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ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा। ग्रैंड रोड पर भारी भीड़ के चलते दम घुटने से 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। विपक्ष ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल।
ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जगन्नाथ रथ यात्रा जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान एक अत्यंत दुखद और दर्दनाक हादसा सामने आया है। महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा के दर्शन के लिए उमड़े लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते दम घुटने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है। इस घटना के बाद से ही रथ यात्रा उत्सव के बीच मातम और हड़कंप का माहौल है। वहीं, इस दुखद हादसे के बाद प्रशासन के दावों और विपक्ष के आरोपों के बीच एक नया सियासी विवाद भी खड़ा हो गया है। सरकार जहां इस घटना में किसी भी प्रकार की भगदड़ (Stampede) होने से साफ इनकार कर रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बता रहा है।
कैसे हुआ हादसा: ‘बड़ा दंड’ खींचने के दौरान बेहोश हुए श्रद्धालु
यह दर्दनाक वाकया उस समय घटित हुआ जब देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के विशाल रथों को खींचने के लिए गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान ‘बड़ा दंड’ (ग्रैंड रोड) पर महाप्रभु के रथ को खींचने और छूने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भारी बारिश के बावजूद लाखों लोग एक साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके कारण अचानक वहां भारी जाम लग गया।
इसी आपाधापी और अत्यधिक भीड़ के दबाव में दो श्रद्धालु दम घुटने (Suffocation) के कारण अचानक सड़क पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें भीड़ से बाहर निकाला और आनन-फानन में पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल (DHH) पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद दोनों श्रद्धालुओं को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में से एक श्रद्धालु की पहचान ‘अनिल दास’ के रूप में की गई है, जबकि दूसरे की शिनाख्त की कोशिशें की जा रही हैं।
श्रद्धालुओं में दहशत और आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन
जगन्नाथ रथ यात्रा अत्यधिक भीड़ और ग्रैंड रोड पर कई प्रमुख जगहों पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाने के कारण श्रद्धालुओं के बीच कुछ समय के लिए दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख विशेष बचाव इकाई (SRU) तुरंत हरकत में आई और युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया।
बचाव दल के सदस्यों ने सूझबूझ से काम लेते हुए सबसे पहले भीड़भाड़ वाले संवेदनशील इलाकों से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रभावित लोगों को तुरंत राहत देने के लिए प्रशासन द्वारा जगह-जगह बनाए गए अस्थायी मेडिकल शिविरों में प्राथमिक उपचार दिया गया। जिन घायलों या बीमार लोगों को अतिरिक्त और गहन चिकित्सा की आवश्यकता थी, उन्हें तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, जहां कई लोगों का इलाज जारी है।
प्रशासन अलर्ट: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस दुखद हादसे से सबक लेते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने आगे की संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ग्रैंड रोड पर भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के उपायों को तुरंत और अधिक सख्त कर दिया है। आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों, स्वयंसेवकों और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को उन पॉइंट्स पर तैनात किया गया है जहाँ भीड़ का दबाव सबसे ज्यादा है।
अधिकारियों ने श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन और आपातकालीन वाहनों (जैसे एम्बुलेंस और फायर टेंडर्स) को बिना किसी बाधा के रास्ता देने के लिए तुरंत कई अतिरिक्त मार्गों (Alternative Routes) का निर्माण किया है। मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और आपातकालीन दल लगातार स्थिति का बारीकी से आकलन कर रहे हैं ताकि रथ यात्रा के बाकी बचे कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराया जा सके।
भगदड़ के दावों पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
इस घटना के सामने आते ही ओडिशा की राजनीति भी गरमा गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने आधिकारिक तौर पर मीडिया के सामने आकर मौके पर किसी भी तरह की भगदड़ मचने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “दुर्भाग्यवश दो मौतें हुई हैं, लेकिन यह भगदड़ की वजह से नहीं बल्कि अत्यधिक उमस और भीड़ में दम घुटने के कारण हुई हैं। मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है।” मुख्यमंत्री के सलाहकार ने भी स्वास्थ्य मंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन जांच में जुटा है।
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार के इन दावों पर तीखा पलटवार किया है। बीजेडी से राज्यसभा सांसद शिबाशीष खूंटिया ने सरकार पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार झूठ बोल रही है और यह सीधे तौर पर कुप्रबंधन का मामला है। गौरतलब है कि पिछले साल भी वार्षिक रथ यात्रा के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर के पास भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 3 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिसके बाद इस बार सुरक्षा के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।