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चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों का एक सप्ताह का धरना तीसरे दिन भी जारी है। किसान MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, फसल बीमा और पानी समझौतों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
पंजाब के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले शुरू किए गए एक सप्ताह के धरने के तीसरे दिन गुरुवार को भी चंडीगढ़ बॉर्डर पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ बॉर्डर पर पहुंचे हैं। किसानों का यह धरना 1 सितंबर से 7 सितंबर तक चलने वाला है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब या बयान नहीं आया है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
32 किसान संगठनों का गठबंधन, आंदोलन तेज करने का फैसला
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के वरिष्ठ नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि 32 किसान संगठनों के गठबंधन ने किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन को तेज करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने उठा रहे हैं। इसके लिए राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एसडीएम और जिला अधिकारियों को कई बार ज्ञापन भी सौंपे गए हैं। इसके बावजूद किसानों का आरोप है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
लखोवाल के मुताबिक, किसान संगठनों ने पिछले कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से ज्ञापन देने और अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद जब मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
MSP पर कानूनी गारंटी की प्रमुख मांग
किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में 22 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP के लिए कानूनी गारंटी शामिल है। हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार 22 फसलों के लिए MSP तय करती है, लेकिन किसानों की मांग है कि MSP को कानूनी अधिकार दिया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए निर्धारित न्यूनतम कीमत की गारंटी मिल सके।
किसान नेताओं का कहना है कि फसलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजार की परिस्थितियों के कारण किसानों को कई बार उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में MSP की कानूनी गारंटी को किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। किसान संगठन इस मांग को लंबे समय से प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
फसल बीमा योजना को लेकर भी नाराजगी
किसानों ने मौजूदा फसल बीमा व्यवस्था में सुधार की मांग भी उठाई है। किसान नेताओं का कहना है कि किसानों को ऐसी फसल बीमा योजना की जरूरत है, जो प्राकृतिक आपदा, खराब मौसम और फसल नुकसान की स्थिति में उन्हें प्रभावी आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सके।
लखोवाल ने कहा कि किसान एक ऐसी फसल बीमा योजना चाहते हैं, जो वास्तविक परिस्थितियों में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो। उनका कहना है कि फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा मिलना जरूरी है, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।
किसानों की कर्ज माफी की मांग
किसान संगठनों ने कर्ज माफी को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है। हरिंदर सिंह लखोवाल ने सवाल उठाया कि अगर बड़े कॉरपोरेट कर्ज माफ किए जा सकते हैं तो किसानों के कर्ज को लेकर भी सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
किसान संगठनों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत, फसल नुकसान और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई किसान कर्ज के दबाव में हैं। ऐसे में किसानों के लिए व्यापक कर्ज राहत या कर्ज माफी की नीति जरूरी है। संगठनों ने सरकार से इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
पानी के पुराने समझौतों को रद्द करने की मांग
पंजाब के किसानों ने राज्य से जुड़े जल समझौतों को लेकर भी अपनी मांग दोहराई है। लखोवाल ने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर पुराने पानी समझौतों को रद्द करने की मांग उठाई जानी चाहिए।
किसान नेता ने कहा कि इन समझौतों को हुए कई दशक बीत चुके हैं और अब पंजाब के जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर विधानसभा में स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
प्रस्तावित FTA के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
किसान संगठनों ने प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर भी विरोध का संकेत दिया है। हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि किसान यूनियन इस समझौते के खिलाफ देशभर में आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न स्थानों पर पहले से ही इस मुद्दे को लेकर विरोध की गतिविधियां चल रही हैं।
किसान संगठनों की चिंता है कि व्यापार समझौतों का कृषि क्षेत्र और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन इस मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर किसानों को लामबंद करने की तैयारी में हैं।
7 सितंबर तक जारी रहेगा धरना
चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों का मौजूदा धरना 1 सितंबर से शुरू हुआ है और 7 सितंबर तक चलने की घोषणा की गई है। तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी से आंदोलन जारी रहा। प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और सरकार से बातचीत तथा समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
फिलहाल किसानों और सरकार के बीच इन मांगों को लेकर किसी ठोस समाधान की घोषणा सामने नहीं आई है। किसान संगठनों ने संकेत दिया है कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। चंडीगढ़ बॉर्डर पर चल रहे इस धरने के जरिए किसान MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, प्रभावी फसल बीमा, पानी के मुद्दे और प्रस्तावित FTA समेत कई मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।