Table of Contents
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल सुरक्षा को भारत और दुनिया के भविष्य के लिए अहम बताते हुए AI, डेटा, जनभागीदारी, जल संरक्षण और ट्रीटेड वाटर के इस्तेमाल पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत समेत पूरी दुनिया के भविष्य के लिए जल सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए जल संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए नई सोच, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जल प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पानी से जुड़ी चुनौतियां आने वाले समय में और गंभीर हो सकती हैं, इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से प्रभावी योजना और ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन में जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा का भी उल्लेख किया और कहा कि सम्मेलन से सामने आए सुझावों को जमीन पर लागू करने के साथ उनकी नियमित समीक्षा भी होनी चाहिए।
जल प्रबंधन में AI और डेटा के इस्तेमाल पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संसाधनों की बेहतर समझ, योजना और प्रभावी प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डेटा के व्यापक इस्तेमाल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जल क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को एक जगह एकत्रित कर व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित, विश्लेषित और उपयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए डेटा संग्रह और विश्लेषण में एक समान प्रारूप अपनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, आधुनिक तकनीक और बेहतर डेटा के माध्यम से जल संसाधनों का अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है। इससे पानी की कमी, बढ़ती मांग और अन्य संभावित चुनौतियों के लिए पहले से बेहतर रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
पानी की हर बूंद के बेहतर इस्तेमाल पर फोकस
पीएम मोदी ने जल संरक्षण के साथ-साथ पानी के कुशल इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ऐसी तकनीकों और व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई, जिनसे पानी की प्रत्येक बूंद का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। प्रधानमंत्री ने जल दक्ष तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाने और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सफल रहे मॉडलों से सीखने की बात कही। उन्होंने आधुनिक जल प्रबंधन समाधानों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव भी दिया, ताकि भारतीय निर्माता और अन्य संबंधित पक्ष पानी बचाने वाली नई तकनीक विकसित करने और उन्हें व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में काम कर सकें।
बढ़ते शहरीकरण के बीच नगर निकायों की तैयारी जरूरी
प्रधानमंत्री ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पानी की बढ़ती मांग को लेकर भी भविष्य की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के साथ जल संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। ऐसे में शहरी स्थानीय निकायों को आने वाली जरूरतों के लिए अभी से तैयार करना आवश्यक है। पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि शहरी निकायों के लिए भी चिंतन शिविर आयोजित किए जाएं, जहां जल प्रबंधन की भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा कर ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सके। इससे शहरों में पानी की उपलब्धता, संरक्षण और पुन: उपयोग से जुड़े मुद्दों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।
‘जल उत्सव’ के जरिए जनभागीदारी बढ़ाने की अपील
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी मानने के बजाय इसमें आम नागरिकों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। उन्होंने ‘जल उत्सव’ जैसी पहलों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए गांवों और शहरों में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को पानी बचाने, जल स्रोतों के संरक्षण और जल के जिम्मेदार इस्तेमाल के प्रति प्रेरित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जलाशयों की डी-सिल्टिंग और बांध सुरक्षा पर ध्यान
पीएम मोदी ने जलाशयों और अन्य जल संरचनाओं से गाद निकालने यानी डी-सिल्टिंग के काम को नियमित प्रक्रिया बनाने का सुझाव दिया। इसके लिए स्पष्ट मानदंड और मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने बांधों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर मानसून से पहले बांधों की सुरक्षा से जुड़ी तैयारियों को पूरा करना, निर्धारित सावधानियों का पालन करना और संबंधित लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने स्कूलों के विद्यार्थियों को भी बांध सुरक्षा और जल प्रबंधन के बारे में जागरूक करने तथा इन विषयों को उपयुक्त तरीके से शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया।
विश्वविद्यालयों में जल प्रबंधन की शिक्षा को मिले बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और जल शासन से संबंधित ज्ञान एवं क्षमता को मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने विभिन्न राज्यों के बीच अध्ययन दौरों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। इन दौरों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों को शामिल किया जा सकता है, ताकि वे अलग-अलग राज्यों में लागू सफल जल प्रबंधन योजनाओं को समझ सकें। इसके बाद सफल मॉडलों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
कृषि और उद्योग में उपचारित जल के इस्तेमाल पर जोर
पानी की कमी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने पहले से तैयारी वाली समेकित योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने उपचारित जल यानी ट्रीटेड वाटर के कृषि और औद्योगिक कार्यों में उपयुक्त इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि जल संकट पैदा होने का इंतजार करने के बजाय भविष्य में पानी की मांग और उपलब्धता का आकलन कर समय रहते योजनाएं तैयार करनी चाहिए। इससे ताजे पानी के संसाधनों पर दबाव कम करने और उपलब्ध जल का अधिक प्रभावी उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
गुजरात के अनुभव का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि पानी की कमी जैसी चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है। इसके लिए व्यवस्थित योजना, दृढ़ संकल्प, पर्याप्त संसाधनों और सक्षम अधिकारियों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जल क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को केवल एक बार होने वाले कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शिखर सम्मेलन में सामने आए कार्रवाई योग्य और समयबद्ध सुझावों पर लगातार काम, समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।
दो दिवसीय जल शिखर सम्मेलन में राज्यों की भागीदारी
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत की जल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बुधवार को सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। सरकार के अनुसार, यह प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला का पहला सम्मेलन है। इसका उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना, सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना और जल सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर केंद्र एवं राज्यों की साझा जिम्मेदारी को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन की दो दिनों की विस्तृत चर्चा की सराहना करते हुए कहा कि इसमें सामने आए सुझावों को जमीन पर लागू करने के साथ उनकी नियमित समीक्षा और फॉलोअप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।