकैप और खासकर स्मॉलकैप शेयरों के मूल्यांकन ऊंचे हैं, जबकि कई बड़ी कंपनियों के शेयर तुलनात्मक रूप से आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं। विजयकुमार का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती और बाजार में इसका सुधार देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती जैसे बाहरी दबाव बाजार में मंदी की आशंकाओं को बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से उन दिनों भी बाजार में गिरावट आ सकती है, जब विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई और घरेलू संस्थागत निवेशक यानी डीआईआई खरीदारी कर रहे हों।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञ के मुताबिक, मौजूदा बाजार परिस्थितियों में उचित मूल्यांकन वाले लार्जकैप शेयरों की ओर निवेश का रुख करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। हालांकि, निवेशकों को किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कमाई की संभावनाओं और अपने जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना चाहिए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना जरूरी है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बीच निवेशकों को वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। गुरुवार की शुरुआती गिरावट ने संकेत दिया कि बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल है। हालांकि, दिन के अंत में बाजार किस स्तर पर बंद होगा, यह आगे होने वाली खरीदारी-बिकवाली और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा।