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PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन किया। जानें किताब और कोविंद के जीवन से जुड़ी खास बातें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने लंबे संबंधों को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व, मार्गदर्शन और स्नेह की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कोविंद जी का मार्गदर्शन उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यह आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक ऐसी विरासत बनेगी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
PM मोदी ने याद किया कोविंद से अपना जुड़ाव
आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह रामनाथ कोविंद को लंबे समय से जानते हैं और उन्हें करीब से जानने का अवसर भी मिला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में कोविंद का मार्गदर्शन, उनके विशेष स्नेह और आत्मीयता ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, कोविंद का सहज और सरल व्यक्तित्व उनके सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।
PM मोदी ने कहा कि उन्हें कोविंद के जीवन और उनकी क्षमताओं को समझने का अवसर मिला है। इसी आधार पर वह पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि उनकी आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक ‘cherished legacy’, यानी cherished विरासत साबित होगी। उन्होंने कहा कि कोविंद के जीवन की यात्रा और राष्ट्र के लिए उनके योगदान के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है, लेकिन पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम केवल एक परिचय की तरह होना चाहिए। वास्तविक रूप से उनके जीवन और विचारों को समझने के लिए लोगों को स्वयं यह पुस्तक पढ़नी चाहिए।
युवाओं से किताब पढ़ने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से देश की युवा पीढ़ी से रामनाथ कोविंद की आत्मकथा पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को कोविंद के जीवन, उनके संघर्षों और अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। PM मोदी ने कहा कि कोविंद ने अपने जीवन की यात्रा को अपने शब्दों में प्रस्तुत किया है, इसलिए युवाओं के लिए यह पुस्तक उनके अनुभवों और विचारों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
प्रधानमंत्री ने आत्मकथा के शीर्षक की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ नाम अपने आप में एक गहरा संदेश देता है। उनके अनुसार, कोविंद के जीवन में संघर्ष व्यक्तिगत जरूर थे, लेकिन उन संघर्षों से हासिल हुई सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह सफलता भारतीय गणराज्य और देश के लोकतंत्र की जीत का भी प्रतीक है।
संघर्ष से राष्ट्रपति पद तक का सफर
रामनाथ कोविंद का जीवन संघर्ष, सामाजिक सरोकार और संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ी लंबी यात्रा का उदाहरण रहा है। एक सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में भारत के राष्ट्रपति के रूप में देश का नेतृत्व किया।
उनकी आत्मकथा में जीवन के अलग-अलग पड़ावों, संघर्षों, अनुभवों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े पहलुओं को स्थान दिया गया है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल किसी व्यक्ति की जीवन कहानी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की यात्रा को समझने का अवसर भी बताया।
रामनाथ कोविंद ने कहा- भावुक पल है आज का दिन
वहीं, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आत्मकथा के विमोचन को अपने लिए भावुक क्षण बताया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर देश और समाज को संबोधित किया है, लेकिन आज का अवसर उनके लिए विशेष है।
कोविंद ने कहा कि उन्होंने अपनी आत्मकथा में अपने जीवन के अनुभवों और यात्रा को पहले ही साझा कर दिया है। ऐसे में आज के कार्यक्रम में उन्हें क्या कहना चाहिए, इसे लेकर वह सोच रहे थे। उन्होंने कहा कि जो कुछ कहना था, वह काफी हद तक पुस्तक में लिख चुके हैं और अब पाठक उनकी यात्रा को पुस्तक के माध्यम से पढ़ेंगे।
लोकतंत्र की यात्रा को समझने का अवसर
रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ऐसे समय में सामने आई है, जब लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को समझने के लिए सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्वों के अनुभवों का महत्व बढ़ गया है। पुस्तक के माध्यम से पाठकों को उनके जीवन के संघर्षों, उपलब्धियों और सार्वजनिक सेवा के अनुभवों को समझने का अवसर मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश भी इसी दिशा में रहा कि कोविंद के जीवन को केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह यात्रा भारत के लोकतंत्र की उस क्षमता को भी दर्शाती है, जिसमें सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि आत्मकथा को भारतीय गणराज्य की उपलब्धियों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी आत्मकथा
कुल मिलाकर, ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन केवल एक पुस्तक के लॉन्च का अवसर नहीं रहा, बल्कि यह रामनाथ कोविंद के जीवन, संघर्षों और सार्वजनिक सेवा की यात्रा को सामने लाने का अवसर भी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां इसे भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विरासत बताया, वहीं रामनाथ कोविंद ने अपने अनुभवों को पाठकों के सामने सौंपते हुए कहा कि अब उनकी जीवन यात्रा पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुंचेगी। उम्मीद है कि यह आत्मकथा युवाओं सहित उन सभी पाठकों को प्रेरित करेगी, जो भारत के लोकतांत्रिक सफर और सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों को करीब से समझना चाहते हैं।