राजौरी के जंगलों में ‘ऑपरेशन शेरावाली’ का 20वां दिन: आतंकियों की तलाश में सुरक्षा बलों का सख्त पहरा

राजौरी के जंगलों में 'ऑपरेशन शेरावाली' का 20वां दिन: आतंकियों की तलाश में सुरक्षा बलों का सख्त पहरा

 

राजौरी के गम्भीर मुगलन सेक्टर में ‘ऑपरेशन शेरावाली’ लगातार जारी। सुरक्षा बल 20 दिनों से घने जंगलों में चला रहे सर्च ऑपरेशन।

 

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का गम्भीर मुगलन सेक्टर इन दिनों सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में है। यहाँ के दोरीमल के घने जंगलों में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन शेरावाली’ अपने 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह अभियान क्षेत्र में छिपे आतंकवादियों को खोजने और उन्हें बेअसर करने के उद्देश्य से अत्यंत सूक्ष्मता और दृढ़ता के साथ चलाया जा रहा है। पिछले करीब तीन सप्ताह से जारी यह सर्च ऑपरेशन सुरक्षा बलों के हौसले और उनकी पेशेवर दक्षता का एक बड़ा उदाहरण है।

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की चुनौती

राजौरी का यह क्षेत्र अपनी कठिन भौगोलिक बनावट और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहाँ का इलाका सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जहाँ दिन हो या रात, सैनिकों को सतर्क रहना पड़ता है। ऑपरेशन में शामिल जवान 24 घंटे लगातार गश्त कर रहे हैं और उन क्षेत्रों की गहन छानबीन कर रहे हैं जहाँ आतंकवादियों के छिपे होने की जरा सी भी संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकी संसाधनों का भी पूरा उपयोग कर रहे हैं। जंगलों के चप्पे-चप्पे पर नज़र रखने के लिए ड्रोन और अन्य निगरानी उपकरणों की मदद ली जा रही है, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि सुरक्षा बलों की नजरों से बच न सके।

क्षेत्र वर्चस्व और सुरक्षा घेरे की मजबूती

‘ऑपरेशन शेरावाली’ के तहत केवल जंगलों में ही नहीं, बल्कि आसपास के रिहाइशी और मुख्य सड़कों वाले इलाकों में भी सुरक्षा घेरा बेहद सख्त कर दिया गया है। रणनीतिक स्थानों और चौकियों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। यहाँ से गुजरने वाले हर वाहन और व्यक्ति की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि आतंकवादियों को किसी भी प्रकार की रसद (लॉजिस्टिकल) सहायता न मिल सके और न ही वे यहाँ से भागने या घुसपैठ करने में सफल हो सकें। सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य ध्यान ‘एरिया डोमिनेशन’ (क्षेत्र वर्चस्व) पर है, जिससे इलाके में आतंकवादियों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा सके और उन्हें किसी भी तरह का सुरक्षित ठिकाना न मिल सके।

स्थानीय सहयोग और जन-भागीदारी का महत्व

इस पूरे अभियान में सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और उनकी असुविधा को लेकर पूरी तरह सजग हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना है, और इसके लिए वे नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अज्ञात व्यक्ति के दिखाई देने पर तुरंत निकटतम सुरक्षा प्रतिष्ठान को सूचित करें। क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में समुदाय का सहयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसे सेना और पुलिस ने भी सराहा है। यह जन-समर्थन ही है जो सुरक्षा बलों को आतंकवाद के खिलाफ इस लंबी लड़ाई में और अधिक मजबूती प्रदान करता है।

पीर पंजाल क्षेत्र में शांति का संकल्प

पीर पंजाल का यह संवेदनशील क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा बलों की प्राथमिकता में रहा है। ‘ऑपरेशन शेरावाली’ इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र से आतंकवाद के खात्मे के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों ने कहा कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि सभी संदिग्ध तत्वों को निष्प्रभावी नहीं कर दिया जाता। यह निरंतर दबाव न केवल आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम कर रहा है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा का एक ऐसा ढांचा भी तैयार कर रहा है जो भविष्य में किसी भी बाहरी खतरे को पनपने से रोकेगा।

आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन के और अधिक निर्णायक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। सुरक्षा बल जिस दृढ़ निश्चय के साथ इस अभियान को चला रहे हैं, वह न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक कड़ा संदेश है, बल्कि यह क्षेत्र के निवासियों में भी विश्वास बहाली का कार्य कर रहा है। ‘ऑपरेशन शेरावाली’ इस बात की मिसाल है कि भारतीय सुरक्षा बल किसी भी परिस्थिति में अपने देश और नागरिकों की रक्षा के लिए अडिग हैं।

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