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जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर अभिनेता इमरान खान का गुस्सा फूटा है। इमरान खान ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर छात्रों का समर्थन किया। शबाना आजमी, प्रकाश राज समेत कई सितारे भी छात्रों के साथ खड़े हुए।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को शिक्षा सुधारों और व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर आयोजित छात्र विरोध प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक भावुक और कड़ा पोस्ट शेयर करते हुए इमरान खान ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग और लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है।
उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने वाले इन छात्रों को जब सिस्टम ने धोखा दिया, तो वे केवल अपने हक और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। लेकिन प्रशासन ने उनकी बात सुनने के बजाय चुप्पी साधी और अंत में उन्हें पुलिस के डंडों और आंसू गैस के गोलों से खामोश करने की कोशिश की।
“मेरे अंदर कुछ टूट गया”: इमरान खान का वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट
इमरान खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के अत्याचार और गैस छोड़े जाने के दृश्यों ने उन्हें गहराई से झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए लिखा:
“आज मेरे अंदर कुछ टूट गया। यह देखते हुए कि कैसे पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस छोड़ी और उन्हें बेरहमी से पीटा… मैं इसका क्या मतलब निकालूं? ये वे छात्र हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत की, लेकिन व्यवस्था ने उन्हें नाकाम कर दिया। ये वे लोग हैं जिन्होंने सिर्फ सुने जाने की मांग की, लेकिन उन्हें सिर्फ खामोशी मिली। ये वे नागरिक हैं जो यह दिखाने के लिए खड़े हुए कि उनके लिए क्या मायने रखता है… और सत्ता (एस्टैब्लिशमेंट) ने उन्हें पीट-पीटकर बेदखल कर दिया।”
इमरान खान के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर भारी ध्यान आकर्षित किया है और यह तेजी से वायरल हो रहा है।
“क्या ये भारत मां की संतानें नहीं हैं?”: सत्ता और चाटुकारों पर सीधा हमला
अपने पोस्ट को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने व्यवस्था और प्रदर्शनकारी छात्रों पर सवाल उठाने वालों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हम अपने युवाओं के भविष्य की रक्षा नहीं कर सकते, तो फिर देश का विकास किसके लिए किया जा रहा है?
इमरान खान ने आगे लिखा:
“क्या ये भारत मां के बच्चे नहीं हैं? अगर ये नहीं, तो हम किसके लिए निर्माण कर रहे हैं और हम किसके भविष्य की रक्षा करने का दावा करते हैं? जो लोग शिक्षा सुधारों का विरोध कर रहे छात्रों से ‘संगठन’ और अनुशासन की मांग करते हैं, लेकिन स्थापित प्राधिकारियों पर जवाबदेही के ऐसे उच्च मानक लागू नहीं करते; वे सभी चाटुकार (Bootlickers) हैं।”
उन्होंने अपने संदेश का अंत छात्रों के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए किया और चेतावनी दी कि यदि आज हम उन युवाओं की आवाज नहीं सुनेंगे जिनका भविष्य दांव पर लगा है, तो हम अपने आने वाले कल को पूरी तरह खो देंगे।
बॉलीवुड में छात्रों के समर्थन में सबसे आगे रहे इमरान खान
इमरान खान फिल्म उद्योग के उन शुरुआती अभिनेताओं में से एक हैं जिन्होंने इस छात्र आंदोलन का खुले तौर पर और सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है। वे लगातार अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए इस मुद्दे पर अपनी राय बेबाकी से रख रहे हैं।
हाल ही में, जब सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी, तब भी इमरान खान ने उनका समर्थन किया था। उन्होंने ‘#ChaloSansad’ टैग के साथ सोनम वांगचुक के रुख की सराहना की थी और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिकों से आगे आने की अपील की थी।
बॉलीवुड और नागरिक समाज का मिला भारी समर्थन
जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन और छात्रों की मांगों को केवल इमरान खान ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और नागरिक समाज की कई अन्य नामचीन हस्तियों का भी समर्थन मिला है।
सोनम वांगचुक और CJP आंदोलन को समर्थन: ज़ीनत अमान, अनुराग कश्यप, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अभय देओल और ओमी वैद्य जैसी प्रमुख हस्तियों ने सोनम वांगचुक और ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है।
दिल्ली पहुँचे सितारे: शबाना आजमी, प्रकाश राज, अमोल पराशर और पूनम पांडे जैसे कलाकार खुद दिल्ली पहुँचे और छात्रों के साथ मार्च में शामिल होकर उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए।
शिक्षा सुधार और जवाबदेही की बढ़ती मांग
जंतर-मंतर पर घटी इस घटना और उस पर आई प्रतिक्रियाओं ने देश में शिक्षा प्रणाली, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार पर एक नई बहस छेड़ दी है। मनोरंजन जगत के दिग्गजों और कलाकारों का इस तरह सड़कों पर उतरना और खुलकर बोलना यह दर्शाता है कि छात्रों का यह मुद्दा अब केवल परीक्षा या संस्थान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक बड़ा आंदोलन बन चुका है।