रोहिणी कोर्ट द्वारा दिल्ली पुलिस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना। पूछा- दिल्ली में जवाबदेही कब तय होगी?
“बीजेपी की इस चार-इंजन सरकार (Four-Engine Government) के तहत आज दिल्ली की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। रोहिणी कोर्ट ने जिस तरह एक मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, वह बेहद चिंताजनक है। जब देश की अदालतों को पुलिस की जांच में दखल देना पड़े, तो यह साफ दिखाता है कि अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है और न्याय प्रणाली के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।”
कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी निगरानी व्यवस्था सीधे तौर पर कटघरे में आ गई है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर से सीधा सवाल: जवाबदेही किसकी?
भाजपा की चार इंजन की सरकार में दिल्ली की कानून व्यवस्था का हाल देखिए।
रोहिणी कोर्ट ने एक मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर (CP) साहब, आखिर ऐसी लापरवाही के लिए जवाबदेह कौन… pic.twitter.com/uSnYYx0Wep
— MLA Kuldeep Kumar (@KuldeepKumarAAP) July 10, 2026
रोहिणी कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर (CP) से सीधे सवाल पूछे हैं। पार्टी ने मांग की है कि इस तरह की घोर लापरवाही के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?
न्यायालय के हस्तक्षेप ने यह साबित कर दिया है कि दिल्ली में न तो कानून-व्यवस्था सुरक्षित हाथों में है और न ही जांच का तंत्र निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है। जब पुलिस ही गंभीर अपराधों को हल्के में लेने लगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी?
क्या ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा मामला?
दिल्ली की जनता अब यह जानना चाहती है कि कोर्ट के आदेश के बाद क्या वाकई दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त और ठोस कार्रवाई की जाएगी, या फिर हर बार की तरह इस संवेदनशील मामले को भी ठंडे बस्ते (Cold Storage) में डाल दिया जाएगा?
आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के नागरिकों की सुरक्षा और न्याय के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में तुरंत जवाबदेही तय होनी चाहिए, क्योंकि हम सभी जानते हैं कि “न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है” (Justice delayed is justice denied)। दिल्ली की जनता इस मामले में आर-पार की कार्रवाई चाहती है।