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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू हो चुकी है। अगर आप भी मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए 9 दिनों का व्रत रख रहे हैं, तो सात्विक भोजन और व्रत के इन जरूरी नियमों को जरूर जान लें।
सनातन धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत ही पवित्र और आध्यात्मिक माना जाता है। हम सभी चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में तो जानते ही हैं, लेकिन इसके अलावा साल में दो बार ‘गुप्त नवरात्रि’ भी आती है। इस साल आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हो रही है। यह पूरे नौ दिनों तक चलने वाला एक पावन उत्सव है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों और दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। बहुत से श्रद्धालु इन नौ दिनों में अपनी मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं और सात्विक जीवन जीते हैं।
चूंकि यह गुप्त साधना का समय होता है, इसलिए इसके नियम थोड़े कड़े होते हैं। हर परिवार या क्षेत्र के अनुसार रीति-रिवाज थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ बेसिक नियम ऐसे हैं जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए।
भोजन से जुड़ी जरूरी बातें: तामसिक चीजों से रहें दूर
नवरात्रि के नौ दिनों में भोजन की शुद्धता सबसे ज्यादा मायने रखती है। व्रत के दौरान शरीर और मन को पवित्र रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है:
- प्याज और लहसुन का इस्तेमाल बंद: व्रत रखने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके पूरे घर में इन नौ दिनों तक प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इन्हें तामसिक माना जाता है जो मन को भटकाते हैं।
- मांसाहार और शराब से दूरी: गुप्त नवरात्रि के दौरान शराब, मांस या अंडे का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। इन दिनों में सादगी और पवित्रता का माहौल होना जरूरी है।
- सेंधा नमक का प्रयोग: व्रत के दौरान हम जो साधारण सफेद नमक खाते हैं, उसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। भोजन पकाने के लिए केवल शुद्ध सेंधा नमक (Rock Salt) का ही उपयोग होता है।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
नौ दिनों के उपवास के दौरान शरीर में कमजोरी न आए, इसके लिए पौष्टिक और फलाहारी भोजन लेना चाहिए। आप इन चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं:
- अनाज: कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, सामा के चावल (सामक) और साबूदाना।
- सब्जियां: आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू और लौकी।
- डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही, छाछ, पनीर और घर का बना शुद्ध देसी घी।
- फल और मेवे: सभी प्रकार के ताजे फल, मखाने, बादाम, काजू और नारियल पानी।
इन चीजों से बना हल्का और कम तेल-मसाले वाला खाना ही सात्विक भोजन कहलाता है। यह आसानी से पच जाता है और शरीर को ताकत भी देता है।
मन और व्यवहार की शुद्धता भी है जरूरी
गुप्त नवरात्रि में सिर्फ भूखे रहने का नाम व्रत नहीं है। इसके साथ ही अपने व्यवहार को भी शुद्ध रखना पड़ता है:
- संयम का पालन: इन नौ दिनों में व्रती को सादगी से रहना चाहिए। जमीन पर चटाई या कुश का आसन बिछाकर सोना इस दौरान बहुत शुभ माना जाता है।
- गुस्से और झगड़े से बचें: व्रत के दौरान किसी पर गुस्सा न करें, किसी की बुराई या चुगली करने से बचें और घर में शांति का माहौल रखें। अपना खाली समय माता के मंत्रों का जाप करने या ध्यान लगाने में बिताएं।
- साधना को रखें गुप्त: इस नवरात्रि का नाम ही ‘गुप्त नवरात्रि’ है। इसलिए आप जो भी पूजा-पाठ या मंत्र जाप कर रहे हैं, उसके बारे में दूसरों को न बताएं। इसे जितना गुप्त रखेंगे, आपकी साधना उतनी ही सफल मानी जाएगी।
नियमों और सच्ची श्रद्धा के साथ किया गया यह उपवास मां दुर्गा की कृपा दिलाता है और जीवन के कष्टों को दूर करता है।