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एटीएफ की कीमत 5.46% बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई। बढ़ती ईंधन लागत से इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों पर दबाव आया, मार्जिन को लेकर चिंता बढ़ी।
मंगलवार को भारतीय विमानन क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखा गया। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5.46 प्रतिशत या 6.28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। विमानन कंपनियों के लिए जेट फ्यूल एक महत्वपूर्ण परिचालन खर्च है और इसकी कीमत में लगातार बढ़ोतरी उनके मुनाफे और मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन का शेयर मंगलवार को सुबह 10:25 बजे 3.21 प्रतिशत गिरकर 5,066 रुपये पर आ गया। साथ ही, स्पाइसजेट का शेयर 1.45 प्रतिशत गिर गया और 10.17 रुपये पर कारोबार कर रहा था। एटीएफ कीमतों में लगातार दो महीने की बढ़ोतरी ने एयरलाइन कंपनियों पर अधिक खर्च करने का दबाव डाला है।
AT&F की कीमत 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई
हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद घरेलू एयरलाइंस की एटीएफ की कीमत 115 रुपये प्रति लीटर से 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है कि जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं। अगस्त में एटीएफ की कीमत भी 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ी थी। वहीं, जुलाई में इसमें 5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई। पिछले कुछ महीनों में एटीएफ कीमतों में गिरावट हुई है, लेकिन अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी ने एयरलाइन कंपनियों को चिंतित कर दिया है।
ईंधन विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में एक बहुत बड़ा हिस्सा है। भारतीय एयरलाइंस का जेट फ्यूल खर्च लगभग ३५ से ४० प्रतिशत है। यही कारण है कि एटीएफ की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से एयरलाइंस की लागत में महत्वपूर्ण वृद्धि हो सकती है। कंपनियों के लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है यदि वे यात्रियों पर इस अतिरिक्त लागत को पूरी तरह नहीं डाल सकते।
IndiGo और SpaceJet के शेयरों में गिरावट
मंगलवार को एटीएफ की कीमतों में वृद्धि ने विमानन कंपनियों के शेयरों पर भी प्रभाव डाला। इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.21% गिर गया और 5,066 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इंडिगो एविएशन इंडिगो की मूल कंपनी है, जो देश के विमानन बाजार में बड़ा हिस्सा है।
स्पाइसजेट के शेयर भी कमजोर रहे। कम्पनी का शेयर 1.45 प्रतिशत गिरकर 10.17 रुपये पर आ गया। अब निवेशक बढ़ी हुई ईंधन की कीमतों का आने वाले महीनों में एयरलाइन्स के मुनाफे पर क्या असर हो सकता है। विशेष रूप से उन कंपनियों पर नजर रहेगी जिनके ईंधन खर्च पहले से ही उनकी लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यात्रियों के लिए हवाई सफर महंगा होगा?
AT&T कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एयरलाइंस यात्रियों पर इसका बोझ डालेंगे या नहीं। ईंधन की अधिक लागत को भुगतान करने के लिए विमानन कंपनियां किराया बढ़ा सकती हैं। ईंधन की लागत केवल हवाई टिकट की कीमत नहीं निर्धारित करती। किराया प्रतिस्पर्धा, यात्री मांग, उपलब्ध सीटों की संख्या, बुकिंग ट्रेंड और रूट की स्थिति से प्रभावित होता है।
ऐसे में यात्रियों से एटीएफ की पूरी बढ़ी हुई लागत वसूलने की जरूरत नहीं है। एयरलाइंस को किराया में भारी बढ़ोतरी करना मुश्किल हो सकता है अगर रूट में प्रतिस्पर्धा अधिक है या मांग कम है। विपरीत, कंपनियां अधिक मांग वाले रूटों पर टिकट कीमतों में कुछ अतिरिक्त खर्च कर सकती हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है, इसलिए एटीएफ कीमतों में वृद्धि हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव ने पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं को जन्म दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है।
अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड, या WTI क्रूड, करीब 86.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड में 2.7 प्रतिशत और WTI में 2.8 प्रतिशत की तेजी हुई थी। बाजार ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को तेल आपूर्ति के लिए खतरा बताया।
एयरलाइन कंपनियों के मार्जिन का विश्लेषण
तेजी विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन की लागत लगातार बढ़ने पर एयरलाइन्स के परिचालन मार्जिन में कमी आ सकती है अगर वे यात्रियों पर पूरा बोझ नहीं डाल सकते। यही नहीं, विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ाने से भी रोकती है।
आने वाले समय में निवेशकों के लिए एयरलाइन कंपनियों के तिमाही नतीजे, ईंधन की खपत, औसत हवाई किराया और यात्री मांग महत्वपूर्ण संकेत होंगे। Компанियां खर्चों को नियंत्रित करने और अधिक क्षमता का उपयोग करके बढ़े हुए ईंधन खर्च के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर सकती हैं।
इन संकेतकों पर निवेशकों का ध्यान
फिलहाल, एटीएफ और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव विमानन क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। एयरलाइंस पर खर्च का दबाव और बढ़ सकता है अगर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं। वहीं, कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है अगर तेल की कीमतों में स्थिरता आती है या गिरावट होती है।
निवेशक बढ़ती ईंधन लागत को लेकर चिंतित हैं, जैसा कि मंगलवार की शुरुआती गिरावट दिखाती है। आने वाले महीनों में एयरलाइन कंपनियों के शेयरों की दिशा काफी हद तक बढ़ी हुई लागत को किराए में कितना स्थानांतरित कर पाती हैं और इसका यात्री मांग पर क्या असर पड़ता है। फिर भी एटीएफ की लगातार बढ़ती कीमतें इंडिगो और स्पाइसजेट समेत पूरे विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।