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FSSAI ने नेस्ले इंडिया के तीन शिशु पोषण उत्पादों को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। प्रचार संबंधी दावों और पोषण मानकों पर सवाल उठने के बाद कंपनी के शेयरों में गिरावट आई।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Nestle India के कुछ शिशु पोषण उत्पादों को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। नियामक ने कंपनी के खिलाफ तीन अलग-अलग एडजुडिकेशन केस दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई Infant Nutrition, NAN Excella और Lactogen से जुड़े मामलों में की गई है। FSSAI के अनुसार, जांच के दौरान कुछ उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग से जुड़े दावों पर आपत्ति सामने आई, जबकि एक अन्य फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने में निर्धारित मात्रा से कम बायोटिन पाया गया। कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद 18 सितंबर को Nestle India के शेयरों में इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 3 फीसदी तक गिरावट देखी गई।
NAN Excella Pro Stage 1 के दावों पर सवाल
FSSAI ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध Nestle India के शिशु पोषण उत्पादों और उनसे जुड़े प्रचार सामग्री की जांच की। इस दौरान NAN Excella Pro Stage 1 पर किए गए कुछ दावों को नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया गया। FSSAI के मुताबिक, इस उत्पाद के प्रचार में “5 HMOs” और “Whey Protein” से संबंधित दावे देखे गए।
नियामक ने इन दावों को लेकर Nestle India से स्पष्टीकरण मांगा। FSSAI का कहना है कि संबंधित प्रचार सामग्री FSS (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के Regulation 4(2) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। यह नियम शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले कुछ प्रचारात्मक दावों और सामग्री पर प्रतिबंध लगाता है।
Lactogen Pro 1 पर भी उठे सवाल
FSSAI की कार्रवाई में Lactogen Pro 1 भी शामिल है। नियामक ने इस उत्पाद के संबंध में ‘Whey Protein’ को आसानी से पचने वाला बताने वाले दावे पर आपत्ति जताई। FSSAI के अनुसार, इस तरह के प्रचारात्मक दावे शिशु खाद्य उत्पादों की बिक्री बढ़ाने वाले प्रचार से संबंधित नियमों के दायरे में आते हैं।
नियामक ने कहा कि NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 से संबंधित दावे FSS (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के Regulation 4(2) के साथ-साथ Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods Act, 1992 (IMS Act) की धारा 3 से जुड़े प्रावधानों के विपरीत पाए गए। IMS Act के तहत शिशु दूध के विकल्प और संबंधित उत्पादों के विज्ञापन तथा प्रचार पर प्रतिबंधात्मक प्रावधान हैं।
फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन की कमी
तीसरा मामला एक अलग फॉलो-अप फॉर्मूला से जुड़ा है। FSSAI के अनुसार, Nestle India द्वारा निर्मित इस उत्पाद के एक नमूने की प्रयोगशाला जांच में बायोटिन का स्तर निर्धारित मानक से कम पाया गया। इसके बाद नमूने को दोबारा जांच के लिए रेफरल प्रयोगशाला भेजा गया।
दोबारा किए गए परीक्षण में भी नमूना निर्धारित बायोटिन मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके आधार पर FSSAI ने कंपनी के खिलाफ तीसरा एडजुडिकेशन केस दर्ज किया। बायोटिन को विटामिन B7 के नाम से भी जाना जाता है और यह शरीर में कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं से जुड़ा पोषक तत्व है। हालांकि, इस मामले में अंतिम नियामकीय निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
Nestle India ने क्या कहा?
FSSAI की कार्रवाई के बाद Nestle India ने अपने उत्पादों के अनुपालन का बचाव किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि संबंधित उत्पाद और उनके लेबल लागू नियमों के अनुरूप हैं। कंपनी के अनुसार, NAN EXCELLA PRO और LACTOGEN PRO के उत्पाद और लेबल FSSAI की विशेषज्ञ समिति से अनुमोदित थे।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसे जारी किए गए नोटिस के जवाब में उसने अधिकारियों को विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। Nestle India के मुताबिक, लेबल पर इस्तेमाल किए गए बयान तथ्यात्मक हैं और वैज्ञानिक साहित्य से समर्थित हैं। कंपनी ने सभी लागू कानूनों, नियमों और लेबल संबंधी आवश्यकताओं का पालन करने की बात दोहराई है तथा FSSAI के साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
FSSAI की कार्रवाई की खबर का असर Nestle India के शेयरों पर भी देखने को मिला। 18 सितंबर को कंपनी के शेयर इंट्राडे कारोबार में करीब 2.5 से 3 फीसदी तक नीचे चले गए और बीएसई पर शेयर ने लगभग ₹1,332.80 का इंट्राडे लो देखा। हालांकि, बाद में शेयर में कुछ रिकवरी हुई और कारोबार के अंत में गिरावट सीमित रही।
बाजार में किसी कंपनी के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की खबर आने पर निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है, खासकर तब जब मामला उत्पादों की गुणवत्ता या नियामकीय अनुपालन से जुड़ा हो। हालांकि, शेयर की चाल केवल एक खबर से तय नहीं होती और अंतिम प्रभाव कंपनी की आगामी घोषणाओं, नियामकीय प्रक्रिया और वित्तीय प्रदर्शन समेत कई कारकों पर निर्भर करता है।
तीनों मामलों में आगे क्या होगा?
FSSAI द्वारा तीन अलग-अलग एडजुडिकेशन केस शुरू किए जाने का मतलब यह है कि अब संबंधित मामलों में नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 के मामले प्रचारात्मक दावों से जुड़े हैं, जबकि तीसरा मामला फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन की निर्धारित मात्रा से संबंधित है।
वहीं, Nestle India ने अपने उत्पादों के नियमों के अनुरूप होने की बात कही है और अधिकारियों को अपना जवाब सौंपने की जानकारी दी है। इसलिए इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष आने से पहले FSSAI की आगे की कार्रवाई और कंपनी के जवाब दोनों पर नजर रहेगी। फिलहाल यह मामला शिशु पोषण उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और निर्धारित पोषण मानकों के अनुपालन को लेकर नियामकीय निगरानी का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।