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मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सरांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और पिता के त्याग व संघर्ष से जुड़ी उनकी प्रेरणादायक कहानी जानिए।
भारतीय क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि एक दिन वह टीम इंडिया की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करे। मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सरांश जैन का यह सपना अब आखिरकार पूरा होने जा रहा है। वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने के बाद सरांश को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। श्रीलंका दौरे के लिए घोषित भारतीय टीम में उन्हें चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह शामिल किया गया है। यह चयन केवल उनके प्रदर्शन का परिणाम नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, धैर्य और परिवार के त्याग की कहानी भी है। सरांश की सफलता के पीछे उनके पिता का वह बलिदान भी छिपा है, जिसने उन्हें क्रिकेट पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी गंभीर बीमारी तक उनसे छिपा ली।
घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन का मिला इनाम
सरांश जैन ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत मध्य प्रदेश की सीनियर टीम से की थी। बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने वाले और ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाले इस ऑलराउंडर ने जल्द ही घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए खुद को एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। उनकी खासियत केवल विकेट लेना नहीं रही, बल्कि निचले क्रम में उपयोगी रन बनाकर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालना भी रही है।
सरांश ने गेंद और बल्ले दोनों से लगातार योगदान देकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यही वजह रही कि उन्हें इंडिया ए, दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन और ईरानी ट्रॉफी में रेस्ट ऑफ इंडिया जैसी टीमों में भी लगातार मौके मिले। हर स्तर पर उन्होंने खुद को साबित किया और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में बने रहे।
श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए के लिए भी किया शानदार प्रदर्शन
हाल ही में जून-जुलाई के दौरान सरांश जैन इंडिया ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर गए थे, जहां दो अनौपचारिक टेस्ट मुकाबले खेले गए। पहले मैच में उनका प्रदर्शन साधारण रहा, लेकिन दूसरे मुकाबले में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए छह विकेट झटके और नाबाद 70 रन की महत्वपूर्ण पारी भी खेली। इस प्रदर्शन ने उनके चयन की दावेदारी को और मजबूत कर दिया।
चयनकर्ताओं ने उनकी निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को देखते हुए श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल करने का फैसला किया।
आईपीएल नहीं, घरेलू क्रिकेट बना सफलता की सीढ़ी
आज के दौर में कई युवा खिलाड़ियों को आईपीएल के जरिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रास्ता मिलता है, लेकिन सरांश जैन की कहानी इससे अलग है। उन्होंने बिना आईपीएल की चमक-दमक के घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर अपनी जगह बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि यदि खिलाड़ी लगातार प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करता रहे, तो चयनकर्ताओं की नजर उस पर जरूर पड़ती है।
उनकी सफलता उन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो मानते हैं कि केवल आईपीएल ही टीम इंडिया तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता नहीं है।
पिता ने बेटे के सपने के लिए छिपाई अपनी बीमारी
सरांश जैन के जीवन का सबसे भावुक अध्याय वर्ष 2014 से जुड़ा है। उस समय वह मध्य प्रदेश के एक क्लब की ओर से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर क्रिकेट खेलने गए थे। उसी दौरान उनके पिता को कैंसर का पता चला और उनके चेहरे की बड़ी सर्जरी हुई। परिवार ने यह फैसला किया कि सरांश को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाएगी, ताकि उनका पूरा ध्यान क्रिकेट पर बना रहे और उनका प्रदर्शन प्रभावित न हो।
जब सरांश ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटे, तब उन्हें पहली बार इस सच्चाई का पता चला कि उनके पिता कैंसर से जूझ रहे थे और उनकी सर्जरी हो चुकी थी। यह सुनकर वह भावुक हो गए।
पिता का एक संदेश बना सबसे बड़ी ताकत
एक इंटरव्यू में सरांश जैन ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें एक छोटा-सा संदेश दिया था, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस नोट में लिखा था,
“मैं अब ठीक हूं बेटा। अगर तुम और अच्छा खेलोगे तो मैं और जल्दी ठीक हो जाऊंगा।”
पिता के इन शब्दों ने सरांश को मानसिक रूप से और मजबूत बना दिया। उन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा माना और उसी दिन यह संकल्प लिया कि वह अपने प्रदर्शन से अपने परिवार का सपना जरूर पूरा करेंगे।
अब टीम इंडिया के लिए खुद को साबित करने की चुनौती
भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिलना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन असली चुनौती टीम में अपनी जगह को लंबे समय तक बनाए रखना होती है। सरांश जैन के सामने भी यही चुनौती होगी। श्रीलंका की स्पिन मददगार पिचों पर उनसे गेंद और बल्ले दोनों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाएगी।
अगर उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है और वे अपने घरेलू क्रिकेट जैसा प्रदर्शन दोहराने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टेस्ट टीम को एक और भरोसेमंद ऑलराउंडर मिल सकता है।
संघर्ष, धैर्य और समर्पण की मिसाल हैं सरांश जैन
सरांश जैन की कहानी केवल क्रिकेट में सफलता की नहीं, बल्कि परिवार के त्याग, धैर्य और अटूट विश्वास की भी कहानी है। घरेलू क्रिकेट में वर्षों तक लगातार मेहनत करना, बिना सुर्खियों में आए खुद को साबित करना और पिता की बीमारी जैसी कठिन परिस्थिति के बावजूद अपने लक्ष्य से न भटकना, उनके मजबूत चरित्र को दर्शाता है। अब जब उन्हें पहली बार टीम इंडिया की टेस्ट कैप मिलने की उम्मीद है, तो पूरे देश की नजरें इस युवा ऑलराउंडर पर होंगी कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का वही परिचय दें, जिसने उन्हें घरेलू क्रिकेट से भारतीय टीम तक पहुंचाया।