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Gift Nifty में गुरुवार सुबह मामूली गिरावट देखने को मिली। महंगा कच्चा तेल, बढ़ती US Treasury Yield और भू-राजनीतिक तनाव से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है।
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार कमजोर संकेतों से शुरू होने की संभावना है। घरेलू इक्विटी बाजार के लगभग सपाट खुलने के संकेत मिल रहे हैं, इसलिए सुबह के कारोबार में गिफ्ट निफ्टी कुछ गिरावट के साथ चलता नजर आया। बुधवार को Sensex और Nifty लगातार गिरावट से बंद हुए थे। नतीजतन, निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक बाजारों के रुख, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों पर है।
Nifty Gift में एक छोटा सा गिरावट
गुरुवार सुबह 8:11 बजे गिफ्ट निफ्टी 23,487.5 पर कारोबार कर रहा था। इसमें 3 अंक, यानी 0.01 प्रतिशत की छोटी कमी दर्ज की गई। Gift Nifty में इस छोटी सी कमजोरी का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत बड़े उतार-चढ़ाव के बजाय सीमित या फ्लैट दायरे में हो सकती है। हालाँकि, निवेशकों और विश्वव्यापी संकेतों पर बाजार की चाल निर्भर करेगी।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिलहाल भारतीय शेयर बाजार पर सबसे अधिक दबाव डाला है। WTI क्रूड 96 से 97 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड 101.50 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। भारत जैसे कच्चे तेल आयातक देश पर महंगाई और चालू खाते से जुड़े दबाव बढ़ने की आशंका है।
Enrich Money के CEO Ponmudi R ने कहा कि बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है। ऊर्जा की कीमतों में तेजी से बढ़ती वैश्विक महंगाई निवेशकों को ब्याज दरों के भविष्य पर चिंतित कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी
निवेशकों की चिंता भी मध्य पूर्व में जारी तनाव से बढ़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अनिश्चितता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के साथ संघर्ष को तुरंत समाप्त करने का संकेत दिया है, लेकिन अभी तक तनाव कम होने का कोई संकेत नहीं है।
इसके अलावा, सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती लड़ाई ने मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ गए हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, जो वैश्विक शेयर बाजारों पर असर डाल सकता है।
साथ ही एशियाई बाजारों में कमजोरी
भारतीय बाजार के लिए भी वैश्विक संकेत अभी अच्छे नहीं हैं। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एशियाई शेयर बाजार गिर गए। शुरुआती कारोबार में जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का Kospi 1 फीसदी से अधिक नीचे कारोबार कर रहे थे। साथ ही, जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का MSCI इंडेक्स भी करीब 1 फीसदी गिर गया।
इससे पहले यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट आई थी। निवेशक चिंतित हैं कि महंगा तेल वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकता है और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने के लिए अधिक सावधान होने की जरूरत हो सकती है।
10 साल की यूएस रिज़र्व बैंक ब्याज 4.84% के करीब
भारतीय इक्विटी पर दबाव के संकेत भी अमेरिकी बॉन्ड बाजार से मिल रहे हैं। 10 साल की अमेरिकी ऋण दर लगभग 4.84% पर पहुंच गई है। 2023 के बाद यह उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं, जो निवेशकों को जोखिमपूर्ण संपत्ति से दूर कर सकते हैं।
उभरते बाजार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी यील्ड ने भारत जैसे बाजारों में विदेशी निवेशकों के रुख पर खास प्रभाव डाला है। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को ऊंची यील्ड और महंगा कच्चा तेल दोनों प्रभावित कर सकते हैं।
US Inflation Data पर नजर रहेगी
अब बाजार अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर है। गुरुवार को उत्पादक मूल्य वृद्धि (PPI) के आंकड़े जारी होंगे, जबकि शुक्रवार को ग्राहक मूल्य वृद्धि (CPI) के आंकड़े जारी होंगे। इन आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आने वाली मौद्रिक नीति का चित्र कुछ और स्पष्ट हो सकता है।
वर्तमान में बाजार ने फेड की 15–16 सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की लगभग 60% की संभावना मान ली है। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत होते हैं, तो ब्याज दरों पर कठोर रुख की आशंका बढ़ सकती है। कमजोर महंगाई आंकड़े बाजार को राहत दे सकते हैं।
निवेशकों को सावधान रहने का समय
कुल मिलाकर, गुरुवार को वैश्विक संकेत भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। Gift Nifty में मामूली गिरावट से बाजार की सपाट शुरुआत के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन महंगा कच्चा तेल, मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में, निवेशकों का ध्यान प्रमुख इंडेक्स, तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगा।