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महा नवमी पर बाबा रामदेव ने कन्या पूजन कर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर महिला को अत्याचार से बचाना ही नवरात्रि पूजा का वास्तविक उद्देश्य है।
महा नवमी के पावन अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए, जहां किसी भी मां, बहन या बेटी को अत्याचार का शिकार न होना पड़े। बाबा रामदेव के मुताबिक, नवरात्रि में देवी की पूजा करने का वास्तविक अर्थ महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और संवेदनशीलता की भावना को जीवन में उतारना है। उन्होंने महा नवमी के अवसर पर कन्या पूजन भी किया और सनातन परंपरा में नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा प्रत्येक जीव में देवी भगवती के दर्शन करने की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, देवी का स्वरूप केवल छोटी कन्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक प्राणी में दिव्यता देखने की भावना ही भारत की आध्यात्मिक दृष्टि की विशेषता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज वास्तव में देवी की आराधना करता है, तो महिलाओं के प्रति उसके व्यवहार में भी श्रद्धा, सम्मान और सुरक्षा दिखाई देनी चाहिए। उनके इस संदेश में धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
हर जीव में देवी का स्वरूप देखना सनातन परंपरा की विशेषता: रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन परंपरा में देवी भगवती को हर नाम, रूप और अस्तित्व में देखने की दृष्टि विकसित की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भावना केवल कन्या पूजन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और संवेदना के रूप में दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्ति हर जीव में दिव्यता का अनुभव करता है, तो उसके मन में किसी के प्रति गलत भावना रखने की संभावना कम हो जाती है। बाबा रामदेव ने कहा कि यही भारत की आध्यात्मिक सोच और सनातन संस्कृति की मूल भावना है। उन्होंने महिलाओं के प्रति अपराधों और अत्याचारों को रोकने के लिए मजबूत सामाजिक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य यह था कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी मजबूत किया जाए। नवरात्रि के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। ऐसे में बाबा रामदेव ने इस पर्व को महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि देवी की उपासना तभी सार्थक होगी, जब हर महिला को भयमुक्त वातावरण मिल सके।
महिलाओं की सुरक्षा ही नवरात्रि पूजा का असली उद्देश्य
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें किसी भी मां, बहन या बेटी को अत्याचार का सामना न करना पड़े। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने और उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। बाबा रामदेव के अनुसार, नवरात्रि में पूजा-पाठ करने का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपराओं का पालन करना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपने आचरण में अपनाना भी है, जिनका संदेश देवी की आराधना देती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नवरात्रि की साधना का वास्तविक सार होना चाहिए। समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना परिवार, शिक्षा और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से मजबूत की जा सकती है। इसके साथ ही अपराधों की रोकथाम, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था भी आवश्यक है। बाबा रामदेव का संदेश इसी व्यापक सोच की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि धार्मिक आस्था का वास्तविक प्रभाव समाज में सकारात्मक बदलाव के रूप में नजर आना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा को केवल किसी एक पर्व या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे दैनिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाना जरूरी है।
महा नवमी पर कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के नौवें दिन महा नवमी मनाई जाती है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सिद्धियां, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं। महा नवमी के अवसर पर कई परिवारों में कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है, उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें भोजन तथा उपहार दिए जाते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन हवन और विशेष पूजा-अर्चना भी करते हैं। बाबा रामदेव ने भी इस पावन अवसर पर कन्या पूजन करके नारी शक्ति के प्रति सम्मान का संदेश दिया। कन्या पूजन को धार्मिक रूप से देवी की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसके माध्यम से श्रद्धालु बालिकाओं के प्रति श्रद्धा और स्नेह व्यक्त करते हैं। हालांकि, इस परंपरा का व्यापक सामाजिक अर्थ यह भी है कि बालिकाओं को सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर मिलें। धार्मिक आस्था के साथ इन मूल्यों को अपनाने से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में मदद मिल सकती है।
नवरात्रि और दुर्गा पूजा का देशभर में उत्साह
नवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। कई स्थानों पर दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं, जहां श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं। दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव और शारदोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया था। यह पर्व शक्ति, साहस और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि का समापन विजयादशमी या दशहरे के साथ होता है, जो दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय और कई परंपराओं में भगवान राम की रावण पर विजय का उत्सव मनाया जाता है। बाबा रामदेव का संदेश इसी धार्मिक और आध्यात्मिक भावना को सामाजिक जीवन से जोड़ता है। उनके अनुसार, देवी की आराधना का वास्तविक महत्व तभी है, जब समाज में महिलाओं को सम्मान मिले और उनके खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।