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Gift Nifty में 0.51 प्रतिशत की गिरावट से शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिले। कच्चे तेल की तेजी और भू-राजनीतिक तनाव से बाजार पर दबाव बढ़ा।
शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार पर दबाव के साथ शुरू होने की उम्मीद है। Gift Nifty में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स की कमजोर शुरुआत की आशंका बढ़ गई है। Gift Nifty सुबह 8:24 बजे 23,339.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 120.5 अंक, यानी 0.51% की कमी हुई। निवेशकों पर दबाव डाला गया है, क्योंकि वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने चिंता बढ़ा दी
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिलहाल भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी चिंता हैं। पिछले कारोबारी सत्र में लगभग 7.5% की बढ़त के बाद WTI क्रूड 103 से 104 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा था। साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। भारत, कच्चे तेल के एक बड़े आयातक देश, तेल की कीमतों में हुई इतनी तेजी से चिंतित है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश की आयात लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा महंगाई बढ़ने का खतरा भी है। ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी का निवेशकों की धारणा पर सीधा असर है।
भू-राजनीतिक तनाव ने खतरा बढ़ा दिया
Enrich Money के CEO Ponmudi R का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाल सकता है। भू-राजनीतिक खतरा भी बढ़ गया है, उन्होंने कहा। Red Sea और Strait of Hormuz में हुए घटनाक्रमों ने विश्वव्यापी शिपिंग रूट और ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता बढ़ा दी है।
इन घटनाओं से कच्चे तेल की कीमतों में जोखिम प्रीमियम बढ़ रहे हैं। नतीजतन, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में जारी रहेगा। निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव को देखते हुए इस क्षेत्र पर लगातार निगरानी रखते हैं।
साथ ही एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
फिलहाल, वैश्विक संकेत भी भारत के बाजार के लिए अच्छे नहीं हैं। शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजार तेजी से गिर गए। दक्षिण कोरिया का Kospi और जापान का Nikkei 225 दोनों में 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार में कमजोर संकेत ने भी निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया।
वैश्विक बाजारों में बिकवाली के दौरान भारतीय बाजार पर भी शुरुआती दबाव हो सकता है। घरेलू निवेशकों की धारणा विदेशी बाजारों में कमजोरी से प्रभावित हो सकती है। बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, खासकर जब कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।
अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर भी नज़र डालें
अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। अगस्त में अमेरिका की थोक महंगाई 0.4% बढ़ी। जुलाई में 4.8 प्रतिशत की उत्पादक मूल्य महंगाई अगस्त में 5.4 प्रतिशत हो गई। ऊर्जा खर्च में वृद्धि इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण थी।
अब निवेशकों का ध्यान अमेरिका के आगामी CPI (Consumer Price Index) आंकड़ों पर रहेगा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर इन आंकड़ों से आगे की दिशा का पता चल सकता है। 16 सितंबर को फेड की अगली नीति बैठक होगी। यही कारण है कि अमेरिकी महंगाई के आंकड़े वैश्विक बाजारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।
Nifty 50 के लिए 23,500–23,600 महत्वपूर्ण स्तर
Nifty 50 की स्थिति फिलहाल तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण लग रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि 23,500 से 23,600 तक का क्षेत्र निफ्टी को तत्काल प्रतिरोध दे सकता है। निफ्टी को इस स्तर के ऊपर स्थायी तेजी दर्ज करने में सफलता मिलने पर 23,800 तक रिकवरी की संभावना है।
उधर, निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जाता है। इंडेक्स इस स्तर से नीचे फिसल सकता है, जिससे गिरावट बढ़ सकती है और निफ्टी 23,050 से 23,000 के बीच के दायरे में जा सकता है। इसलिए शुक्रवार के कारोबार में निवेशकों की विशेष नजर इन स्तरों पर रहेगी।
ओवरसोल्ड RSI से राहत मिल सकती है
Ponmudi के अनुसार, निफ्टी के शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म तकनीकी ढांचे में फिलहाल मंदी है। RSI की काफी ओवरसोल्ड स्थिति में पहुंचने के कारण, निकट अवधि में राहत की तेजी की संभावना को पूरी तरह से अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
यद्यपि, केवल तकनीकी संकेतों पर निर्भर करके बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। बाजार में मजबूत रिकवरी के लिए निरंतर खरीदारी और महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तरों के ऊपर महत्वपूर्ण बढ़त आवश्यक होगी। हालाँकि, बढ़ते कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भारतीय बाजार को बड़ी चुनौती बना रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा निर्धारित करने वाले इन सभी संकेतकों पर नजर रखनी होगी।