तृणमूल कांग्रेस में बड़ा सियासी घमासान: ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती, बागी विधायकों ने किया बड़ा दावा

तृणमूल कांग्रेस में बड़ा सियासी घमासान: ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती, बागी विधायकों ने किया बड़ा दावा

 

तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत तेज। 58 विधायकों ने अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष बनाया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को सौंपी सूची।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के भीतर हुए इस विद्रोह ने राज्य की सत्ता और संगठन की नींव को हिलाकर रख दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए पार्टी के बागी विधायकों ने अरूप रॉय को नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह नकारते हुए चुनाव आयोग को अपनी सूची सौंपकर अपनी स्थिति को स्पष्ट और मजबूत करने का प्रयास किया है। यह उठापटक न केवल टीएमसी के भविष्य के लिए बल्कि बंगाल की राजनीति के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

विद्रोह की चिंगारी और समानांतर गुट

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में कम से कम 58 टीएमसी विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। इस बागी गुट ने दावा किया कि उन्होंने एक विशेष सत्र आयोजित कर सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति (NWC) का गठन करने की भी घोषणा की, जिसमें फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास और रथिन घोष जैसे वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। बागी गुट के नेताओं ने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी छोड़कर ‘मार्गदर्शक’ (mentor) की भूमिका अपना लें। उन्होंने दावा किया कि वे जल्द ही जिला स्तर पर भी नई समितियां बनाएंगे।

ममता बनर्जी का पलटवार और आधिकारिक रुख

इस बगावती तेवर के जवाब में, ममता बनर्जी ने अपनी पकड़ मजबूत दिखाते हुए चुनाव आयोग को पार्टी पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की आधिकारिक सूची सौंपी है। 20 जून को जारी इस सूची में ममता बनर्जी को अध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया है। सूची में सुब्रत बख्शी को उपाध्यक्ष, अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव, और शुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बताया गया है। ममता बनर्जी की इस कार्रवाई से यह साफ है कि वे पार्टी के नियंत्रण को किसी भी स्थिति में छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

पार्टी के अनुशासनात्मक ढांचे का उपयोग करते हुए, ममता बनर्जी के खेमे ने बगावत में शामिल वरिष्ठ नेताओं—जिनमें फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान और रतिन घोष जैसे नाम शामिल हैं—को कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) जारी किया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में जानबूझकर शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यह स्पष्ट है कि टीएमसी अब दो स्पष्ट धड़ों में बंट गई है, जहां एक ओर ममता बनर्जी का आधिकारिक खेमा है, तो दूसरी ओर 58 विधायकों का बागी समूह।

नेतृत्व परिवर्तन का गणित और भविष्य की चुनौतियां

टीएमसी में यह बगावत तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब बागी विधायकों ने रिताब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय की जगह नियुक्त करने का समर्थन किया है। यह बगावत केवल संगठनात्मक स्तर पर नहीं, बल्कि विधायी स्तर पर भी दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस में विधायकों की कुल संख्या में से 58 विधायकों का बागी होना ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती है। यदि यह बगावत लंबी खिंचती है, तो इसका सीधा असर ममता सरकार की स्थिरता पर पड़ सकता है।

क्या है दांव पर?

इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘सत्ता का हस्तांतरण’ है। बागी गुट का यह तर्क कि “दीदी अब मार्गदर्शन करें,” सीधे तौर पर उनके नेतृत्व को सीमित करने का प्रयास है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह अपनी राजनीतिक विरासत और पार्टी पर अपनी पकड़ को बचाए रखने की लड़ाई है। टीएमसी, जो कभी ममता बनर्जी के एकल नेतृत्व का पर्याय मानी जाती थी, आज अपनी ही बनाई हुई जमीन पर डगमगाती दिख रही है।

आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका इस पूरे मामले में निर्णायक होगी। जिस गुट को आयोग मान्यता देगा, उसी के पास पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न रहेगा। इस राजनीतिक अस्थिरता का लाभ विपक्षी दल उठा सकते हैं, जिससे बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है। फिलहाल, टीएमसी का आंतरिक कलह अपने चरम पर है और यह स्पष्ट है कि बंगाल की राजनीति में अब एक बड़े फेरबदल की पटकथा लिखी जा रही है।

Related posts

ऑपरेशन शेरवाली: राजौरी में 32 दिनों से जारी आतंकवाद विरोधी अभियान, सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं पुण्यतिथि: ‘बलिदान दिवस’ पर देश ने किया याद

श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट: वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More