क्या वर्क फ्रॉम होम से मानसिक स्वास्थ्य खराब हो रहा है? ‘साइंस’ पत्रिका की नई स्टडी में रिमोट वर्क के छिपे हुए नुकसानों का खुलासा।
महामारी के बाद से कार्य संस्कृति बहुत बदल गई है। कम्पनियों और कर्मचारियों के बीच लंबी बहस चल रही है कि क्या अधिकांश कर्मचारी रिमोट वर्क या ‘डिजिटल नोमैड’ (digital nomad) बनना चाहते हैं। 4-दिवसीय कार्य सप्ताह भी कुछ व्यवसायों ने अपनाया है। इसके विपरीत, कई नियोक्ता कर्मचारियों को वापस कार्यालय बुला रहे हैं। उनका मानना है कि ऑफिस में काम करने से उत्पादकता (productivity) बढ़ती है, टीम सहयोग मजबूत होता है, करियर का विकास तेज होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात, पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं बनी रहती हैं।
अध्ययन में चौंकाने वाले निष्कर्ष
4 जून को ‘साइंस’ (Science) पत्रिका में प्रकाशित एक नवीनतम अध्ययन ने वर्क फ्रॉम होम के अब तक छिपे हुए नकारात्मक पक्षों को उजागर किया है। लंबे समय तक घर से काम करने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और अकेलेपन (isolation) की भावना बढ़ सकती है, एक अध्ययन के अनुसार। यह अध्ययन उन छिपी हुई कीमतों (hidden costs) को दिखाता है जो एक कर्मचारी को घर से काम करने के लिए भुगतान करना पड़ सकता है। इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 2011 से 2024 के बीच (कोविड के पीक वर्षों 2020–2021 को छोड़कर) आधे मिलियन से अधिक अमेरिकी कर्मचारियों के डेटा का विश्लेषण किया।
शोध क्षेत्र और प्रक्रिया
स्मिथसोनियन की रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पांच बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से डेटा प्राप्त किया। उन्होंने रिमोट संभव कामों (जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और मार्केटिंग) और असंभव कामों (जैसे सर्जरी या मैकेनिकल इंजीनियरिंग) को भी शामिल किया। इस विस्तृत अध्ययन का लक्ष्य था पता लगाना कि घर से काम करने का प्रभाव सिर्फ सुविधा तक सीमित है या मानव कल्याण (well-being) पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
रिमोट कार्य के लाभ: वर्जीनिया विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्री एम्मा हैरिंगटन, एक संतुलित नजरिया अध्ययन की सह-लेखिका, “हमारे परिणाम यह नहीं कह रहे हैं कि रिमोट वर्क के कोई लाभ नहीं हैं।”वास्तव में, घर से काम करने वाले लोग इसके फायदे बेहतर समझते हैं। घर से काम करने से न केवल यात्रा का समय और पैसा बचता है, बल्कि खाना भी बचता है। कर्मचारी अधिक स्वस्थ महसूस करते हैं जब वे अपने फिटनेस लक्ष्यों के लिए समय निकाल सकते हैं। कर्मचारियों को परिवार के साथ अधिक समय बिताना भी खुश करता है। रिमोट वर्क कार्यस्थलों को शारीरिक अक्षमता या दिव्यांगता वाले लोगों के लिए अधिक उपलब्ध बनाता है।
मानसिक स्वास्थ्य और विलगता
‘मानसिक स्वास्थ्य’ और ‘सामाजिक अलगाव’ अध्ययन का मुख्य मुद्दा हैं। लंबे समय तक कार्यस्थल पर सीधे नहीं मिलने से कर्मचारी अनौपचारिक बातचीत और सामाजिक जुड़ाव से वंचित रह जाते हैं। यह अलगाव व्यक्ति को अवसाद और तनाव की ओर धकेल सकता है। यह घर से काम करने की सुविधा है, लेकिन यह मानवीय संबंधों को कमजोर कर सकता है जो ऑफिस संस्कृति में आम हैं।
भविष्य का रास्ता: हाइब्रिड मॉडल का महत्व: यह अध्ययन रिमोट वर्क को पूरी तरह से खारिज नहीं करता; इसके बजाय, यह एक “संतुलन” (balance) की आवश्यकता पर जोर देता है। भविष्य शायद ‘हाइब्रिड वर्क मॉडल’ में निहित है, जहाँ कर्मचारी घर से कुछ दिन और ऑफिस से कुछ दिन काम करें। इससे न केवल लचीलापन होगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और टीम सहयोग में स्वस्थ सामंजस्य भी होगा।
काम फ्रॉम होम और काम ऑफिस दोनों के अपने लाभ हैं। घर से काम करना समय बचाता है और लचीलापन देता है, लेकिन ऑफिस वर्क मानसिक स्पष्टता और सामाजिक जुड़ाव देता है। यह अध्ययन, विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित, हमें याद दिलाता है कि काम सिर्फ कार्यक्षमता का नाम नहीं है; यह एक सामाजिक अनुभव भी है। अब नियोक्ताओं और कर्मचारियों को उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली नीतियों पर विचार करना चाहिए। भविष्य में सफलता उसी मॉडल से मिलेगी जो न केवल काम के परिणामों को ध्यान में रखता है, बल्कि काम करने वाले ‘इंसान’ की भलाई पर भी ध्यान देता है।