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SBI और PNB की 2 साल की FD में निवेश से पहले जानें ब्याज दर, रिटर्न, वरिष्ठ नागरिकों के फायदे और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें।
अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर तय ब्याज हासिल करने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी आज भी भारत में सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों में शामिल है। बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में जहां रिटर्न के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है, वहीं एफडी में निवेश करने वाले ग्राहक पहले से तय ब्याज दर के आधार पर अपने रिटर्न का अनुमान लगा सकते हैं। यही वजह है कि जोखिम से बचने वाले निवेशकों के बीच बैंक एफडी की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी में बड़ी संख्या में ग्राहक एफडी कराते हैं। ऐसे में अगर कोई निवेशक अगले दो साल के लिए अपनी बचत को एफडी में लगाने की योजना बना रहा है, तो उसके लिए दोनों बैंकों की ब्याज दरों, परिपक्वता राशि और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ की तुलना करना जरूरी हो जाता है।
दो साल की एफडी चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?
दो साल की एफडी चुनते समय सिर्फ ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं होता। निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि संबंधित बैंक किस अवधि को दो साल की जमा के लिए मानता है, आम ग्राहकों के लिए ब्याज दर कितनी है और वरिष्ठ नागरिकों को कितनी अतिरिक्त दर मिल रही है। इसके अलावा समय से पहले एफडी तोड़ने पर मिलने वाली राशि, लागू जुर्माना और ब्याज की गणना के तरीके को भी समझना जरूरी है। एफडी में निवेश की गई रकम एक निश्चित अवधि तक बैंक के पास रहती है और अवधि पूरी होने पर ग्राहक को मूलधन के साथ अर्जित ब्याज मिलता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और एफडी की अवधि के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
एसबीआई की एफडी पर मिल सकता है तय ब्याज
भारतीय स्टेट बैंक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में से एक है और इसकी एफडी योजनाएं लंबे समय से सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले ग्राहकों के बीच लोकप्रिय रही हैं। दो साल की एफडी में निवेश करने वाले ग्राहकों को बैंक की लागू ब्याज दर के आधार पर रिटर्न मिलता है। एसबीआई में सामान्य ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर अलग-अलग हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों को आमतौर पर सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज का लाभ मिलता है। इसका मतलब है कि अगर कोई वरिष्ठ नागरिक दो साल के लिए एफडी कराता है, तो उसकी परिपक्वता राशि सामान्य ग्राहक की तुलना में अधिक हो सकती है। हालांकि, एफडी कराने से पहले बैंक की मौजूदा ब्याज दर और संबंधित अवधि की आधिकारिक शर्तों की जांच करना जरूरी है।
पीएनबी की एफडी भी निवेशकों के लिए विकल्प
पंजाब नेशनल बैंक भी देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल है और अलग-अलग अवधि के लिए एफडी योजनाएं उपलब्ध कराता है। दो साल की अवधि के लिए एफडी कराने वाले ग्राहक बैंक की उस समय लागू ब्याज दर के अनुसार रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। पीएनबी भी वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज की सुविधा दे सकता है। इसलिए यदि निवेशक के परिवार में वरिष्ठ नागरिक के नाम पर निवेश किया जा सकता है और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो कुल रिटर्न की गणना अलग तरीके से करनी चाहिए। दोनों बैंकों की तुलना करते समय केवल ब्याज दर में मामूली अंतर के बजाय निवेश की कुल रकम और दो साल बाद मिलने वाली परिपक्वता राशि को देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा।
ज्यादा ब्याज का मतलब कितना ज्यादा रिटर्न?
एफडी में ब्याज दर का छोटा सा अंतर भी बड़ी रकम निवेश करने पर अंतिम रिटर्न में अंतर पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति दो साल के लिए एक लाख रुपये निवेश करता है, तो ब्याज दर में अंतर के आधार पर दोनों बैंकों से मिलने वाली परिपक्वता राशि अलग हो सकती है। इसी तरह पांच लाख या दस लाख रुपये के निवेश पर ब्याज दर का अंतर और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, वास्तविक रिटर्न की गणना बैंक की लागू ब्याज दर, ब्याज के भुगतान के तरीके और चक्रवृद्धि की व्यवस्था के आधार पर होती है। इसलिए केवल विज्ञापित ब्याज दर देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय बैंक द्वारा बताई गई परिपक्वता राशि को देखना बेहतर होता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी में अतिरिक्त फायदा
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक एफडी अक्सर आकर्षक विकल्प रहती है, क्योंकि कई बैंक सामान्य ग्राहकों की तुलना में उन्हें अतिरिक्त ब्याज देते हैं। इससे दो साल की अवधि में कुल ब्याज आय बढ़ सकती है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक नियमित आय के लिए एफडी पर निर्भर है, तो उसे ब्याज भुगतान की आवृत्ति भी ध्यान में रखनी चाहिए। कुछ एफडी योजनाओं में ब्याज मासिक, तिमाही या परिपक्वता पर मिलने का विकल्प हो सकता है। निवेशक को अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना चाहिए। हालांकि, अतिरिक्त ब्याज की सटीक दर बैंक की मौजूदा नीति और संबंधित एफडी योजना पर निर्भर करती है।
टैक्स का भी रखें ध्यान
एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त नहीं होता। ग्राहक की कर स्थिति और लागू आयकर नियमों के अनुसार एफडी से प्राप्त ब्याज पर कर देनदारी बन सकती है। बैंक कुछ परिस्थितियों में ब्याज पर स्रोत पर कर की कटौती भी कर सकता है। इसलिए सिर्फ ब्याज दर देखकर निवेश करना उचित नहीं है। निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि कर कटौती के बाद उसे वास्तविक रूप से कितना रिटर्न मिलेगा। खासकर अधिक रकम की एफडी कराने वाले लोगों के लिए कर प्रभाव को समझना जरूरी है।
एफडी कराने से पहले नियमों की करें जांच
बैंक की ब्याज दरें समय-समय पर बदल सकती हैं। इसलिए एफडी बुक करने के दिन लागू दर ही आपके निवेश के लिए महत्वपूर्ण होती है। साथ ही एफडी की अवधि, समय से पहले निकासी के नियम, ब्याज भुगतान का विकल्प, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त लाभ और कर संबंधी नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि निवेशक को दो साल से पहले पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो पूरी रकम एक ही एफडी में लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि की एफडी बनाना भी एक विकल्प हो सकता है।
SBI और PNB में कौन बेहतर?
एसबीआई और पीएनबी दोनों ही सरकारी बैंक होने के कारण सुरक्षित निवेश की तलाश करने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। लेकिन दो साल की एफडी के लिए बेहतर विकल्प चुनने का फैसला उस समय लागू ब्याज दर और निवेशक की व्यक्तिगत जरूरत पर निर्भर करेगा। अगर किसी बैंक की ब्याज दर अधिक है, तो समान रकम और समान अवधि पर वहां से मिलने वाला रिटर्न भी अधिक हो सकता है। इसलिए एफडी कराने से पहले दोनों बैंकों की ताजा ब्याज दरों और परिपक्वता राशि की तुलना करना सबसे समझदारी भरा कदम है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बैंक की दरें बदल सकती हैं और अलग-अलग ग्राहक श्रेणियों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए अंतिम निवेश निर्णय लेने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या शाखा से वर्तमान दरों की पुष्टि जरूर करें।