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सरकार ने 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक लगाई है। इस फैसले के बाद चीनी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। केंद्र सरकार के एक नए फैसले के बाद निवेशकों ने चीनी क्षेत्र की कई कंपनियों के शेयरों में बिकवाली की। सरकार ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से बनाए गए एथेनॉल को खरीद संबंधी निविदाओं से बाहर कर दिया है। इस फैसले से चीनी मिलों और एकीकृत डिस्टिलरी कंपनियों की एथेनॉल से होने वाली संभावित कमाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एथेनॉल उत्पादन चीनी उद्योग के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। ऐसे में इसके लिए कच्चे माल के इस्तेमाल पर लगाई गई नई पाबंदी से कंपनियों की कारोबारी संभावनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव प्रत्येक कंपनी के कच्चे माल, डिस्टिलरी क्षमता और अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा।
चीनी कंपनियों के शेयरों में कितनी गिरावट आई?
सोमवार के कारोबार में श्री रेणुका शुगर्स के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कंपनी का शेयर 5.51 प्रतिशत गिरकर 20.93 रुपये पर आ गया। द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर 5.45 प्रतिशत टूटकर 43.85 रुपये पर पहुंच गए, जबकि बजाज हिंदुस्तान शुगर में 5.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 20.15 रुपये रहा।
अन्य चीनी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स का शेयर 3.63 प्रतिशत गिरकर 135.62 रुपये पर आ गया। वहीं, धामपुर शुगर मिल्स के शेयर में 3.14 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 191.46 रुपये पर कारोबार करता दिखा। मवाना शुगर्स का शेयर 3.08 प्रतिशत टूटकर 163.84 रुपये पर पहुंच गया, जबकि अवध शुगर एंड एनर्जी में 2.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 966 रुपये रहा।
बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर 2.39 प्रतिशत गिरकर 703.90 रुपये पर आ गए। ईआईडी पैरी (इंडिया) में 1.49 प्रतिशत की कमजोरी रही और शेयर 683.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था। एमवीके एग्रो फूड प्रोडक्ट्स के शेयर 3.31 प्रतिशत गिरकर 248 रुपये पर आ गए, जबकि डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज में 3.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 466.05 रुपये रहा।
सरकार के किस फैसले से बढ़ी चिंता?
चीनी कंपनियों के शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की ओर से 16 अक्टूबर को जारी एथेनॉल खरीद निविदा है। यह निविदा सरकारी तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी की गई है। इसके तहत नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, इस निविदा में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। निविदा दस्तावेज के अनुसार, केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के दौरान एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का उपयोग शून्य कर दिया जाए।
इस बदलाव का सीधा असर उन चीनी मिलों और एकीकृत डिस्टिलरी कंपनियों पर पड़ सकता है, जो गन्ने से जुड़े इन कच्चे माल का इस्तेमाल करके एथेनॉल बनाती हैं और सरकारी तेल कंपनियों को इसकी आपूर्ति करती हैं।
चीनी उद्योग की कमाई पर कैसे पड़ सकता है असर?
चीनी उद्योग में एथेनॉल कारोबार को अतिरिक्त राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखा जाता है। चीनी मिलें गन्ने से चीनी बनाने के अलावा उसके विभिन्न उत्पादों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए भी करती हैं। इससे कंपनियों को कारोबार के अलग-अलग स्रोत मिलते हैं और चीनी बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन नई निविदा में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल को बाहर रखने से संबंधित कंपनियों के लिए सरकारी खरीद के अवसर सीमित हो सकते हैं। इससे निवेशकों को आशंका है कि कुछ कंपनियों की एथेनॉल बिक्री और उससे होने वाली आय प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, सभी चीनी कंपनियों पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। जिन कंपनियों के पास अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन की अधिक क्षमता है, वे इस बदलाव के असर को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। इसके विपरीत, जिन कंपनियों का एथेनॉल कारोबार मुख्य रूप से गन्ने से जुड़े कच्चे माल पर निर्भर है, उनके सामने ज्यादा चुनौती आ सकती है।
किन कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी?
नई निविदा में कुछ अन्य स्रोतों से उत्पादित एथेनॉल को खरीद के लिए अनुमति दी गई है। इनमें मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से प्राप्त अधिशेष चावल और सी-हैवी शीरा शामिल हैं।
इसका मतलब है कि एथेनॉल की सरकारी खरीद पूरी तरह बंद नहीं की गई है, बल्कि पात्र कच्चे माल के दायरे में बदलाव किया गया है। अब कंपनियों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे अपनी उत्पादन क्षमता, उपलब्ध कच्चे माल और लागत के आधार पर नए नियमों के अनुरूप कारोबार की रणनीति तैयार करें।
अनाज आधारित एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को इस बदलाव से अपेक्षाकृत फायदा मिल सकता है, लेकिन इसका अंतिम असर उत्पादन लागत, खरीद मूल्य और कंपनी की परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगा।
निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
चीनी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब कंपनियों के आगामी वित्तीय नतीजों, एथेनॉल उत्पादन के मिश्रण और प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने में कितनी सक्षम हैं और नई व्यवस्था के तहत उनकी संभावित बिक्री पर कितना असर पड़ता है।
कुल मिलाकर, एथेनॉल खरीद निविदा में बदलाव ने चीनी क्षेत्र को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, सोमवार की गिरावट को सभी कंपनियों के भविष्य के प्रदर्शन का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता। प्रत्येक कंपनी की वित्तीय स्थिति, उत्पादन क्षमता और कारोबार की संरचना के आधार पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। निवेशकों को किसी भी निर्णय से पहले कंपनी के आधिकारिक खुलासों और वित्तीय आंकड़ों का आकलन करना चाहिए।