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राम मंदिर दान और जेवरात चोरी मामले पर अरविंद केजरीवाल ने चंपत राय और भाजपा सरकार को घेरा। पूछा, क्या किसी बड़े चेहरे को बचाने के लिए चंपत राय को पद पर रखा गया है?
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान में हुई कथित धांधली और चोरी के मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार पर जोरदार हमला बोला है। केजरीवाल ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर लग रहे आरोपों के बावजूद उन्हें उनके पद से अब तक क्यों नहीं हटाया गया है।
“क्या सबूत मिटाने का दिया जा रहा है समय?”
चंपत राय को कौन बचा रहा है? या फिर चंपत राय को बचाकर कोई ‘बड़ा चेहरा’ खुद को बचा रहा है?#RamMandirMeinChori pic.twitter.com/qGx7C4tvp6
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 23, 2026
अरविंद केजरीवाल केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि राम मंदिर से अरबों रुपये के दान और कीमती जेवरात चोरी हुए हैं। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि चंपत राय के पास पूरी व्यवस्था है और वे मंदिर का प्रबंधन संभाल रहे हैं, फिर इतनी बड़ी चोरी के बावजूद उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? केजरीवाल ने आशंका जताई कि क्या उन्हें सारे सबूत नष्ट करने का समय दिया जा रहा है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या गवाहों को डराने-धमकाने की छूट दी गई है, ताकि इस पूरे मामले को दबाया जा सके?
“क्या ‘बड़े चेहरों’ के बेनकाब होने का डर है?”
इस मामले में किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करते हुएअरविंद केजरीवाल ने एक तीखा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने पूछा कि आखिर चंपत राय को कौन बचा रहा है? उन्होंने संदेह जताते हुए कहा कि क्या भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि यदि चंपत राय का मुंह खुला, तो कई ‘बड़े चेहरे’ बेनकाब हो जाएंगे? उन्होंने कहा कि यह संरक्षण साबित करता है कि मामले की गहराई बहुत अधिक है।
विपक्ष का रुख और SIT की जांच पर सवाल
राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आम आदमी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता, विशेषकर संजय सिंह, पहले भी जमीन खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं। अब मंदिर में चोरी की खबरों ने राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ा दिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि महज दिखावा। इस बीच, यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। फिलहाल, जनता और राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर कोई इस बात का जवाब मांग रहा है कि मंदिर की सुरक्षा और दान की पवित्रता के साथ हुए इस कथित खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन है।