IMD ने जारी किया मौसम का नया पूर्वानुमान। उत्तर-पश्चिम भारत में लू और मानसून की सक्रियता के बीच कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट।
भारत में इस समय मौसम का एक मिश्रित और चुनौतीपूर्ण दौर चल रहा है। एक तरफ जहाँ देश के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता ने राहत की उम्मीदें जगाई हैं, वहीं दूसरी तरफ लू और ओलावृष्टि जैसे विपरीत मौसमी घटनाक्रम भी सक्रिय हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर 13 जून तक बना रह सकता है, जिसके कारण देश के बड़े हिस्से में बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
मानसून की प्रगति और अनुकूल परिस्थितियाँ
देश भर में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, मानसून तमिलनाडु के बचे हुए क्षेत्रों को भी कवर कर लेगा। आने वाले कुछ दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी मानसून की पहली दस्तक हो सकती है। वर्तमान में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। मध्य भारत में बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने इस प्रक्रिया को और गति प्रदान की है।
बारिश का कहर: विभिन्न राज्यों में अलर्ट
देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो हिमालयी क्षेत्रों, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 12 से 20 सेंटीमीटर तक रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, दक्षिण कोंकण, अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा, केरल, लक्षद्वीप और तेलंगाना में भी भारी बारिश देखी गई है।
IMD ने कई राज्यों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में भारी बारिश और गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, तटीय कर्नाटक, गोवा और केरल में भी सतर्कता बरतने को कहा गया है। कर्नाटक, गोवा और केरल के तटीय इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जो जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
तापमान में उतार-चढ़ाव और लू का प्रभाव
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 24 घंटों तक तापमान में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन 11 से 13 जून के बीच पारा 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की उम्मीद है, जिससे भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, राहत का यह दौर अस्थायी हो सकता है, क्योंकि इसके बाद तापमान में फिर से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का पूर्वानुमान है। मध्य और पूर्वी भारत में भी 12 जून के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
दूसरी ओर, लू (Heatwave) का कहर अभी भी कम नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में लू की स्थिति बनी हुई है। इन क्षेत्रों में न केवल गर्मी का प्रकोप है, बल्कि ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। विशेष रूप से राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है, जिससे दृश्यता कम हो सकती है और यातायात बाधित हो सकता है।
जन-सावधानी और सुरक्षा उपाय
मौसम विभाग ने ओलावृष्टि, गरज के साथ बिजली गिरने और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए स्थानीय निवासियों को सचेत रहने की सलाह दी है। ऑरेंज अलर्ट वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। चूंकि तेज हवाओं और ओलावृष्टि से फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान होने का खतरा रहता है, इसलिए किसानों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
आने वाला समय देश के लिए मौसम की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहाँ कृषि कार्यों के लिए मानसून की वर्षा का इंतजार है, वहीं दूसरी ओर लू और चक्रवाती गतिविधियों से बचाव भी प्राथमिकता है। आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और अत्यधिक गर्मी या खराब मौसम के दौरान घरों के भीतर ही सुरक्षित रहें। मौसम की यह विविधता न केवल भारत की भौगोलिक स्थिति को दर्शाती है, बल्कि बदलते जलवायु चक्र के प्रति हमें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।