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पंजाब के पानी के बकाये को लेकर मान सरकार ने राजस्थान और हरियाणा को पत्र भेजे हैं। मंत्री बरिंदर गोयल ने पड़ोसी राज्यों पर पंजाब के जल अधिकारों को लेकर सवाल उठाए।
पंजाब में पानी के अधिकार और बकाया राशि को लेकर भगवंत मान सरकार ने एक बार फिर पड़ोसी राज्यों के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थान से पंजाब के पानी के पुराने बकाये की वसूली के लिए सरकार की ओर से पत्र भेजा गया है। पंजाब सरकार लंबे समय से यह दावा करती रही है कि राजस्थान को दशकों से पंजाब से मिलने वाले पानी के एवज में निर्धारित भुगतान नहीं किया गया है। मार्च 2026 में पंजाब सरकार ने राजस्थान से करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का दावा किया था।
1960 के बाद भुगतान नहीं होने का दावा
मंत्री बरिंदर गोयल के अनुसार, पंजाब के पानी को लेकर पुराने समझौतों के तहत राजस्थान को पानी मिलता रहा, लेकिन भुगतान का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पंजाब सरकार का तर्क है कि 1920 के दशक के समझौते में पानी की आपूर्ति के बदले शुल्क का प्रावधान था। सरकार इसी ऐतिहासिक समझौते को आधार बनाकर राजस्थान से बकाया राशि की मांग कर रही है।
मार्च में पंजाब सरकार की ओर से राजस्थान को भेजे गए पत्र में करीब 66 वर्षों के पानी के उपयोग का हिसाब प्रस्तुत करते हुए 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग का उल्लेख किया गया था। पंजाब सरकार ने यह भी कहा था कि यदि राजस्थान बकाया राशि का भुगतान नहीं करता है तो पानी की आपूर्ति के मुद्दे पर आगे कठोर रुख अपनाया जा सकता है।
हरियाणा के बकाये को लेकर भी पत्र
बरिंदर गोयल ने कहा कि हरियाणा को लेकर भी पंजाब सरकार ने बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया है। उनके मुताबिक, हरियाणा की ओर से वर्ष 2015-16 के बाद के बकाये को लेकर पत्र जारी किया गया है। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के जल संसाधनों के इस्तेमाल और उससे जुड़े वित्तीय दायित्वों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
पानी के बंटवारे को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद नया नहीं है। अप्रैल 2025 में हरियाणा ने पंजाब से पेयजल के लिए अतिरिक्त पानी की मांग की थी और पंजाब विधानसभा में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
‘बाढ़ का नुकसान पंजाब झेले, पानी पर अधिकार पड़ोसी राज्यों का’
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦੇ ਬਣਦੇ ਪੈਸਿਆਂ ਦੀ ਅਦਾਇਗੀ ਲਈ ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਭੇਜੀਆਂ ਚਿੱਠੀਆਂ!
ਕੈਬਿਨੇਟ ਮੰਤਰੀ @barinder_goyal ਨੇ ਦਿੱਤੀ ਇਹਨਾਂ ਚਿੱਠੀਆਂ ਨਾਲ਼ ਸੰਬੰਧਿਤ ਜਾਣਕਾਰੀ
🔸 1961 ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰਿਵਾਇਤੀ ਸਰਕਾਰਾਂ ਦੀ ਨਲਾਇਕੀ ਜਾਂ ਮਿਲੀਭੁਗਤ ਨਾਲ਼ ਰਾਜਸਥਾਨ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਬੰਦ ਕੀਤੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਾਣੀਆਂ ਦੇ ਪੈਸੇ ਦੀ ਅਦਾਇਗੀ
🔸 ਮਾਨ… pic.twitter.com/X0MUuyucZw— AAP Punjab (@AAPPunjab) August 13, 2026
बरिंदर गोयल ने पंजाब के प्रति पड़ोसी राज्यों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पंजाब में बाढ़ आती है तो उसके नुकसान का बड़ा हिस्सा राज्य को खुद उठाना पड़ता है, लेकिन पानी की बात आने पर पड़ोसी राज्य पंजाब के जल संसाधनों पर अपना अधिकार जताते हैं।
पंजाब में हर साल मानसून के दौरान घग्गर, सतलुज और अन्य नदियों के उफान से बाढ़ का खतरा पैदा होता है। हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने बाढ़ सुरक्षा के लिए तटबंधों और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। अगस्त 2026 में भी जल संसाधन मंत्री ने बीस और सतलुज के संवेदनशील हिस्सों में बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की जानकारी दी।
पानी के मुद्दे पर पंजाब का रुख सख्त
पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य में पानी की उपलब्धता लगातार गंभीर मुद्दा बन रही है और भविष्य में पंजाब के जल संसाधनों का इस्तेमाल स्पष्ट नियमों और अधिकारों के आधार पर होना चाहिए। सरकार पहले भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है और राज्य के हिस्से के पानी को लेकर किसी भी फैसले में पंजाब के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, हरियाणा और राजस्थान भी अपने-अपने हिस्से के पानी को लेकर अलग दावे रखते हैं। जून 2026 में हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ था, जिसमें दोनों राज्यों के जल संबंधी मुद्दों को सहयोग के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया।
सरकार की नजर अब बकाया वसूली पर
पंजाब सरकार के ताजा रुख से साफ है कि पानी के इस्तेमाल से जुड़े पुराने वित्तीय दावों को अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय आधिकारिक पत्राचार और दस्तावेजों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। राजस्थान से बकाया राशि की मांग के बाद अब हरियाणा को लेकर भी पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है।
मंत्री बरिंदर गोयल का संदेश स्पष्ट है कि पंजाब अपने पानी और उससे जुड़े अधिकारों की अनदेखी नहीं करेगा। हालांकि, इन दावों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित समझौतों, जल बंटवारे के प्रावधानों और सक्षम संस्थाओं के फैसलों पर निर्भर करेगी। पंजाब सरकार फिलहाल पड़ोसी राज्यों से पुराने बकाये की वसूली के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।