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हिंदुस्तान कॉपर में सरकार ने 6% तक हिस्सेदारी बेचने के लिए OFS शुरू किया। 514 रुपये के फ्लोर प्राइस के बीच शेयर 7.29% गिरकर 532.30 रुपये पर आया।
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड यानी HCL में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार की ओर से ऑफर फॉर सेल यानी OFS मंगलवार को शेयर बाजारों में खुला, जिसमें संस्थागत निवेशकों को कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने का मौका दिया गया। इस हिस्सेदारी बिक्री का असर हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया और मंगलवार के कारोबार में कंपनी के शेयर में तेज गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने OFS के लिए 514 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव की तुलना में काफी कम है। डिस्काउंट पर हिस्सेदारी बिक्री की खबर सामने आने के बाद निवेशकों के बीच बिकवाली बढ़ी और शेयर में दबाव देखने को मिला।
सरकार बेच रही है हिंदुस्तान कॉपर में 6% तक हिस्सेदारी
दो दिन चलने वाले इस OFS के तहत केंद्र सरकार हिंदुस्तान कॉपर के 5.80 करोड़ से अधिक शेयर बेचने की पेशकश कर रही है। यह कंपनी में सरकार की कुल हिस्सेदारी का 6 फीसदी तक हिस्सा है। इसमें 3 फीसदी की शुरुआती हिस्सेदारी बिक्री शामिल है, जबकि अतिरिक्त 3 फीसदी हिस्सेदारी ग्रीन शू विकल्प के तहत बेची जा सकती है। अगर ऑफर को निवेशकों की ओर से उम्मीद से ज्यादा प्रतिक्रिया मिलती है, तो सरकार अतिरिक्त शेयर बेचने का विकल्प इस्तेमाल कर सकती है।
सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के लिए प्रति शेयर 514 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया है। फ्लोर प्राइस वह न्यूनतम कीमत होती है जिस पर OFS के तहत शेयरों के लिए बोली लगाई जा सकती है। बाजार भाव की तुलना में यह कीमत कम होने के कारण निवेशकों को शेयर खरीदने में आकर्षक अवसर दिखाई दे सकता है, लेकिन दूसरी तरफ इससे बाजार में शेयर की कीमत पर दबाव भी बन सकता है।
OFS की खबर से हिंदुस्तान कॉपर के शेयर में गिरावट
हिस्सेदारी बिक्री शुरू होने के साथ ही हिंदुस्तान कॉपर के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली। मंगलवार के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 532.30 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 41.85 रुपये यानी 7.29 फीसदी की गिरावट थी। शेयर में इस तेज गिरावट से पता चलता है कि निवेशकों ने सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर तत्काल बिकवाली का रुख अपनाया।
OFS के दौरान फ्लोर प्राइस और बाजार भाव के बीच अंतर होने पर बाजार में शेयर की कीमत पर असर पड़ना सामान्य बात है। निवेशक अक्सर OFS में कम कीमत पर उपलब्ध शेयरों को ध्यान में रखते हुए बाजार में मौजूदा शेयरों की कीमत को लेकर भी अपना रुख बदलते हैं। हिंदुस्तान कॉपर के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली।
रिटेल निवेशकों के लिए भी रखा गया हिस्सा
सरकार ने OFS में केवल संस्थागत निवेशकों को ही नहीं, बल्कि खुदरा निवेशकों के लिए भी हिस्सा आरक्षित किया है। DIPAM सचिव की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, ऑफर का 10 फीसदी हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर अलग से आरक्षित किए गए हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए हिस्सा आरक्षित किए जाने से छोटे निवेशकों को भी हिंदुस्तान कॉपर में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री के दौरान शेयर खरीदने का अवसर मिलेगा। हालांकि, निवेशकों को केवल डिस्काउंट देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार, शेयर के मूल्यांकन और बाजार की परिस्थितियों का भी ध्यान रखना जरूरी होगा।
क्या होता है ऑफर फॉर सेल?
ऑफर फॉर सेल यानी OFS एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए मौजूदा शेयरधारक, खासकर प्रमोटर या सरकार, शेयर बाजार के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं। इस प्रक्रिया में नए शेयर जारी नहीं किए जाते, बल्कि मौजूदा शेयरों की बिक्री होती है। सरकारी कंपनियों में OFS का इस्तेमाल अक्सर सरकार की हिस्सेदारी घटाने और विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए किया जाता है।
हिंदुस्तान कॉपर में भी केंद्र सरकार इसी प्रक्रिया के जरिए अपनी हिस्सेदारी कम करने जा रही है। सरकार पहले 3 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त 3 फीसदी ग्रीन शू विकल्प के जरिए बिक्री की जा सकती है। इस तरह कुल बिक्री 6 फीसदी तक पहुंच सकती है।
तांबा कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण कंपनी है HCL
हिंदुस्तान कॉपर देश की प्रमुख सरकारी तांबा उत्पादक कंपनियों में शामिल है। तांबा इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण जैसे कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण धातु है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बदलाव और इलेक्ट्रिफिकेशन बढ़ने के साथ तांबे की मांग को लेकर भी लंबे समय से सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं।
हालांकि, कंपनी के शेयर में निवेश करने वालों के लिए कम अवधि में OFS से जुड़ा दबाव महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकार की ओर से बड़ी संख्या में शेयर बाजार में उपलब्ध होने के कारण मांग और आपूर्ति का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि मंगलवार को शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों की नजर OFS की प्रतिक्रिया पर
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार के OFS को संस्थागत और खुदरा निवेशकों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है। अगर ऑफर को मजबूत मांग मिलती है और बड़ी संख्या में शेयरों के लिए बोली आती है, तो सरकार ग्रीन शू विकल्प का इस्तेमाल कर सकती है। दूसरी ओर, कमजोर मांग की स्थिति में हिस्सेदारी बिक्री का अंतिम आकार अलग हो सकता है।
कुल मिलाकर, हिंदुस्तान कॉपर में सरकार की 6 फीसदी तक हिस्सेदारी बिक्री ने कंपनी के शेयर पर तत्काल दबाव बनाया है। 514 रुपये का फ्लोर प्राइस बाजार भाव से नीचे होने के कारण OFS निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, लेकिन शेयर की कीमत में तेज गिरावट यह भी दिखाती है कि बाजार इस घटनाक्रम को गंभीरता से ले रहा है। अब OFS की बोली प्रक्रिया और उसके बाद शेयर की कीमत में होने वाली गतिविधियां निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत रहेंगी।