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भारत में हर चौथी मौत की वजह हार्ट अटैक है। विशेषज्ञ बताते हैं कि क्यों सिर्फ ‘नॉर्मल’ ब्लड रिपोर्ट पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। जानें बचाव के तरीके।
भारत में हृदय रोगों (Heart Diseases) का खतरा एक महामारी की तरह बढ़ रहा है। हालिया आंकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके अनुसार भारत में होने वाली हर चौथी मौत का जिम्मेदार ‘हार्ट अटैक’ या दिल से जुड़ी बीमारियां हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब इसके शिकार केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि 25 से 40 साल के युवा भी हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल ‘नॉर्मल हेल्थ रिपोर्ट’ देखकर खुद को स्वस्थ मान लेना एक जानलेवा गलती साबित हो सकती है।
क्यों धोखा दे रही है ‘नॉर्मल’ हेल्थ रिपोर्ट?
अक्सर लोग साल में एक बार बेसिक ब्लड टेस्ट (CBC) या लिपिड प्रोफाइल करा लेते हैं और रिपोर्ट सामान्य आने पर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है:
- साइलेंट ब्लॉकेज: कई बार धमनियों (Arteries) में 50-60% तक ब्लॉकेज होने के बावजूद ब्लड रिपोर्ट सामान्य आ सकती है। व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते जब तक कि ब्लॉकेज 70% से ऊपर न चला जाए।
- सॉफ्ट प्लाक (Soft Plaque): ब्लड टेस्ट से यह पता नहीं चलता कि दिल की नसों में कच्चा प्लाक जमा है। तनाव या अचानक भारी शारीरिक मेहनत के दौरान यह प्लाक फट सकता है, जिससे ‘सडेन कार्डियक अरेस्ट’ आ जाता है।
- कोलेस्ट्रॉल ही सब कुछ नहीं: कई मामलों में देखा गया है कि हार्ट अटैक के शिकार लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल बिल्कुल सामान्य था। हृदय रोग के पीछे सूजन (Inflammation), जेनेटिक्स और स्ट्रेस जैसे कई अन्य छिपे हुए कारक होते हैं।
भारत में बढ़ते हार्ट अटैक के मुख्य कारण
- खराब खान-पान: अत्यधिक तेल-मसाले, प्रोसेस्ड फूड और चीनी का सेवन नसों में गंदगी जमा करता है।
- शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle): घंटों बैठकर काम करना और व्यायाम न करना दिल की मांसपेशियों को कमजोर बना रहा है।
- तनाव और नींद की कमी: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) हार्ट अटैक का एक बड़ा ‘ट्रिगर’ बन गया है।
- प्रदूषण और स्मोकिंग: बढ़ता वायु प्रदूषण और धूम्रपान की लत फेफड़ों के साथ-साथ दिल को भी सीधा नुकसान पहुँचा रही है।
सिर्फ रिपोर्ट नहीं, इन लक्षणों पर भी दें ध्यान
यदि आपको इनमें से कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ (Cardiologist) से मिलें:
- सीढ़ियां चढ़ते समय या तेज चलने पर सीने में भारीपन।
- जबड़े, बाएं कंधे या पीठ के ऊपरी हिस्से में बेवजह दर्द।
- बिना किसी मेहनत के ठंडा पसीना आना और घबराहट होना।
- अचानक से सांस फूलना या बहुत जल्दी थकान महसूस होना।
बचाव के लिए क्या करें?
- एडवांस स्क्रीनिंग: 30 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार TMT (Treadmill Test), ECG और यदि आवश्यक हो तो Calcium Scoring टेस्ट जरूर कराएं।
- नमक और चीनी पर लगाम: अपने आहार में नमक और चीनी की मात्रा कम करें।
- 30 मिनट की वॉक: रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज पैदल चलें।
- योग और मेडिटेशन: तनाव को कम करने के लिए ध्यान (Meditation) का सहारा लें।