Table of Contents
भारत ने मालदीव के 150 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल पर करीब 45 मिलियन डॉलर का ब्याज वहन किया। मालदीव ने अब पूरी मूल राशि चुका दी है।
भारत ने पड़ोसी देश मालदीव के साथ अपनी आर्थिक और विकास साझेदारी के तहत एक बार फिर महत्वपूर्ण वित्तीय सहयोग का उदाहरण पेश किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि मालदीव द्वारा 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ट्रेजरी बिल (T-Bills) सुविधा की पूरी मूल राशि चुका दी गई है। हालांकि, इस पूरी अवधि के दौरान इन ट्रेजरी बिलों पर लगने वाले करीब 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ब्याज का भुगतान भारत सरकार ने किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारत की इस वित्तीय सहायता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सहयोग मालदीव पर वित्तीय दबाव कम करने और उसकी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा है।
150 मिलियन डॉलर की पूरी राशि चुकाई
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने साल 2019 में मालदीव सरकार के लिए 150 मिलियन डॉलर की ट्रेजरी बिल सुविधा सब्सक्राइब की थी। इस सुविधा को मालदीव की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बार आगे बढ़ाया गया। इसे कुल छह बार रोलओवर किया गया। अब इसकी अंतिम 50 मिलियन डॉलर की किस्त का भुगतान 17 सितंबर 2026 को पूरा हो गया। इससे 2019 में ली गई पूरी 150 मिलियन डॉलर की सुविधा का भुगतान हो गया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मालदीव सरकार ने ट्रेजरी बिल की मूल राशि चुकाई, जबकि पांच साल की अवधि में इस पूरी सुविधा पर करीब 45 मिलियन डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने वहन किया।
भारत ने क्यों उठाया ब्याज का बोझ?
रणधीर जायसवाल ने कहा कि ट्रेजरी बिलों की मूल राशि मालदीव सरकार की ओर से चुकाई गई, लेकिन पिछले पांच वर्षों में 150 मिलियन डॉलर के इन सभी ट्रेजरी बिलों पर होने वाले ब्याज का भुगतान भारत सरकार ने किया। भारत की ओर से ब्याज के रूप में दी गई कुल राशि करीब 45 मिलियन डॉलर रही। यह व्यवस्था मालदीव की वित्तीय स्थिति पर तत्काल दबाव कम करने और उसे अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद देने के उद्देश्य से की गई थी। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और विकास साझेदारी का अहम हिस्सा बताया।
मालदीव को 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा
भारत का आर्थिक सहयोग केवल 150 मिलियन डॉलर की ट्रेजरी बिल सुविधा तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने मालदीव के वित्तीय सिस्टम को समर्थन देने के लिए 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई है। करेंसी स्वैप व्यवस्था के जरिए दोनों देशों के बीच जरूरत के समय विदेशी मुद्रा और वित्तीय तरलता को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा SBI ने करीब 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मालदीव ट्रेजरी बॉन्ड में भी निवेश किया है। इन बॉन्ड की परिपक्वता अवधि 2029 और 2030 तक है। इससे मालदीव को आने वाले वर्षों में भी भारत की वित्तीय भागीदारी का समर्थन मिलता रहेगा।
मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार पर सरकार का भरोसा
मालदीव के वित्त मंत्रालय ने भी विदेशी मुद्रा की स्थिति को लेकर उठ रही चिंताओं पर स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त 2026 के अंत तक देश का आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार करीब 664 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। सरकार ने कहा कि कर्ज की अदायगी के बावजूद ईंधन, खाद्य पदार्थ और दवाओं जैसी जरूरी वस्तुओं के आयात में बाधा नहीं आएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
मालदीव ने तीन चरणों में चुकाई राशि
मालदीव के वित्त मंत्रालय के अनुसार, 150 मिलियन डॉलर की सुविधा का भुगतान अलग-अलग चरणों में किया गया। पहली 50 मिलियन डॉलर की राशि जनवरी 2024 में चुकाई गई थी। इसके बाद 11 मई 2026 को दूसरी 50 मिलियन डॉलर की राशि का भुगतान किया गया। अब 17 सितंबर 2026 को अंतिम 50 मिलियन डॉलर की किस्त चुकाने के साथ पूरी सुविधा का भुगतान पूरा हो गया। मालदीव सरकार ने कहा कि उसने पूर्व सरकार के कार्यकाल में ली गई इस बजट सहायता सुविधा से जुड़े कर्ज दायित्वों को निर्धारित तारीखों पर पूरा किया है।
जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी
मालदीव सरकार ने यह भी कहा कि कर्ज चुकाने के कारण देश में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को लेकर किए जा रहे दावे सही नहीं हैं। सरकार के अनुसार, विदेशी मुद्रा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पहले से आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। ईंधन, खाद्य सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने कहा कि लोगों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारत-मालदीव संबंधों में आर्थिक सहयोग अहम
भारत और मालदीव के बीच आर्थिक सहयोग दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्तीय सहायता के अलावा भारत मालदीव के साथ विकास परियोजनाओं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और अन्य सहयोग कार्यक्रमों में भी भागीदारी करता रहा है। मालदीव सरकार ने भविष्य के कर्ज दायित्वों के लिए पहले से तैयारी करने और सॉवरेन डेवलपमेंट फंड में धन जमा करने को अपनी वित्तीय रणनीति का हिस्सा बताया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, द्विपक्षीय साझेदारों और अन्य सहयोगी संगठनों के साथ विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए बातचीत भी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि मालदीव अपनी वित्तीय स्थिरता मजबूत करने पर जोर दे रहा है, जबकि भारत वित्तीय सहायता, करेंसी स्वैप और विकास सहयोग के जरिए पड़ोसी देश की आर्थिक जरूरतों में भागीदारी बनाए हुए है।