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मानसून में वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के लक्षण कई बार एक जैसे होते हैं। जानें तीनों बीमारियों के लक्षण, चेतावनी संकेत और बचाव के जरूरी तरीके।
मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश और मौसम में बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके अलावा बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। परेशानी की बात यह है कि वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं। तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी शिकायतें तीनों ही स्थितियों में हो सकती हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि व्यक्ति वायरल संक्रमण से परेशान है या उसे डेंगू अथवा मलेरिया हुआ है। सही बीमारी की पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण होती है।
वायरल फीवर में दिख सकते हैं ये लक्षण
मानसून के दौरान वायरल संक्रमण काफी सामान्य माना जाता है। वायरल फीवर में शरीर का तापमान बढ़ने के साथ थकान, कमजोरी, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में खराश, नाक बहना और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को ठंड लगने या भूख कम लगने की शिकायत भी हो सकती है। वायरल संक्रमण के लक्षण व्यक्ति की उम्र और संक्रमण के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। आमतौर पर आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार किया जाता है। हालांकि, लगातार तेज बुखार बना रहे या स्थिति बिगड़ती नजर आए तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डेंगू में तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द
डेंगू मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है और बारिश के मौसम में इसके मामले बढ़ सकते हैं। डेंगू में अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में मतली या उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते भी हो सकते हैं। डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स में कमी हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जानी चाहिए। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, जांच रिपोर्ट और अन्य लक्षणों को ध्यान में रखकर उपचार की सलाह देते हैं।
मलेरिया में बुखार के साथ कंपकंपी
मलेरिया भी मच्छर के जरिए फैलने वाली बीमारी है। इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना और कंपकंपी, पसीना आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में मितली और उल्टी जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। मलेरिया के लक्षणों का पैटर्न संक्रमण फैलाने वाले परजीवी के प्रकार और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकता है। इसलिए बुखार आने पर केवल इस आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि यह मलेरिया ही है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही इसकी पुष्टि की जा सकती है।
तीनों बीमारियों में समानता से बढ़ता है भ्रम
वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया में सबसे बड़ी समस्या इनके शुरुआती लक्षणों की समानता है। तीनों में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और शरीर में दर्द हो सकता है। यही वजह है कि घर पर लक्षण देखकर बीमारी की पहचान करने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है। डेंगू और मलेरिया के लिए अलग-अलग जांच उपलब्ध हैं और डॉक्टर जरूरत के अनुसार टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। अगर बुखार लगातार बना हुआ है, बहुत तेज है या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या भ्रम की स्थिति, तेज पेट दर्द, असामान्य रक्तस्राव या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। डेंगू में विशेष रूप से नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी, काला मल, तेज पेट दर्द और लगातार उल्टी जैसे चेतावनी संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में बुखार होने पर विशेष सावधानी जरूरी है।
खुद से दवा लेने से बचें
मानसून में बुखार होने पर कई लोग बिना जांच के दवा लेना शुरू कर देते हैं। यह आदत नुकसानदायक हो सकती है। खासकर डेंगू की संभावना होने पर कुछ दर्द निवारक दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए बुखार में कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर है। एंटीबायोटिक दवाएं भी वायरल संक्रमण में सामान्य तौर पर काम नहीं करतीं और इन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेना चाहिए। बीमारी का कारण पता करने के लिए डॉक्टर आवश्यक जांच कराने के बाद उचित उपचार बता सकते हैं।
बारिश के मौसम में बचाव भी है जरूरी
डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों से बचाव करना बेहद महत्वपूर्ण है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और कूलर, गमले, टायर तथा अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी मददगार हो सकता है। घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना मच्छरों के प्रजनन को रोकने में उपयोगी है। इसके साथ ही बारिश के मौसम में स्वच्छ पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना और पर्याप्त आराम करना भी जरूरी है।
लक्षणों के बजाय जांच पर करें भरोसा
मानसून में बुखार होने पर वायरल फीवर, डेंगू या मलेरिया में अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर उचित जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। समय पर बीमारी की पहचान होने से सही उपचार शुरू किया जा सकता है और संभावित जटिलताओं से बचने में मदद मिलती है। खासकर डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में लापरवाही स्थिति को गंभीर बना सकती है। इसलिए मानसून के दौरान बुखार को सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय अपनी स्थिति पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।