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सेबी ने शेयर बाजार के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, ट्रेडिंग टाइमिंग और डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस के नियमों में बदलाव किया है। जानिए नए नियम कब लागू होंगे और निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में कारोबार के अंतिम समय यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए ढांचे के तहत इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का समय, ऑर्डर दर्ज करने की प्रक्रिया और एक्सपायरी वाले स्टॉक तथा इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस की गणना का तरीका बदला जाएगा। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय कीमतों की पारदर्शिता बढ़ाना, सही मूल्य निर्धारण में मदद करना और कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाना है। संशोधित व्यवस्था के अनुसार, इक्विटी कैश सेगमेंट में 10 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन हर कारोबारी दिन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। वहीं, स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव में कारोबार सामान्य तौर पर दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगा। हालांकि, उसी दिन एक्सपायर होने वाले कुछ इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के लिए अलग प्रावधान लागू होंगे। सेबी ने एक्सपायरी वाले डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस की गणना में भी अहम बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार, इसकी गणना संबंधित इंडेक्स या स्टॉक के लगातार कारोबार के अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर की जाएगी। पहले सेटलमेंट प्राइस तय करने में क्लोजिंग ऑक्शन प्राइस पर निर्भरता थी।
क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और क्यों बदले गए नियम?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शेयर बाजार की कारोबारी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान शेयरों के अंतिम भाव तय करने के लिए खरीद और बिक्री के ऑर्डर का मिलान किया जाता है। बाजार बंद होने के समय किसी शेयर की कीमत निवेशकों, म्यूचुअल फंड, संस्थागत निवेशकों और अन्य बाजार प्रतिभागियों के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी कीमत का इस्तेमाल कई वित्तीय गणनाओं और निवेश संबंधी फैसलों में किया जाता है। सेबी ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा, सार्वजनिक परामर्श, सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी (SMAC) की सिफारिशों और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ चर्चा के बाद यह बदलाव किया है। नियामक का उद्देश्य बाजार के अंतिम समय में कीमतों के निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाना और बाजार बंद होने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। नई व्यवस्था में ऑर्डर दर्ज करने के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए गए हैं, ताकि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान कारोबार की प्रक्रिया बेहतर तरीके से संचालित हो सके।
अब दोपहर 3:30 बजे शुरू होगा क्लोजिंग ऑक्शन
संशोधित नियमों के अनुसार, इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोपहर 3:30 बजे शुरू होगा। इसी समय संदर्भ मूल्य यानी रेफरेंस प्राइस की गणना की जाएगी और पात्र ऑर्डर को लगातार चलने वाले कारोबार के सत्र से क्लोजिंग ऑक्शन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद दोपहर 3:31 बजे से 3:36 बजे तक निवेशकों को लिमिट और मार्केट, दोनों प्रकार के ऑर्डर दर्ज करने की अनुमति होगी। लिमिट ऑर्डर में निवेशक किसी शेयर को खरीदने या बेचने के लिए अपनी निर्धारित कीमत तय कर सकता है, जबकि मार्केट ऑर्डर उपलब्ध बाजार भाव पर निष्पादित होता है। दोपहर 3:36 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर दर्ज करने की अनुमति नहीं होगी और केवल लिमिट ऑर्डर ही स्वीकार किए जाएंगे। यह सत्र निर्धारित समय के अनुसार 3:38 बजे से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय समाप्त हो सकता है। इसके बाद इक्विटी कैश सेगमेंट में पोस्ट-क्लोज सेशन दोपहर 3:50 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान शेयरों का कारोबार उनके निर्धारित क्लोजिंग प्राइस पर किया जाएगा।
डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस में बड़ा बदलाव
सेबी के नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एक्सपायर होने वाले स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस को लेकर है। अब संबंधित इंडेक्स या स्टॉक के लगातार कारोबार के अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस यानी VWAP का इस्तेमाल किया जाएगा। VWAP एक ऐसा मूल्य है, जिसकी गणना कारोबार की कीमतों और संबंधित वॉल्यूम को ध्यान में रखकर की जाती है। इससे केवल किसी एक अंतिम भाव के बजाय उस अवधि में हुए कारोबार का भारित औसत सामने आता है। सेबी का मानना है कि इस पद्धति से एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस को अधिक व्यवस्थित तरीके से निर्धारित करने में मदद मिल सकती है। डेरिवेटिव कारोबार में सेटलमेंट प्राइस बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट के अंतिम लाभ और नुकसान की गणना की जाती है। इसलिए कीमत तय करने की प्रक्रिया में बदलाव का असर कारोबारियों की रणनीति और जोखिम प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।
कब से लागू होंगे नए नियम?
सेबी के संशोधित प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और अन्य संबंधित बदलावों से जुड़े अधिकांश प्रावधान 7 दिसंबर 2026 से प्रभावी होंगे। हालांकि, लगातार चलने वाले ट्रेडिंग सेशन से निष्पादित नहीं हुए लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में स्थानांतरित करने से संबंधित नियम 8 फरवरी 2027 से लागू किए जाएंगे। आइसबर्ग ऑर्डर ऐसे ऑर्डर होते हैं, जिनमें बड़ी ऑर्डर मात्रा का केवल एक हिस्सा बाजार में दिखाई देता है, जबकि शेष मात्रा छिपी रहती है। इन ऑर्डर के स्थानांतरण से जुड़े नियमों को अलग तारीख से लागू करने का प्रावधान नई व्यवस्था के चरणबद्ध क्रियान्वयन का हिस्सा है।
निवेशकों और कारोबारियों पर क्या होगा असर?
सेबी के इस फैसले से शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों और खासकर डेरिवेटिव कारोबारियों को नई समय-सारणी और ऑर्डर प्रक्रिया के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करनी होगी। एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में सेटलमेंट प्राइस की गणना के लिए VWAP का इस्तेमाल होने से कारोबारियों को अंतिम 30 मिनट के मूल्य उतार-चढ़ाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है। वहीं, क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान मार्केट और लिमिट ऑर्डर के लिए तय समय का पालन करना जरूरी होगा। निवेशकों को अपने ब्रोकर और संबंधित स्टॉक एक्सचेंज की ओर से जारी निर्देशों पर भी नजर रखनी चाहिए। कुल मिलाकर, सेबी ने बाजार बंद होने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। नए नियमों का वास्तविक प्रभाव इनके लागू होने के बाद बाजार के व्यवहार और कारोबारियों की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा।