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पेपर लीक मामलों में पीएम मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के ऐलान पर अरविंद केजरीवाल ने जोरदार हमला बोला है। केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए इसे दिशाहीन बयान करार दिया।
नीट (NEET) और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर देशभर में छात्रों के जारी उग्र प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) बनाने के ऐलान पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी के इस फैसले पर तीखा हमला बोला है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए प्रधानमंत्री के फैसले की आलोचना की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को फिर से दोहराया।
“धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ?” — अरविंद केजरीवाल
आज सुबह प्रधान मंत्री जी ने ऐलान किया है – पेपर लीक मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाएँगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ?
प्रधान मंत्री का ये स्टेटमेंट एक हारे हुए दिशाहीन लेकिन अहंकारी व्यक्ति का लगता है। https://t.co/CyD86h4XDf pic.twitter.com/12IfNNiiBm
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 23, 2026
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री के ट्वीट पर सवाल उठाए:
“आज सुबह प्रधानमंत्री जी ने ऐलान किया है — पेपर लीक मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँगे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ? प्रधानमंत्री का यह स्टेटमेंट एक हारे हुए, दिशाहीन लेकिन अहंकारी व्यक्ति का लगता है।”
— अरविंद केजरीवाल (राष्ट्रीय संयोजक, AAP)
“छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं, जवाबदेही मांगी थी”
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश का युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। लेकिन सरकार मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए केवल लीपापोती करने की कोशिश कर रही है।
- मौजूदा फास्ट-ट्रैक अदालतों का हाल: केजरीवाल ने तर्क दिया कि देश में पोक्सो (POCSO) और दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों के लिए भी कई फास्ट-ट्रैक कोर्ट मौजूद हैं, जहाँ अक्सर सालों तक सुनवाई लटकी रहती है या आम अदालतों से भी अधिक समय लगता है। ऐसे में केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान करना छात्रों के साथ छलावा है।
- लाठीचार्ज पर चुप्पी: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए।
- भविष्य के लिए कोई ठोस योजना नहीं: उन्होंने कहा कि सरकार के पास हर साल होने वाले पेपर लीक को रोकने के लिए कोई दीर्घकालिक विज़न या ढांचागत सुधार (Systemic Reforms) का खाका नहीं है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर गरमाई राजनीति
उल्लेखनीय है कि देश में नीट-यूजी और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित धांधली के बाद छात्र संगठन और विपक्षी दल लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
केजरीवाल ने मांग की है कि सरकार छात्रों की जायज मांगों को सुने, घायल छात्रों के प्रति संवेदना दिखाए और सबसे पहले नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले।