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29 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 850 अंक से अधिक चढ़ा और निफ्टी 24,230 के पार पहुंचा। जानिए IT शेयरों में खरीदारी, FII निवेश, फेडरल रिजर्व की उम्मीदों और India VIX में गिरावट समेत बाजार की तेजी के 4 बड़े कारण।
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 29 जुलाई, को शानदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 50 ने एक बार फिर 24,230 का स्तर पार कर लिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी और विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार में मजबूत माहौल बनाया।
सुबह लगभग 10:20 बजे, बीएसई सेंसेक्स 852.27 अंक (1.11%) की बढ़त के साथ 77,618.19 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 246.40 अंक (1.03%) बढ़कर 24,231.75 के स्तर पर पहुंच गया।
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.57% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 लगभग 0.75% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे साफ संकेत मिला कि बाजार में निवेशकों का भरोसा व्यापक स्तर पर मजबूत हुआ है।
आईटी शेयरों में खरीदारी बनी तेजी की सबसे बड़ी वजह
आज की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण आईटी सेक्टर में आई जोरदार खरीदारी रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2.7% की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स कुल मिलाकर लगभग 8.4% तक मजबूत हो चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में दबाव में रहे भारतीय आईटी शेयरों में अब निवेशक दोबारा रुचि दिखा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों में तेजी के बाद अब निवेशकों का रुझान भारतीय आईटी कंपनियों की ओर बढ़ रहा है।
इसके अलावा वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने भारतीय आईटी सेक्टर पर अपना रुख बेहतर करते हुए इसे ‘Neutral’ रेटिंग दी है। इससे भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा और आईटी शेयरों में खरीदारी तेज हो गई।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा बाजार का भरोसा
बाजार की मजबूती का दूसरा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी रही। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹755 करोड़ के शेयर खरीदे।
यह लगातार पांच कारोबारी सत्रों की बिकवाली के बाद पहली बार था जब विदेशी निवेशकों ने शुद्ध खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि बड़े निवेशकों की खरीदारी से बाजार में स्थिरता और भरोसा बढ़ता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर निवेशकों की नजर
आज वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीति बैठक पर भी टिकी हुई है। बाजार को उम्मीद है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
यदि फेड ब्याज दरों को स्थिर रखता है और भविष्य में दरों में कटौती के संकेत देता है, तो इसका सकारात्मक असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ सकता है। इसी उम्मीद ने भारतीय बाजार में भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है।
हालांकि निवेशक केवल ब्याज दरों पर ही नहीं, बल्कि फेड अध्यक्ष की टिप्पणी पर भी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे आने वाले महीनों की आर्थिक नीति का संकेत मिल सकता है।
इंडिया VIX में गिरावट से बढ़ा निवेशकों का आत्मविश्वास
शेयर बाजार में तेजी का एक और महत्वपूर्ण कारण इंडिया VIX में आई गिरावट रही। इंडिया VIX को बाजार का ‘फियर इंडेक्स’ भी कहा जाता है क्योंकि यह बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।
आज इंडिया VIX करीब 3.06% गिरकर 12.18 पर आ गया। इसका मतलब है कि निवेशकों को निकट भविष्य में बाजार में अत्यधिक अस्थिरता की आशंका कम दिखाई दे रही है।
जब VIX नीचे आता है, तो आमतौर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वे शेयर बाजार में अधिक निवेश करने के लिए तैयार होते हैं। यही कारण है कि आज अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली।
किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती?
आज के कारोबार में आईटी के अलावा मेटल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। इन सेक्टरों में मजबूत खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है और वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार अपनी तेजी बरकरार रख सकता है।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक खबरें आती हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि तेज उतार-चढ़ाव के बीच केवल मजबूत बुनियादी स्थिति (Fundamentals) वाली कंपनियों में ही निवेश करें और किसी भी निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य एवं जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें।