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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर 1990 में संशोधन किया है। जानें अनुच्छेद 356, दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर से जुड़े नए प्रावधान।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर, 1990 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत कुछ विशेष संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान लागू होने की स्थिति में संबंधित राज्यों के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल को अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council) की बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह संशोधन किया है। इंटर-स्टेट काउंसिल (अमेंडमेंट) ऑर्डर, 2026 अधिसूचना प्रकाशित होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
क्या है इंटर-स्टेट काउंसिल?
इंटर-स्टेट काउंसिल का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 263 में किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय तथा आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है। इंटर-स्टेट काउंसिल की स्थापना वर्ष 1990 में जारी इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर के माध्यम से की गई थी। मूल आदेश 28 मई 1990 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद जुलाई 1990 और दिसंबर 1996 में भी इसमें संशोधन किए गए थे।
2026 के संशोधन में क्या बदला?
2026 के संशोधन के तहत इंटर-स्टेट काउंसिल ऑर्डर, 1990 के क्लॉज 2 में मौजूद प्रावधान को बदल दिया गया है। नए प्रावधान में उन परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है, जिनमें संबंधित राज्य के राज्यपाल या केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल को परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह व्यवस्था सामान्य परिस्थितियों के बजाय कुछ विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान लागू होने की स्थिति से जुड़ी है।
नए आदेश में कुल चार परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है। इनमें एक राज्य से संबंधित संवैधानिक प्रावधान और तीन केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इन परिस्थितियों में संबंधित राज्यपाल या उपराज्यपाल को परिषद की बैठक में आमंत्रित किया जाएगा।
अनुच्छेद 356 लागू होने पर राज्यपाल होंगे शामिल
पहली स्थिति किसी राज्य में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी उद्घोषणा से संबंधित है। यदि किसी राज्य के संबंध में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा लागू है, तो उस राज्य के राज्यपाल को इंटर-स्टेट काउंसिल की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
अनुच्छेद 356 की व्यवस्था उस स्थिति से संबंधित है जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र के अनुसार सरकार चलाना संभव नहीं होने की स्थिति में राष्ट्रपति की ओर से विशेष संवैधानिक कार्रवाई की जाती है। संशोधित आदेश में ऐसी स्थिति में संबंधित राज्यपाल की परिषद की बैठक में भागीदारी का प्रावधान किया गया है।
दिल्ली के लिए अनुच्छेद 239AB का प्रावधान
दूसरी स्थिति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित है। यदि राष्ट्रपति की ओर से संविधान के अनुच्छेद 239AB के तहत जारी आदेश लागू है, तो दिल्ली के उपराज्यपाल को इंटर-स्टेट काउंसिल की बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा।
अनुच्छेद 239AB राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा विशेष प्रावधान है। संशोधित आदेश में इस विशेष स्थिति को इंटर-स्टेट काउंसिल की बैठक में उपराज्यपाल की भागीदारी से जोड़ा गया है।
पुडुचेरी के उपराज्यपाल को भी मिलेगा आमंत्रण
तीसरा प्रावधान केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी से जुड़ा है। यदि Government of Union Territories Act, 1963 की धारा 51 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश पुडुचेरी के संबंध में लागू है, तो वहां के उपराज्यपाल को परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
इस प्रावधान के जरिए पुडुचेरी से जुड़ी विशेष संवैधानिक-वैधानिक स्थिति में उपराज्यपाल की भागीदारी को औपचारिक रूप से इंटर-स्टेट काउंसिल के संशोधित नियमों में शामिल किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के लिए भी नया प्रावधान
चौथी स्थिति केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से संबंधित है। यदि Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश लागू है, तो जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को इंटर-स्टेट काउंसिल की बैठक में आमंत्रित किया जाएगा।
इस तरह संशोधित आदेश में जम्मू-कश्मीर के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान उस स्थिति में लागू होगा जब संबंधित अधिनियम की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति का आदेश प्रभावी हो।
तत्काल प्रभाव से लागू हुआ संशोधन
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इंटर-स्टेट काउंसिल (अमेंडमेंट) ऑर्डर, 2026 प्रकाशन के साथ ही प्रभावी हो गया। इसका मतलब है कि इसमें निर्धारित चार विशेष परिस्थितियों में संबंधित राज्यपाल या उपराज्यपाल को परिषद की बैठकों में आमंत्रित करने की व्यवस्था अब लागू है।
केंद्र-राज्य समन्वय के संदर्भ में महत्व
इंटर-स्टेट काउंसिल केंद्र और राज्यों के बीच संवाद तथा सहयोग के लिए संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मंच है। 1990 में इसकी स्थापना के बाद समय-समय पर इसके नियमों में बदलाव किए गए हैं। 2026 का संशोधन विशेष संवैधानिक या वैधानिक व्यवस्थाओं के लागू होने पर संबंधित राज्यपालों और उपराज्यपालों की परिषद की बैठकों में भागीदारी को स्पष्ट करता है। यह बदलाव परिषद की संरचना और बैठकों में भागीदारी से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट रूप देता है।