मानसून में आँखों का रखें विशेष ख्याल: 5 प्रमुख संक्रमण और उनसे बचाव के आसान उपाय

मानसून में आँखों का रखें विशेष ख्याल: 5 प्रमुख संक्रमण और उनसे बचाव के आसान उपाय

 

मानसून में आँखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जानिए कंजंक्टिवाइटिस, स्टाई और केराटाइटिस के लक्षण और बताए गए बचाव के 5 टिप्स।

मानसून का आगमन चिलचिलाती गर्मी से तो राहत दिलाता है, लेकिन यह मौसम अपने साथ कई तरह के संक्रमण भी लेकर आता है। अधिक नमी, उमस, प्रदूषित हवा, धूल और दूषित वर्षा का पानी कीटाणुओं के पनपने के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करते हैं। डॉ. आर.के. सचदेव (सीनियर मोतियाबिंद और रिफ्रैक्टिव सर्जन, मैक्सिविजन आई हॉस्पिटल) के अनुसार, हमारी कुछ छोटी-छोटी आदतें—जैसे आँखों को रगड़ना, दूसरों के तौलिये का उपयोग करना, गंदे कॉन्टैक्ट लेंस पहनना या बिना सुरक्षा के बाहर निकलना—संक्रमण के खतरे को और बढ़ा देती हैं। आइए जानते हैं मानसून में होने वाले 5 प्रमुख नेत्र संक्रमण और उनसे बचने के तरीके:

1. कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis/पिंक आई)

मानसून के दौरान यह सबसे आम संक्रमण है। इसमें आँखें लाल हो जाती हैं, उनमें पानी आता है, खुजली और सूजन होती है, और अक्सर आँखों से चिपचिपा स्राव (sticky discharge) निकलता है। यह वायरल, बैक्टीरियल या एलर्जी के कारण हो सकता है। संक्रामक कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलता है, खासकर घरों, स्कूलों और कार्यालयों में। बचाव के लिए हमेशा अपना तौलिया अलग रखें, स्वच्छता का पालन करें और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से परामर्श लें ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले।

2. स्टाई (Stye – आँख की फुंसी)

स्टाई पलक पर होने वाली एक छोटी, दर्दनाक लाल फुंसी है, जो आमतौर पर बरौनियों (eyelashes) के पास होती है। मानसून में पसीना, धूल और प्रदूषण के कारण पलकों के पास की ग्रंथियां ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे स्टाई होने की संभावना बढ़ जाती है। इसे रोकने का सबसे आसान तरीका पलकों को साफ रखना है। यदि स्टाई हो जाए, तो दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए गर्म सिकाई (warm compress) करें। डॉक्टर सलाह देते हैं कि स्टाई को कभी भी फोड़ें या दबाएं नहीं, क्योंकि इससे संक्रमण और भी गंभीर हो सकता है।

3. केराटाइटिस (Keratitis)

यह कॉर्निया (आँख की अगली पारदर्शी सतह) का संक्रमण या सूजन है। यह साधारण लालिमा या खुजली से अधिक गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके लक्षणों में आँखों में दर्द, धुंधलापन, पानी आना, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता और ऐसा महसूस होना जैसे आँख में कुछ अटका हुआ है, शामिल हैं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को मानसून में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में यात्रा करते समय लेंस न पहनें। लेंस को कभी भी नल के पानी से न धोएं और लेंस केस को हमेशा साफ रखें।

4. फंगल आई इन्फेक्शन (Fungal Eye Infection)

हालांकि फंगल संक्रमण अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन इलाज न होने पर ये गंभीर हो सकते हैं। यह तब हो सकता है जब आँख में चोट लगे और उसमें दूषित पानी, कीचड़, धूल या पौधों के कण चले जाएं। इसके लक्षणों में लाली, दर्द, धुंधलापन और लगातार जलन शामिल है। इस स्थिति में सबसे बड़ी गलती ‘स्व-चिकित्सा’ (self-medication) करना है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप न डालें, खासकर स्टेरॉयड युक्त ड्रॉप्स, जो फंगल संक्रमण को बढ़ा सकती हैं।

5. ब्लेफेराइटिस (Blepharitis – पलकों की सूजन)

यह पलकों की सूजन की स्थिति है, जो विशेष रूप से बरौनियों के आधार के आसपास होती है। इसमें खुजली, जलन, लालिमा और ऐसा महसूस होना कि आँख में रेत (gritty sensation) है, शामिल है। मानसून की उमस, पसीना और पलकों के आसपास धूल-मिट्टी जमा होने से यह समस्या बढ़ जाती है। पलकों को नियमित रूप से विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए क्लीन्ज़र से साफ करना और गर्म सिकाई करना फायदेमंद होता है। यह तेल, कचरा और बैक्टीरिया को हटाने में मदद करता है।

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

मानसून में आँखों की सुरक्षा के लिए कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना जरूरी है:

  • हाथों की स्वच्छता: आँखों को छूने से पहले हमेशा हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • व्यक्तिगत सामान: तौलिया, रुमाल या आंखों का मेकअप कभी भी किसी के साथ साझा न करें।
  • सुरक्षा: बाहर निकलते समय सुरक्षात्मक चश्मे (protective glasses) पहनें ताकि धूल और वर्षा की बूंदें सीधे आँख में न जाएं।
  • लेंस का रखरखाव: यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो उनकी सफाई और भंडारण के नियमों का कड़ाई से पालन करें।
  • समय पर चिकित्सा: किसी भी असामान्य लक्षण या दृष्टि में बदलाव होने पर घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं।

मानसून का आनंद अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतना अनिवार्य है। आँखों की हल्की सी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें। यदि आपकी आँखें लंबे समय तक लाल रहें या उनमें तेज दर्द हो, तो बिना किसी देरी के नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। मानसून में स्वच्छता और जागरूकता ही आपकी आँखों की सुरक्षा की सबसे अच्छी गारंटी है।

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