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ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले वुम्मिडी एथिराज का 21 अक्टूबर को निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े सेंगोल को तैयार करने वाले प्रसिद्ध शिल्पकार वुम्मिडी एथिराज का 21 अक्टूबर को निधन हो गया। वह 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल को बनाने वाले कारीगरों में प्रमुख थे। उनके निधन की खबर से आभूषण निर्माण और पारंपरिक शिल्पकला से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सहित कई प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में उनके योगदान को याद किया। वुम्मिडी एथिराज का जीवन पारंपरिक आभूषण निर्माण की कला, भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा रहा। सेंगोल के निर्माण में उनकी भूमिका ने उन्हें देश के ऐतिहासिक शिल्पकारों में एक विशेष स्थान दिलाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख, सांस्कृतिक विरासत में योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वुम्मिडी एथिराज के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पारंपरिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले एथिराज को ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रस्तुत किए गए सेंगोल को 2023 में नए संसद भवन में सम्मानजनक स्थान देने का अवसर उनकी सरकार को मिला था। उस अवसर पर प्रधानमंत्री की मुलाकात वुम्मिडी एथिराज से भी हुई थी, जहां उन्होंने देश और संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एथिराज का जीवन और उनकी कलात्मक कुशलता भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और देश की विकास यात्रा के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाती है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और उनके शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सेंगोल निर्माण में योगदान को सराहा
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी वुम्मिडी एथिराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सेंगोल को भारत की सभ्यतागत विरासत का पवित्र प्रतीक बताते हुए कहा कि इसके निर्माण में एथिराज के योगदान को हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा। उपराष्ट्रपति ने भारतीय आभूषण निर्माण की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने में उनके योगदान की भी सराहना की। उनके अनुसार, एथिराज अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने दिवंगत शिल्पकार के परिवार और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
केशव प्रसाद मौर्य ने भी दी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी वुम्मिडी एथिराज के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले एथिराज का कार्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को संरक्षित करने के प्रयासों में हमेशा याद रखा जाएगा। मौर्य ने शोक संदेश में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए भगवान श्रीराम से प्रार्थना की और दुख की इस घड़ी में उनके परिवार को शक्ति प्रदान करने की कामना की। उनके संदेश में एथिराज के योगदान को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखा गया।
तमिलनाडु के राज्यपाल ने 1947 में सेंगोल निर्माण की भूमिका को किया याद
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी एथिराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। तमिलनाडु के लोक भवन की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि वुम्मिडी एथिराजुलु ने महज 20 वर्ष की उम्र में 1947 में पवित्र सेंगोल के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। राज्यपाल ने सेंगोल को भारत की सभ्यतागत विरासत, न्यायपूर्ण शासन और स्वतंत्रता के समय सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सेंगोल के निर्माण में एथिराज का योगदान देश के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का हिस्सा बन चुका है। राज्यपाल ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
क्या है सेंगोल और भारतीय इतिहास में इसका महत्व?
सेंगोल एक पारंपरिक राजदंड है, जिसे भारतीय परंपरा में सत्ता, जिम्मेदारी और न्यायपूर्ण शासन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय इसे जवाहरलाल नेहरू को प्रस्तुत किया गया था। सेंगोल का संबंध तमिल परंपराओं और ऐतिहासिक सत्ता हस्तांतरण की अवधारणा से भी जोड़ा जाता है। इसका निर्माण पारंपरिक शिल्पकला और आभूषण निर्माण की विशेषज्ञता का उदाहरण माना जाता है।
वर्ष 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर सेंगोल को संसद भवन में स्थापित किया गया और इसे विशेष सम्मान दिया गया। इसके माध्यम से भारत की ऐतिहासिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया गया। संसद भवन में इसकी स्थापना के बाद सेंगोल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना।
125 साल पुराने आभूषण व्यवसाय से जुड़ा था परिवार
वुम्मिडी एथिराज वुम्मिडी परिवार के मुखिया थे। उनका परिवार लगभग 125 वर्ष पुराने आभूषण व्यवसाय वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स से जुड़ा है। यह परिवार पारंपरिक आभूषण निर्माण और कारीगरी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जाना जाता है। एथिराज का योगदान केवल एक ऐतिहासिक वस्तु के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी कला भारतीय शिल्प परंपराओं की निरंतरता का भी प्रतीक रही।
उनके निधन के साथ भारतीय पारंपरिक कारीगरी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व दुनिया से विदा हो गया। प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं तक, अनेक हस्तियों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दिया जाना इस बात को दर्शाता है कि सेंगोल के निर्माण में उनकी भूमिका को देश की सांस्कृतिक स्मृति में विशेष स्थान प्राप्त है। उनका काम भारतीय इतिहास और पारंपरिक शिल्पकला के बीच एक स्थायी कड़ी के रूप में याद किया जाता रहेगा।