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दिल्ली में कथित राइस स्कैम को लेकर AAP प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए ₹22,000 करोड़ के दावे का पूरा मामला।
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी के नेतृत्व वाली रेखा गुप्ता सरकार पर सब्सिडी वाले चावल की खरीद और बिक्री को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। भारद्वाज ने दावा किया है कि दिल्ली के गरीबों और जरूरतमंदों के लिए मिलने वाले चावल को कथित तौर पर दूसरे रास्ते से निजी कंपनी को बेचने की योजना बनाई गई थी और इससे तीन साल में करीब 22,000 करोड़ रुपये का कथित घोटाला हो सकता था। यह आरोप उन्होंने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के जरिए लगाए। हालांकि, ये आरोप फिलहाल AAP की ओर से लगाए गए हैं और सरकार या भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सौरभ भारद्वाज ने क्या आरोप लगाए?
सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले को ‘राइस स्कैम’ बताते हुए दावा किया कि दिल्ली सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और असम स्थित एक सरकारी निगम की ओर से भारतीय खाद्य निगम यानी FCI से भारी सब्सिडी वाला चावल लेने का अनुरोध किया गया था। आरोप के मुताबिक यह चावल दिल्ली के गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना था, लेकिन कथित तौर पर इसे एक निजी कंपनी को बेचने की व्यवस्था की जा रही थी।
भारद्वाज का दावा है कि इस पूरी व्यवस्था में हर सप्ताह करीब 31,000 मीट्रिक टन चावल की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि FCI से कम कीमत पर प्राप्त होने वाले इस चावल को बाद में हरियाणा की एक निजी कंपनी को ऊंची कीमत पर बेचा जाना था।
₹23.20 में खरीद, ₹46 में बिक्री का दावा
AAP नेता ने चावल की कीमतों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, जिस चावल को लगभग 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर हासिल किया जा रहा था, उसे कथित तौर पर खुले बाजार में करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा सकता था।
भारद्वाज के मुताबिक, दोनों कीमतों के बीच करीब 23 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर बनता है। उन्होंने इसी अंतर के आधार पर दावा किया कि कथित व्यवस्था से हर सप्ताह करीब 143 करोड़ रुपये का नुकसान या अनियमित लाभ हो सकता था। उनका आरोप है कि अगर इस व्यवस्था को तीन साल तक जारी रखा जाता, तो कथित घोटाले का आकार लगभग 22,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था।
चावल आखिर किसके लिए था?
AAP के आरोपों का मुख्य आधार यह सवाल है कि FCI से सब्सिडी पर मिलने वाला चावल किस उद्देश्य के लिए लिया जा रहा था और उसका वास्तविक लाभार्थी कौन था। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि यह चावल दिल्ली के गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए निर्धारित था, लेकिन कथित तौर पर इसे दिल्ली से बाहर एक निजी कंपनी को बेचने की व्यवस्था की गई।
उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में दिल्ली सरकार के एक विभाग, असम स्थित एक निगम और हरियाणा की एक निजी कंपनी के बीच कथित लेनदेन की कड़ी होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
तीन साल में ₹22 हजार करोड़ का दावा कैसे?
रेखा गुप्ता सरकार का एक ऐसा भ्रष्टाचार सामने आया है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे!
सिर्फ 3 साल में ₹22,000 करोड़ लूटने का था प्लान?
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष @Saurabh_MLAgk ने किया Expose, देखिए। pic.twitter.com/TKZIWiaSJX
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 9, 2026
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि यह कोई एक-दो सप्ताह की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर इसे तीन वर्षों के लिए तैयार किया गया था। उनके मुताबिक, हर सप्ताह बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाला चावल लेने और उसे अधिक कीमत पर बेचने से होने वाले अंतर को जोड़ने पर तीन साल में करीब 22,000 करोड़ रुपये की रकम बन सकती थी।
AAP ने इसे दिल्ली सरकार की ओर से किया गया एक बड़ा भ्रष्टाचार का प्रयास बताते हुए दस्तावेज सार्वजनिक करने और पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है। पार्टी विधायक संजीव झा ने भी चावल की खरीद और वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सरकार और FCI की ओर से क्या कहा गया?
इस आरोप को लेकर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आरोप सामने आने के समय बीजेपी सरकार या FCI की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। इसलिए ₹22,000 करोड़ की राशि को फिलहाल सिद्ध घोटाले के तौर पर नहीं, बल्कि AAP नेता द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले में दस्तावेज, खरीद प्रक्रिया, चावल के वास्तविक आवंटन और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हो सकेगी।
दिल्ली की राजनीति में बढ़ सकता है विवाद
सौरभ भारद्वाज के इन आरोपों से दिल्ली में AAP और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है। AAP ने जहां इसे गरीबों के हिस्से के राशन से जुड़ा गंभीर मामला बताया है, वहीं आरोपों की वास्तविकता तय करने के लिए संबंधित सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक जवाब का इंतजार रहेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सब्सिडी वाला चावल वास्तव में निर्धारित लाभार्थियों तक पहुंच रहा था या उसकी खरीद और बिक्री में कोई अनियमितता हुई। अगर AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेज सामने आते हैं, तो यह मामला दिल्ली की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं, यदि सरकार की ओर से प्रक्रिया और रिकॉर्ड को लेकर स्पष्ट जवाब दिया जाता है, तो पूरे विवाद की तस्वीर और साफ होगी।