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भारतीय शेयर बाजार में आज हल्की तेजी के साथ शुरुआत के संकेत मिले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव और एशियाई बाजारों की गिरावट का सेंसेक्स और निफ्टी पर क्या असर पड़ सकता है, जानें।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ होने के संकेत मिले। शुरुआती संकेतक GIFT निफ्टी सुबह करीब 8:06 बजे 28.5 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,123 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के सकारात्मक शुरुआत करने की उम्मीद बनी। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और एशियाई बाजारों के रुख पर बनी रह सकती है। इन कारकों का असर बाजार की दिशा और विभिन्न क्षेत्रों के शेयरों पर पड़ सकता है।
GIFT निफ्टी से बाजार को मिले सकारात्मक संकेत
सोमवार सुबह GIFT निफ्टी में मामूली तेजी देखने को मिली, जो घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रही थी। हालांकि, शुरुआती संकेतों के आधार पर पूरे कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा का अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक हालात और ऊर्जा बाजार से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के मुताबिक, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है। इन परिस्थितियों में निवेशक बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रख सकते हैं।
बाजार की चाल पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े संकेतों का भी असर पड़ सकता है। ऐसे में शुरुआती तेजी के बावजूद कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा सकती हैं महंगाई की चिंता
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंताओं में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 97 से 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये पर दबाव, महंगाई और अर्थव्यवस्था की लागत पर पड़ सकता है।
तेल महंगा होने से पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ने का जोखिम रहता है। इससे उन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है, जिनके कारोबार में ईंधन की खपत अधिक होती है या जो कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों पर निर्भर हैं। विमानन, परिवहन और कुछ विनिर्माण कंपनियां इस तरह के बदलावों से प्रभावित हो सकती हैं।
दूसरी ओर, तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट से बाजार को राहत मिल सकती है। इसलिए निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार की दिशा पर बनी रहने की संभावना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया भर के बाजारों की नजर
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति भी निवेशकों के लिए अहम बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कहा है कि अमेरिका की ओर से उसकी शर्तें स्वीकार किए जाने पर छह दिनों के भीतर इस जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। इन शर्तों में अमेरिकी नाकेबंदी, प्रतिबंधों और व्यापक स्तर पर संघर्ष समाप्त करने से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, किसी समझौते पर सहमति नहीं बनने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
पोनमुडी आर के अनुसार, यदि कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में प्रगति होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, तनाव बढ़ने या तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहने पर वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का दबाव
सोमवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी दिखाई दी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी कंपनियों की भारी वित्तीय जरूरतों को लेकर चिंताओं ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया। इसके अलावा, आने वाले दिनों में कई कंपनियों के वित्तीय नतीजे सामने आने वाले हैं, जिस कारण बाजार में सतर्कता बढ़ी हुई है।
जापान का निक्केई सूचकांक 1.2 प्रतिशत गिरा। इससे पहले पिछले सप्ताह इसमें 5.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। दक्षिण कोरिया का बाजार 0.4 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि पिछले सप्ताह वहां 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। ताइवान का बाजार भी 1.4 प्रतिशत कमजोर हुआ। वहीं, जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का एमएससीआई सूचकांक 0.6 प्रतिशत फिसल गया।
हालांकि, चीन के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने की खबर ने वैश्विक विकास की संभावनाओं को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए। इसके बावजूद तकनीकी कंपनियों की वित्तीय जरूरतों और वैश्विक अनिश्चितता से निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
निवेशकों के लिए किन संकेतों पर नजर रखना जरूरी?
सोमवार के कारोबार में निवेशकों के लिए कच्चे तेल की कीमतें, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और एशियाई बाजारों की चाल प्रमुख संकेतक रह सकते हैं। इसके साथ ही रुपये की स्थिति और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।
यदि वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो घरेलू शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, तेल महंगा बना रहने और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, GIFT निफ्टी की मामूली तेजी बाजार की सकारात्मक शुरुआत का संकेत देती है, लेकिन वैश्विक जोखिमों के कारण पूरे सत्र में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल शुरुआती संकेतों के आधार पर फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा, वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के प्रदर्शन पर भी ध्यान दें।