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RBI ने OMO के तहत 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचीं। नीलामी में 84,982 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं। जानें लिक्विडिटी प्रबंधन का पूरा अपडेट।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने की प्रक्रिया पूरी की। इस नीलामी का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी को नियंत्रित करना है। आरबीआई की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है और फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट समेत विभिन्न माध्यमों से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बैंकिंग प्रणाली में आई है। सोमवार की नीलामी में आरबीआई को 25,000 करोड़ रुपये की निर्धारित राशि के मुकाबले कुल 84,982 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं। केंद्रीय बैंक ने पूरी निर्धारित राशि यानी 25,000 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कर लीं।
84,982 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं
आरबीआई की ओर से जारी विस्तृत OMO नीलामी परिणाम के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के लिए 25,000 करोड़ रुपये की राशि अधिसूचित की थी। इसके मुकाबले प्रतिभागियों की ओर से कुल 84,982 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गईं। यानी नीलामी में निर्धारित राशि से तीन गुना से भी अधिक की मांग देखने को मिली। आरबीआई ने इसमें से पूरी 25,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकार की। इससे पता चलता है कि बाजार प्रतिभागियों ने आरबीआई की ओर से पेश की गई सरकारी प्रतिभूतियों में पर्याप्त रुचि दिखाई।
1 लाख करोड़ रुपये के OMO कार्यक्रम का हिस्सा
सोमवार की यह नीलामी आरबीआई के 1 लाख करोड़ रुपये के OMO बिक्री कार्यक्रम का हिस्सा है। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा और आगामी लिक्विडिटी परिस्थितियों की समीक्षा के बाद 11 सितंबर को इस कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत भारत सरकार की प्रतिभूतियों की कुल 1,00,000 करोड़ रुपये की बिक्री करने का निर्णय लिया गया था। कार्यक्रम को तीन चरणों में पूरा किया जा रहा है।
पहले चरण में 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये, दूसरे चरण में 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये और तीसरे चरण में 28 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री निर्धारित की गई है। सोमवार की 25,000 करोड़ रुपये की नीलामी के बाद आरबीआई अब तक इस कार्यक्रम के तहत कुल 75,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां बेच चुका है। अंतिम 25,000 करोड़ रुपये की बिक्री 28 सितंबर को प्रस्तावित है।
OMO बिक्री से क्या होता है?
ओपन मार्केट ऑपरेशन के तहत जब आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियां बेचता है तो बैंक और अन्य बाजार प्रतिभागी इन प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए केंद्रीय बैंक को पैसा देते हैं। इसके परिणामस्वरूप बैंकिंग प्रणाली से रुपये की नकदी बाहर निकलती है और तरलता कम होती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी की स्थिति को संतुलित रखने के लिए करता है।
अगर बैंकिंग प्रणाली में जरूरत से ज्यादा नकदी मौजूद हो तो उसे नियंत्रित करने के लिए OMO बिक्री जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। मौजूदा स्थिति में आरबीआई का यह कदम विदेशी मुद्रा प्रवाह के कारण बढ़ी अतिरिक्त तरलता के प्रबंधन से जुड़ा है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह के बीच उठाया गया कदम
आरबीआई की ओर से किए जा रहे लिक्विडिटी प्रबंधन अभियान का संबंध केंद्रीय बैंक की विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत आए विदेशी मुद्रा प्रवाह से भी है। सोमवार को जारी आरबीआई के अलग-अलग आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर तक इस सुविधा के तहत कुल प्रवाह 143.596 अरब डॉलर रहा।
इसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) डिपॉजिट का रहा, जिसके तहत 132.98 अरब डॉलर का प्रवाह दर्ज किया गया। इसके अलावा ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स यानी OFCB से 5.32 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स यानी ECB से 5.296 अरब डॉलर का योगदान रहा।
जून 2026 में शुरू हुई थी विशेष स्वैप सुविधा
आरबीआई ने बताया कि उसने 8 जून 2026 को विशेष USD-INR Forex Swap सुविधा शुरू की थी। यह सुविधा FCNR(B) डिपॉजिट, ECB और OFCB के माध्यम से आने वाले विदेशी मुद्रा प्रवाह को कवर करती है। FCNR(B) डिपॉजिट के तहत राशि जुटाने की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चली थी। वहीं ECB और OFCB से जुड़े प्रवाह के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
विदेशी मुद्रा के इस प्रवाह का बैंकिंग प्रणाली की रुपये वाली तरलता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आरबीआई की ओर से OMO बिक्री जैसे कदमों के जरिए सिस्टम में उपलब्ध नकदी का प्रबंधन किया जा रहा है।
पांच सरकारी प्रतिभूतियों में स्वीकार की गई बोलियां
सोमवार की OMO नीलामी में आरबीआई ने पेश की गई छह सरकारी प्रतिभूतियों में से पांच प्रतिभूतियों के लिए बोलियां स्वीकार कीं। इनमें सबसे बड़ी राशि दो प्रतिभूतियों के लिए स्वीकार की गई। आरबीआई ने 6.10 प्रतिशत GS 2031 के लिए 11,512 करोड़ रुपये और 7.95 प्रतिशत GS 2032 के लिए 8,758 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार कीं।
वहीं 8.28 प्रतिशत GS 2027 के लिए आरबीआई ने कोई बोली स्वीकार नहीं की। इस प्रतिभूति के लिए कुल 20 बोलियां आई थीं, जिनकी राशि 3,082 करोड़ रुपये थी, लेकिन स्वीकृत राशि शून्य रही।
आगे भी जारी रहेगा लिक्विडिटी प्रबंधन
सोमवार की नीलामी के बाद आरबीआई के 1 लाख करोड़ रुपये के OMO बिक्री कार्यक्रम का अंतिम चरण 28 सितंबर को प्रस्तावित है। इस चरण में 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की जाएगी। इस तरह केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा प्रवाह और बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपने लिक्विडिटी प्रबंधन उपायों को आगे बढ़ा रहा है।