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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गुप्त जी का साहित्य आज भी राष्ट्रसेवा, कर्तव्यबोध और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिंदी साहित्य के गौरव, पद्म भूषण से सम्मानित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य भारतीय संस्कृति की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति और जनसामान्य की भावनाओं का सशक्त प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं, जितनी अपने समय में थीं।
‘मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य अमर प्रेरणा का स्रोत’
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संदेश में कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक मूल्यों को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि की कालजयी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रसेवा, कर्तव्यबोध और आत्मसम्मान का संदेश देती रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का ऐतिहासिक कार्य किया।
भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के महान कवि
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने हिंदी साहित्य के गौरव, पद्म भूषण से सम्मानित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी की जयंती पर उन्हें नमन किया।
“भारतीय संस्कृति की आत्मा, राष्ट्रचेतना की अभिव्यक्ति और जनमानस की भावनाओं को अपनी लेखनी में अमर करने वाले मैथिलीशरण गुप्त जी का साहित्य आज… pic.twitter.com/ppm6lcA34M
— DPR Haryana (@DiprHaryana) August 3, 2026
नायब सिंह सैनी ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य केवल हिंदी भाषा की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत है। उनकी रचनाओं में भारतीय परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और देशभक्ति की भावना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि आज भी उनका साहित्य पाठकों और युवाओं को प्रेरित करता है।
युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि के विचार और आदर्श आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य का अध्ययन करें और उनके जीवन मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि महान साहित्यकारों की विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।